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Rajyasabha Election: राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटों के लिए 'महाभारत', अब होर्स ट्रेडिंग और बाड़ाबंदी

कांग्रेस को अपने प्रदेश राजस्थान और भाजपा शासित हरियाणा में एक सीट पर कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा। मीडिया समूह के मालिकों की एंट्री से इन राज्यों में सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। जी मीडिया समूह से जाने-माने उद्योगपति सुभाष चंद्रा और आईटीवी मीडिया नेटवर्क से निदेशक कार्तिकेय शर्मा हरियाणा से राज्यसभा चुनाव मैदान में कूद गए हैं। इनके बाद से राज्यों में अब असंतुष्टों और गुटबंदी पर नजर है। विधायकों की बाड़ेबंदी भी शुरू हो गई है।

जयपुर

Updated: June 01, 2022 10:59:16 am

सबसे पहले बात राजस्थान की। राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों के लिए प्रदेश में हो रहे चुनावों (rajyasabha election) में उद्योगपति एवं मीडिया हाउस से जुड़े सुभाष चन्द्रा की एंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है। चन्द्रा ने मंगलवार को भाजपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल किया है। वहीं कांग्रेस से रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी और भाजपा से घनश्याम तिवाड़ी ने पर्चा भरा। चार सीटों के लिए कुल छह नामांकन दाखिल हुए हैं। अब बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी। प्रत्येक प्रत्याशी को जीत के लिए 41 विधायकों के वोटों की जरूरत होगी।
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भाजपा और कांग्रेस कर रहे एक सीट पर जीत का दावा

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जीत का दावा कर रहे हैं और अपने समर्थन में विधायकों का संख्याबल दिखा रहे हैं

  • कांग्रेस: कांग्रेस के 108 विधायक हैं। तीन अन्य दलों के पांच, 13 निर्दलीय सहित कुल 126 विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के तीन प्रत्याशियों को जीत के लिए कुल 123 वोटों की जरूरत है।
  • भाजपा: भाजपा के 71 विधायक हैं। तीन अन्य दलों के सात, पांच निर्दलीय सहित कुल 83 विधायकों का समर्थन हासिल है। भाजपा प्रत्याशी और भाजपा समर्थित प्रत्याशी को जीत के लिए 82 वोट चाहिए।
राजस्थान में हैं अब चार सीटें और दावेदार पांच
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में प्रदेश (rajyasabha election Rajasthan) के 4 सांसद रिटायर होने जा रहे हैं। इन सांसदों में ओमप्रकाश माथुर, एल्फांस कांनाथन, राजकुमार वर्मा और हर्षवर्धन सिंह शामिल हैं। ये चारों ही सदस्य भाजपा के हैं। इनका कार्यकाल 4 जुलाई तक रहेगा, लेकिन चुनाव पहले ही जाएंगे। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस की 2 सीटों पर जीत तय मानी जा रही है। जबकि भाजपा की एक सीट पक्की मानी जा रही है। एक सीट पर सियासी घमासान शुरू हो चुका है। राजस्थान में राज्यसभा सदस्यों की कुल संख्या 10 है। इसमें में से 7 भाजपा के पास है जबकि कांग्रेस के पास 3 है। लेकिन चुनाव के बाद यह संख्या बदल जाएगी। कांग्रेस के सदस्यों की संख्या बढ़कर कम से कम 5 जबकि भाजपा की घटकर यह संख्या 4 हो जाएगी। अगर चौथी सीट भी कांग्रेस के हाथ लग जाती है तो उसकी मजबूती और बढ़ जाएगी। राज्य से कांग्रेस के जो मौजूदा सदस्य हैं उनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी है। वहीं भाजपा के किरोड़ीलाल मीणा, राजेंद्र गहलोत औऱ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव हैं।
बाड़ाबंदी की तैयारी में जुटी भाजपा-कांग्रेस

चार सीटों पर पांच बड़े-बड़े उम्मीदवारों के उतरते ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही बाड़ाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। संभवत: कांग्रेस 3 जून से बाड़ाबंदी कर सकती है। भाजपा ने अपने विधायकों को 5 जून को जयपुर बुलाया है। अगले दिन से बाड़ाबंदी होगी।
9 निर्दलीय बने कांग्रेस उम्मीदवारों के प्रस्तावक

कांग्रेस के तीन प्रत्याशियों के 9 निर्दलीय विधायक प्रस्तावक बने हैं। रणदीप सुरजेवाला के राजकुमार गौड़, मुकुल वासनिक के लक्ष्मण मीणा, रामकेश, आलोक बेनीवाल, कांतिप्रसाद, बाबूलाल नागर, महादेव सिंह खंडेला और प्रमोद तिवारी के ओम प्रकाश हुड़ला, सुरेश टांक प्रस्तावक बने हैं।
अंतिम समय पर बदली रणनीति

सुभाष चन्द्रा को पहले भाजपा प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कराने को लेकर रणनीति बनी थी, लेकिन विधानसभा में बैठक के बाद निर्दलीय ही नामांकन करवाने पर सहमति बनी और सभी प्रस्तावक भाजपा विधायक बने। बताया जा रहा है कि चन्द्रा को समर्थन देने के लिए एक अन्य पार्टी ने इनकार कर दिया था इसलिए निर्दलीय उम्मीदवार बनाया गया।
हॉर्स ट्रेडिंग के कयास तेज

4 सीटों पर 5 बड़े दावेदार आने के बाद हॉर्स ट्रेडिंग के कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि भाजपा अपने एक उम्मीदवार के साथ ही समर्थित निर्दलीय को जिताने के लिए जोर आजमाइश करेगी, वहीं राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस हर हाल में अपने तीनों उम्मीदवारों को जिताना चाहेगी।
मैं बाहरी नहीं...सुभाष चंंद्रा

उद्योगपति सुभाष चंद्रा ने कहा है कि चुनाव लड़ने के लिए पहले भाजपा आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व से आग्रह किया। उसके बाद कुछ निर्दलीय विधायकों से बात की। इसके बाद ही यह निर्णय किया। मैं बाहरी नहीं, जन्मभूमि मेरी राजस्थान है। उम्मीद है भाजपा के 30 वोटों के साथ ही अतिरिक्त 14 से 15 वोट और मिलेंगे।
पहले जो 25-35 करोड़ के लालच में नहीं आए, उन्हें क्या खरीदेंगे: सीएम

वहीं , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा के साथ भी वही होने वाला है जो 15 साल पहले निर्दलीय अनिल भक्कड़ के साथ हुआ था। इस बार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों के एकजुट होने के साथ ही निर्दलीय, बीटीपी, माकपा, आरएलडी का भी समर्थन है। भाजपा ने पिछली बार हमारी सरकार गिराने का षड्यंत्र रचा और हम 34 दिन तक होटलों में बंद रहे। उस समय भी विधायक 25 से 35 करोड़ तक का लालच छोड़कर हमारे साथ रहेे। अब भाजपा उन्हें क्या खरीदेगी। जिन 19 कांग्रेस विधायकों को गुमराह कर ले गए थे, वो भी अब हमारे साथ हैं। सीएम मंगलवार को विधानसभा में मीडिया से वार्ता कर रहे थे।
ये करेंगे हॉर्स ट्रेडिंग

सीएम ने अपने तीनों उम्मीदवारों की जीत का दावा किया और कहा कि भाजपा के पास पूरा वोट नहीं है। तो क्या यहां फिर ये हॉर्स ट्रेडिंग करेंगे। ऑफर करेंगे, लोभ-लालच देंगे। जब सरकार बचाने में भी इनके चक्करों में विधायक नहीं आए तो उनसे ये क्या उम्मीद कर सकते हैं। यह वही विधायक हैं जिन्हें उस समय होटल से निकलने के 10 करोड़ ऑफर किए गए थे। हम एकजुट हैं, चुनाव जीतेंगे।
सुभाष चंद्रा और प्रमोद तिवारी के बीच होगा राजस्थान में मुकाबला

साफ है कि राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में मीडिया दिग्गजों की आखिरी मिनट में एंट्री ने कम से कम दो राज्यों राजस्थान और हरियाणा में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला खड़ा कर दिया है। संसद के उच्च सदन के सदस्य और ज़ी समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने भाजपा के समर्थन के साथ राजस्थान से अपना नामांकन दाखिल किया। यहां कांग्रेस चार में से दो और बीजेपी एक सीट जीतने की स्थिति में है। अब चौथी सीट के लिए मुकाबला सुभाष चंद्रा के साथ होगा, जो कांग्रेस के प्रमोद तिवारी को चुनौती देंगे। कांग्रेस ने बताया जा रहा है कि सुरजेवाला और मुकुल वासनिक को प्राथमिकता देने का मन बनाया है।
गुटबंदी के साथ कांग्रेस के उम्मीदवार बाहरी होने पर भी सवाल

कथित तौर पर भाजपा राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस में अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट विवाद में पनप रही नाराजगी का फायदा उठाने की कोशिश में है। आपको बता दें कि कांग्रेस यहां राज्यसभा उम्मीदवारों की अपनी पसंद पर गुस्से का सामना कर रही है। कांग्रेस कैंडिडेट रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी सभी अन्य राज्यों से हैं और स्थानीय विधायकों द्वारा बाहरी के रूप में देखे जाते हैं। कहा भी जा रहा है कि जिस उत्तर प्रदेश के तीन राज्यसभा सांसद भेजने के कोशिश कांग्रेस राजस्थान से कर रही है वो उत्तर प्रदेश में दो विधायक ही जिता पाए थे।
राजस्थान में बढ़ी निर्दलीय विधायकों की भूमिका

वसुंधरा राजे कैबिनेट के पूर्व मंत्री रहे घनश्याम तिवारी बीजेपी के उम्मीदवार हैं। 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 108 विधायक हैं और भाजपा के पास 71 वोट हैं। बीजेपी के पास 30 सरप्लस वोट हैं और दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 11 और वोट चाहिए। तीसरी सीट जीतने के लिए कांग्रेस को 15 और वोट चाहिए। इसलिए, छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार सीट जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 13 निर्दलीय, दो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सदस्य, भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दो और सीपीएम के दो विधायक हैं, जो निर्णायक कारक हो सकते हैं।
हरियाणा में भी एक सीट पर टक्कर

भाजपा शासित हरियाणा में कांग्रेस को एक सीट पर कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा। आईटीवी नेटवर्क के प्रबंध निदेशक कार्तिकेय शर्मा हरियाणा से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके आने से कांग्रेस के अजय माकन की पिच पर सवालिया निशान लग सकता है। कार्तिकेय शर्मा कांग्रेस के पूर्व नेता विनोद शर्मा के बेटे और हरियाणा के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा के दामाद हैं। उन्हें भाजपा के साथ-साथ जजपा (जननायक जनता पार्टी) का भी समर्थन प्राप्त है। जजपा नेता अजय सिंह चौटाला ने कहा कि पार्टी के सभी 10 विधायक कार्तिकेय शर्मा का समर्थन करेंगे। किसी भी पार्टी को एक सीट जीतने के लिए 31 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 31 हैं। भाजपा के पास नौ सरप्लस वोट हैं, जिसे वह शर्मा को ट्रांसफर कर सकती है।
हरियाणा में हालांकि कांग्रेस नेता अजय माकन कागज पर मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन जिन कारकों से वे प्रभावित हो सकते हैं उनमें कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई शामिल हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि भाजपा बिश्नोई तक पहुंच सकती है।
महाराष्ट्र में भी महाभारत, कांग्रेस प्रदेश महासचिव का इस्तीफा

महाराष्ट्र में राज्यसभा की छह सीटें हैं। कांग्रेस नेता नगमा ए मोरारजी द्वारा राज्यसभा के अवसर के लिए 18 साल के इंतजार पर एक ट्वीट ने पार्टी में 'स्थानीय बनाम बाहरी' लड़ाई की पोल खोल दी। कांग्रेस छठी सीट के लिए उत्तर प्रदेश के नेता इमरान प्रतापगढ़ी को महाराष्ट्र से राज्यसभा भेज रही है। नगमा ने ट्वीट किया कि सोनिया गांधी ने "व्यक्तिगत रूप से" वादा किया था कि उन्हें 2003-04 में राज्यसभा में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "इमरान को महाराष्ट्र से राज्यसभा में शामिल किया गया है। मैं पूछता हूं कि क्या मैं कम योग्य हूं?" बाद में उन्होंने अपने समर्थन का संकेत देते हुए प्रतापगढ़ी को बधाई दी। लेकिन मामला यहीं थमा नहीं है। इमरान प्रतापगढ़ी को टिकट देने के विरोध में महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव आशीष जोशी ने भी इस्तीफा दे दिया है।
वहीं, भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार धनंजय महादिक को आगे बढ़ाकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। राज्य में अब छह राज्यसभा सीटें हैं और महादिक की उम्मीदवारी के साथ उम्मीदवार सात हो गए हैं। महादिक को भाजपा ने शिवसेना के दूसरे उम्मीदवार संजय पवार की संभावना को कम करने के लिए मैदान में उतारा है। जबकि शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महा विकास अघाड़ी गठबंधन का कहना है कि उनके पास छह में से तीन सीटें जीतने की संख्या है, जिन्हें राज्य विधानसभा के 288 सदस्यों द्वारा चुना जाना है। भाजपा अपने दम पर दो जीत सकती है, जिससे छठी सीट के लिए मुकाबला खुला है।
दरअसल, भाजपा ने महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए तीसरे उम्मीदवार को खड़ा किया है। भाजपा के इस फैसले पर शिवसेना ने खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। दरअसल केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित भाजपा के तीन उम्मीदवारों, कांग्रेस के उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी और राकांपा के प्रफुल्ल पटेल ने 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही महाराष्ट्र में छठी सीट के लिए करीबी मुकाबले का मंच तैयार हो गया है। भाजपा का दावा है कि उसके पास प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 42 सीटों के साथ, अपने तीन उम्मीदवारों में से दो - पीयूष गोयल और अनिल बोंडे - को निर्वाचित होने के लिए पर्याप्त संख्या है। बीजेपी के पास अब 22 वोट बचे हैं। पार्टी का आकलन है कि उसे बाकी वोट निर्दलीय और शिवसेना, राकांपा और अन्य पार्टियों के असंतुष्ट विधायकों को लुभाकर मिलेगा।
क्या है महाराष्ट्र में राज्यसभा सीट का समीकरण?

महाराष्ट्र में राज्यसभा की छह सीटें खाली हुई हैं, जिनमें कांग्रेस और राकांपा के पास एक-एक सीट जीतने के लिए प्रयाप्त संख्या है, जबकि भाजपा के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं। शिवसेना के पास एक उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए पर्याप्त संख्या है। हालांकि, उसे अपने दूसरे उम्मीदवार का चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों से 30 और वोटों की आवश्यकता है। दरअसल भाजपा अपने बूते दो सीट जीत सकती है। कांग्रेस, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एक-एक सीट अपने बूते जीत सकती है। साथ ही महाविकास आघाडी (एमवीए) में शामिल तीनों दलों के पास एक अन्य सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोट होंगे। शिवसेना अपनी दूसरी सीट जीतने के लिए इन्हीं वोटों पर निर्भर है।
शिवसेना ने भाजपा पर लगाए खरीद परोख्स के इल्जाम

शिवसेना के संजय राउत, जो पवार के साथ राज्यसभा सीट के उम्मीदवार हैं, ने कहा कि भाजपा खरीद-फरोख्त में शामिल होने की कोशिश कर रही है। राउत ने कहा, "वे खरीद-फरोख्त करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए अपना तीसरा उम्मीदवार खड़ा करना एक चाल है। हमारी सरकार इस चुनाव पर कड़ी नजर रखे हुए है।" वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि आंकड़े एमवीए के पक्ष में हैं और इसके सभी उम्मीदवार जीतेंगे।
देवेंद्र फडणवीस बोले- अपना उम्मीदवार वापस ले शिवसेना

महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को खड़ा करने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, "हमें खरीद-फरोख्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमने तीन उम्मीदवारों को खड़ा किया है क्योंकि हमें विश्वास है कि हमारे तीन उम्मीदवार निर्वाचित होंगे। शिवसेना को अपना दूसरा उम्मीदवार वापस लेना चाहिए। हमारे सभी उम्मीदवार राज्य से हैं और उसी पार्टी से हैं। हमें विश्वास है कि लोग अपने विवेक का इस्तेमाल करेंगे और हमारे उम्मीदवार को वोट देंगे। कोई खरीद-फरोख्त नहीं होने वाली है।'

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