सिर्फ 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस,जानें वजह

सिर्फ 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस,जानें वजह

guest user | Updated: 20 Jun 2017, 01:33:00 PM (IST) राष्ट्रीय

प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का ऐतिहासिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अपील पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व योग दिवस के रूप में मनाने के लिए लिया गया। 21 जून ग्रीष्मकालीन संक्रांति का दिन है। 21 जून को पूरे कैलेंडर वर्ष में सबसे लम्बा दिन होता है।

जैसा कि 21 जून को योगा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ ही अंतरराष्ट्रीय हो जाता है। लेकिन सिर्फ इसी दिन क्यों, 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस क्यों मनाया जाता है। तो आपको बता दें कि इस विशेष दिन को इसी तारीख पर मनाए जाने का वास्तव में देशी और पौराणिक संबंध है।  21 जून की सुबह दुनिया भर में लोग सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करके अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को गले लगाते हुए नजर आते है। भारत में कई राजनेताओं को अपने शहरों में योग कार्यक्रमों को करते हुए देखा जाता है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भारत की राजधानी दिल्ली में राजपथ रोड पर योग दिवस के मौके पर एक बड़ी सभा का नेतृत्व करते है। 


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पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी जिसमें उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करने का आह्वान किया था। प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का ऐतिहासिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अपील पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व योग दिवस के रूप में मनाने के लिए लिया गया। जिसके बाद 21 जून को " अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" घोषित किया गया। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को " अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय दिवस योग' घोषित करने वाले भारत के नेतृत्व वाले संकल्प को अपनाया। इस प्रस्ताव को  193 राष्ट्रों में से 175 सदस्यों को सह- प्रायोजक ने अपनी स्वीकृति दी,  जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव के लिए सबसे ज्यादा नंबर है।



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जैसा की हम जानते है, योग और योगाभ्यास भारतीय जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है। हम इसे अपने दिनचर्या में हजारों सालों से अपनाते आ रहे हैं। आज इसका प्रसार प्रचार संसार के कई देशों में हो चूका है। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद आशा की जा रही है, कि इसका प्रचार प्रसार और तेजी से होगा। लेकिन  6,000 साल पुराने अभ्यास को मनाने के लिए  21 जून के इस दिन को ही क्यों चुना गया? वैज्ञानिक तौर पर,  21 जून ग्रीष्मकालीन संक्रांति का दिन है, जब उत्तरी गोलार्ध में एक ग्रह के धुरी के झुकाव सबसे अधिक सितारा की ओर झुकता है, हमारे मामले में, पृथ्वी और सूर्य। 



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इसके अलावा जैसा कि हम जानते है, 21 जून को पूरे कैलेंडर वर्ष में सबसे लम्बा दिन होता है। जिसमें सूरज की जल्दी उदय होता है और देरी से ढ़लता है और उत्तर गोलार्ध के लिए देर से सेट होता है। इस दिन सूर्य का तेज सबसे प्रभावी रहता है, और प्रकृति की सकारात्मक उर्या सक्रिय रहती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सन 2011 को बेंगलुरू में दुनिया के योग गुरुओं ने मिलकर 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मानाने पर सर्वसम्मति दिखाई थी। कनाडा से ईरान के कई देशों के लिए यह दिन त्योहार की तरह होता है। 



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लेकिन विज्ञान एक तरफ, भारतीय पौराणिक कथाओं में गर्मियों के एकांत के भी एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि यह एक ऐसा दिन है जिस दिन योगिक विज्ञान की शुरुआत माना जा सकता है। शिव, को योगिक संस्कृति में 'आदियोगी' के प्रथम योगी के रूप में देखा जाता है। जब लोगों ने आदियोगी को देखा, तो उनसे ज्ञान की आशा लेकर आ गए। लेकिन वह शिव को अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए।  हालांकि 7 लोगों ने शिव से सिखाने के लिए आग्रह किया लेकिन शिव ने यह कहते हुए इंकार कर दियाकि बहुत सारी तैयारियां करनी होती है। लेकिन 7 लोगों ने दृढ़ निश्चय कर के 84 साल की साधना की, जिसके बाद  जिसके बाद शिव ने उन्हें नोटिस किया क्योंकि सूर्य उत्तर से दक्षिणी भाग में जा रहा था जो ग्रीष्मकालीन संक्रांति का दिन था। ऐसा कहा जाता है कि वे अब उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते क्योंकि वे ज्ञान से भरे थे। जब 28 दिन बाद अगले पूर्णिमा उठे, तो आदियोगी ने खुद को आदी गुरु में परिवर्तित कर दिया और अपने शिष्यों को योग विज्ञान के तरीके को पढ़ाना शुरू कर दिया।    



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इसके अलावा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराने का निर्णय 'पतंजलि योगपीठ' में ही हुआ था। प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ में रखे गए प्रस्ताव के कुछ दिनों बाद भारत सरकार से पूछा गया था कि किस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जा सकता है। स्वामी रामदेव ने 21 जून का दिन सुझाया था। इसका कारण यह था कि यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है। बाबा के सुझाए दिन को प्रधानमंत्री और भारत सरकार ने स्वीकृत करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजा। अब यही दिन योग का अंतरराष्ट्रीय दिवस बन गया है।

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