scriptThe Lancet Global Health Report: शारीरिक तौर पर फिट नहीं हैं महिलाएं, नियंत्रण नहीं हुआ तो 2030 तक 60 फीसदी होंगी बीमार | The Lancet Global Health Report: Women are not physically fit, if this is not controlled then 60% of them will be ill by 2030 | Patrika News
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The Lancet Global Health Report: शारीरिक तौर पर फिट नहीं हैं महिलाएं, नियंत्रण नहीं हुआ तो 2030 तक 60 फीसदी होंगी बीमार

The Lancet Report के मुताबिक चिंताजनक यह है कि भारतीय वयस्कों में अपर्याप्त शारीरिक गतिविधियों का प्रतिशत 2000 के 22.3 से बढक़र 2022 में 49.4 हो गया। इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो 2030 तक 60 फीसदी आबादी अस्वस्थ होगी। पर्याप्त शारीरिक गतिविधियां नहीं होने से बीमारियों का खतरा बना रहेगा।

नई दिल्लीJun 27, 2024 / 06:28 am

Anand Mani Tripathi

The Lancet Report: भारत की आधी वयस्क आबादी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के शारीरिक गतिविधि संबंधी दिशा-निर्देशों को पूरा नहीं करती। यानी शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट नहीं है। पुरुषों (42 फीसदी) के मुकाबले महिलाएं (57 फीसदी) शारीरिक गतिविधियों के मामले में ज्यादा निष्क्रिय हैं। लैंसेट ग्लोबल हेल्थ की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक चिंताजनक यह है कि भारतीय वयस्कों में अपर्याप्त शारीरिक गतिविधियों का प्रतिशत 2000 के 22.3 से बढक़र 2022 में 49.4 हो गया। इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो 2030 तक 60 फीसदी आबादी अस्वस्थ होगी। पर्याप्त शारीरिक गतिविधियां नहीं होने से बीमारियों का खतरा बना रहेगा।

150 से 300 मिनट एरोबिक है जरूरी

डब्ल्यूएचओ वयस्कों के लिए हर हफ्ते कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम एरोबिक गतिविधियां जरूरी मानता है। रिपोर्ट के मुताबिक शारीरिक निष्क्रियता वयस्कों में हृदय संबंधी बीमारियों, टाइप 2 मधुमेह, मनोभ्रंश और स्तन कैंसर के खतरे बढ़ाती है। दुनियाभर में करीब एक तिहाई (31 फीसदी) वयस्क 2022 में शारीरिक गतिविधियों के अनुशंसित स्तरों को पूरा नहीं कर पाए। अपर्याप्त शारीरिक गतिविधियों के मामले में 195 देशों में भारत 12वें स्थान पर है।

बैठे-बैठे काम करने की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी

डब्ल्यूएचओ में स्वास्थ्य संवर्धन निदेशक डॉ. रुडिगर क्रेच का कहना है कि ताजा आंकड़े वयस्कों में शारीरिक निष्क्रियता की चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं। यह निष्क्रियता कई कारणों से बढ़ रही है। इनमें कामकाज के पैटर्न में बदलाव (ज्यादातर काम बैठे-बैठे करना), पर्यावरण परिवर्तन, वाहनों पर बढ़ती निर्भरता और अवकाश की गतिविधियों में बदलाव (स्क्रीन पर व्यस्तता) शामिल हैं।

…इसलिए महिलाओं का खुद पर ध्यान नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में महिलाओं में अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि चिंता का विषय है। हालांकि पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में महिलाएं ज्यादा सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में निष्क्रियता के लिए घर के कामों में उनकी ज्यादा भागीदारी जिम्मेदार है। इससे उन्हें खुद पर ध्यान देने का कम समय मिलता है।

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