scriptThe intention behind Zakia Jafri's petition is wrong, Godhara Riot | जाकिया जाफरी की याचिका के पीछे इरादे गलत, कड़ाही खौलाते रहने की कोशिश..ऐसे सभी लोगों को कटघरे में लाने की जरूरत: सु्प्रीम कोर्ट | Patrika News

जाकिया जाफरी की याचिका के पीछे इरादे गलत, कड़ाही खौलाते रहने की कोशिश..ऐसे सभी लोगों को कटघरे में लाने की जरूरत: सु्प्रीम कोर्ट

साल 2002 के गुजरात दंगों के मामले में जकिया जाफरी की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गत 24 जून को खारिज कर दिया। एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इस मुद्धे पर अब भाजपा भी हमलावर है और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मैंने मोदी जी को एक शब्द बोले बिना सब आरोप सहन करते, भगवान शंकर की तरह विषपान को गले में उतारकर, सहन करके लड़ते रहे, एक शब्द नहीं बोले...तो चलिए बताते हैं क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में...

जयपुर

Published: June 25, 2022 12:07:27 pm

बीस साल पहले के गुजरात दंगों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को एसआइटी की ओर से क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया जाफरी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा, ’यह याचिका कड़ाही को खौलाते रहने की कोशिश है और जाहिर है कि इसके पीछे का इरादा गलत है। इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है। उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्यवाही जरूरी है।’
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सुप्रीम कोर्ट ने 452 पेज के फैसले में दी पीएम मोदी को क्लीन चिट

जाकिया जाफरी ने याचिका में एसआइटी जांच रिपोर्ट को चुनौती दी थी। जस्टिस ए.एम. खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच ने अपने 452 पेज के फैसले में कहा, ’जाकिया की याचिका किसी दूसरे के निर्देशों से प्रेरित है। जाकिया 514 पेजों की याचिका के नाम पर परोक्ष रूप से विचाराधीन मामलों में अदालतों द्वारा दिए फैसलों पर भी सवाल उठा रही थी। ऐसा क्यों किया, यह उसे ही पता है। स्पष्ट रूप से उसने किसी के इशारे पर ऐसा किया।’ एसआइटी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि 2002 में उन्होंने (एसआइटी) दंगों की जो जांच की थी, उस पर किसी ने अंगुली नहीं उठाई।
दंगों में मारे गए कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं जाकिया

सिर्फ जाकिया जाफरी ने याचिका दाखिल कर व्यापक साजिश का आरोप लगाया। जाकिया जाफरी के पति कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी दंगे के दौरान मारे गए थे। उसने एसआइटी के फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। वहां पांच अक्टूबर, 2017 को याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
  • एसआइटी की दलील... एसआइटी ने कहा कि इस मामले में गहन छानबीन हुई। मामले में किसी को बचाया नहीं गया। कुल 275 लोगों से पूछताछ की गई और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे इस मामले में व्यापक साजिश की बात सामने आई हो। एसआइटी ने कहा दंगे को राज्य प्रायोजित बताने का याची का दावा दुर्भावना से प्रेरित है। इसका मकसद मामले को हमेशा गर्म रखना है।
  • जाकिया के आरोप... जाकिया की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मामले में व्यापक साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने दलील दी कि एसआइटी जांच की अगुवाई करने वाले अधिकारी आर.के. राघवन को बाद में हाई कमिश्नर बनाया गया। इसी तरह अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर पी.सी. पांडेय को बाद में गुजरात का डीजीपी बनाया गया। छानबीन में एसआइटी ने अहम साक्ष्य को नजरअंदाज किया।
मंजूर की जानी चाहिए एसआइटी की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआइटी ने जांच के दौरान जुटाई सामग्रियों पर विचार कर राय बनाई थी। आगे की जांच का सवाल उच्चतम स्तर पर साजिश के आरोप के संबंध में नई सूचना की उपलब्धता पर उठता, जो नहीं है। इसलिए एसआइटी की रिपोर्ट मंजूर की जानी चाहिए।
चश्मदीद गवाह होने का झूठा दावा किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाह संजीव भट्ट, हरेन पंड्या, आर.बी. श्रीकुमार के दावे निराधार हैं, जिन्होंने तत्कालीन सीएम की बैठक का जिक्र किया था। लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई बैठक की इनके पास कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने चश्मदीद गवाह होने का झूठा दावा किया था। ऐसे झूठे दावों पर ही बड़ी साजिश का ढांचा खड़ा किया गया, लेकिन यह ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा हमलावर

साल 2002 में हुए गुजरात दंगों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित (Central Home Minister Amit Shah) शाह ने समाचार एजेंसी एएनआई (Told ANI in an Interview) को विस्तृत इंटरव्यू दिया और इस दौरान तमाम पहलुओं पर खुलकर बात की। इतनी लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान गुजरात के तत्कालीन सीएम और अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Then CM and now Prime Minister Narendra Modi) के बिना एक शब्द बोले सब आरोप सहन करने पर भी गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मैंने मोदी जी को नजदीक से इस दर्द को झेलते हुए देखा है। 18-19 साल की लड़ाई के दौरान वह सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह गले में उतारकर (By taking it in the throat like the poison of Lord Shankar), सहन करके लड़ते रहे, फिर भी एक शब्द नहीं बोले। ये सब कोई बहुत मजबूत मन का आदमी ही कर सकता है।’
एक शब्द बोले बिना सब सहते रहे पीएम मोदी

एएनआई के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंटरव्यू के दौरान कहा, “18-19 साल की लड़ाई, देश का इतना बड़ा नेता एक शब्द बोले बगैर सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह गले में उतारकर सहन करके लड़ता रहा। आज जब अंत में सत्य सोने की तरह बाहर आया है, चमकता हुआ बाहर आया है तो आनंद ही होगा।”
बहुत मजबूत मन का आदमी ही गुजर सकता है इस सबसे, जिससे मोदी गुजरे

बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों के मामले में जकिया जाफरी की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गत 24 जून को खारिज कर दिया। इसमें उन्होंने तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को एसआईटी की ओर से दी गई क्लीन चिट को चुनौती दी थी। एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने फैसला देते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि जकिया जाफरी की अपील में दम नहीं है और खारिज करने लायक है।
गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई से इंटरव्यू में आगे कहा, “मैंने मोदी जी को नजदीक से इस दर्द को झेलते हुए देखा है। आरोपों को झेलते हुए देखा है। और सबकुछ सत्य होने के बावजूद भी, क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया चालू है, हम कुछ नहीं बोलेंगे, इस स्टैंड को बहुत मजबूत मन का आदमी ही ले सकता है।”

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