scriptSingle-use plastic ban: Beverage plastic straw ban from july 1 | अगर आप जूस, छाछ या लस्सी के पैक खरीदते हैं तो यह जान लें | Patrika News

अगर आप जूस, छाछ या लस्सी के पैक खरीदते हैं तो यह जान लें

भारत में 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगने जा रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए तो अच्छा फैसला है, लेकिन इससे कंपनियों के व्यापार पर काफी असर पड़ने वाला है। इस बैन से खासकर टेट्रा पैक में अपने उत्पाद बेचने वाली कंपनियां घबराई हुई हैं।

नई दिल्ली

Published: June 17, 2022 12:32:06 pm

भारत में 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगनी वाली है। सरकार का सिंगल यूज प्लास्टिक (प्लास्टिक स्ट्रॉ सहित) पर प्रतिबंध एक जुलाई, 2022 से लागू होगा। यानी 1 जुलाई से आपके जूस पीने का तरीका बदलना पड़ सकता है। जूस के टेट्रा पैक के साथ अब स्ट्रॉ नहीं मिलेगा। देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी लगने के साथ-साथ इसमें प्लास्टिक स्ट्रॉ भी शामिल किया गया है। वहीं एक ओर जहां सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर एक जुलाई से लगने वाली रोक से पर्यावरण कार्यकर्ता खुश हैं वहीं टेट्रा पैक में अपने उत्पाद बेचने वाली कंपनियां घबराईं हुई हैं।
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ये वो कंपनियां हैं जिनके उत्पाद छोटे पैकेट में आते हैं और उनके साथ प्लास्टिक की स्ट्रॉ लगी होती है। 5 से 20 रुपये के बीच मिलने वाला जूस, एप्पी, लस्सी और एनर्जी ड्रिंक और छाछ जैसे टेट्रा पैक के साथ आने वाली इन स्ट्रॉ पर भी सिंगल यूज प्लास्टिक बैन के तहत रोक लगा दी गई है। कई देसी-विदेशी बेवरेज कंपनियों ने प्लास्टिक स्ट्रॉ को इसमें छूट देने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया था।
कंपनियों ने इस प्लास्टिक बैन को आगे बढ़ाने की अपील भी कर चुके हैं ताकि कुछ समय में उसे लेकर एक दूसरा इंफ्रास्टक्टर खड़ा किया जा सके। बता दें, सिगंल यूज प्लास्टिक पर बैन से प्रोडक्ट पैकेजिंग पर काफी असर पड़ेगा। अमूल, फ्रूटी, डाबर पारले और अन्य पेय पदार्थ उत्पादन करने वाली कंपनियां अपने उत्पाद के साथ सिंगल यूज स्ट्रॉ देती है। सिंगल यूज प्लास्टिक वह प्लास्टिक होता है जिसका इस्तेमाल एक ही बार किया जाता है और फिर ग्राहक उसे फेंक देता है। ये सिंगल यूज प्लास्टिक गुजरते समय के साथ लैंडफिल साइटों पर कूड़े का अंबार बन जाते हैं।
इसी कड़ी में घरेलू व्यापारियो के संगठन अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने सरकार से विकल्प के अभाव में एक बार इस्तेमाल वाले ‘प्लास्टिक' पर प्रतिबंध को फिलहाल टालने का अनुरोध किया था। कैट का कहना था कि यह एक व्यावहारिक कदम है और पर्यावरण की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन विकल्पों के अभाव में, यह कदम घरेलू व्यापार और वाणिज्य के लिए एक बुरा सपना साबित हो सकता है।
वहीं डेयरी कंपनी अमूल ने पर्यावरण मंत्रालय से प्लास्टिक स्ट्रॉ पर प्रतिबंध को एक साल के लिए टालने का अनुरोध किया। कंपनी ने कहा है कि घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कागज के स्ट्रॉ की कमी है। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी ने कहा, "हमने एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक स्ट्रॉ पर प्रस्तावित प्रतिबंध के बारे में पर्यावरण सचिव को पत्र लिखा है।"

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सोढ़ी ने बताया, "प्लास्टिक स्ट्रॉ हमारे बटर मिल्क और लस्सी के टेट्रा पैक के साथ ही जुड़ा होता है।" अमूल को प्रतिदिन 10 से 12 लाख प्लास्टिक स्ट्रॉ की जरूरत होती है। सोढ़ी ने कहा कि हमने मंत्रालय से आग्रह किया है कि स्थानीय उद्योग को कागज के स्ट्रॉ के उत्पादन की सुविधाएं विकसित करने के लिए एक साल का समय दिया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक अमूल ने 28 मई को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी से स्ट्रॉ पर प्रतिबंध लगाने में देरी की अपील की थी।
वहीं, भारत सरकार ने बड़ी वैश्विक और घरेलू पेय कंपनियों की कुछ प्लास्टिक स्ट्रॉ को 1 जुलाई से लागू होने वाले प्रतिबंध से छूट देने की मांग को खारिज कर दिया, जिससे अरबों डॉलर के उद्योग पर झटके की आशंका है। आपको बता दें, इससे पहले भी सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लग चुका है लेकिन पहले 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक के आइटम पर बैन लगा था। अब जो बैन लगने वाला है वह 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक पर लगने वाला है। यानी की जो हम प्लास्टिक की स्ट्रो, चम्मच, कटोरी, कप, गिलास, या फिर प्लास्टिक पैकेट का इस्तेमाल करते हैं, इन सभी पर बैन लग जाएगा।

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