scriptWhy is MiG-21 flying coffin? crashed more than 400 times in 60 years | 'उड़ता ताबूत' बना मिग-21, बीते 60 साल 400 से भी ज्यादा बार हो चुका है क्रैश | Patrika News

'उड़ता ताबूत' बना मिग-21, बीते 60 साल 400 से भी ज्यादा बार हो चुका है क्रैश

एक बार फिर इस लड़ाकू विमान पर सवाल उठने लगे हैं, की लगभग 60 साल पुराने इस विमान को अब भी क्यों उड़ाया जाता है? दरअसल जब से यह विमान वायुसेना में शामिल हुआ है तब से अब तक तकरीबन 400 से ज्यादा बार क्रैश हो चुका है, जिसमें अब तक 200 पायलट समेत 256 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है MIG-21 की कहानी

नई दिल्ली

Updated: December 25, 2021 03:52:54 pm

डेल्टा विंग डिजाइन और एक इंजन वाला छोटा लड़ाकू विमान MIG 21, 60 के दशक में जब आसमान में आया था तो इसने खलबली मचा दी थी। रूस द्वारा बनाए गए इस सूपर सोनिक (आवाज की गति से अधिक रफ्तार से उड़ने वाला) विमान का जवाब यूरोप और अमेरिका के पास नहीं था। लंबे समय तक आसमान पर इसका राज रहा। हालांकि वक्त गुजरने के साथ ही इस विमान के सुनहरे दिन खत्म हो गए। अधिक हादसे और पायलटों की मौत की वजह से इसे उड़ने वाला ताबूत (Flying Coffin) और 'Widow Maker' तक कहा जाने लगा।
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MIG-21 Aircraft
शुक्रवार को भारतीय वायु सेना का एक मिग 21 बाइसन (MiG 21 Bison) विमान क्रैश हो गया। राजस्थान के जैसलमेर के पास हुए हादसे में पायलट विंग कमांडर हर्षित सिन्हा शहीद हो गए। साल 2021 में मिग- 21 विमान का यह 5वां हादसा है। वायुसेना ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि मिग- 21 विमान की गिनती दुनिया में सबसे अधिक बनाए गए विमानों में होती है। 10 हजार से अधिक मिग- 21 विमान बनाए गए थे। इन्हें 50 देशों की सेनाओं ने इस्तेमाल किया। हालांकि अब भारत समेत कम ही देश बचे हैं, जो इस पुराने पड़ चुके विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वायु सेना के पास हैं MIG-21 के चार स्क्वाड्रन्स:
भारतीय वायु सेना MIG-21 के अपडेटेड वर्जन MiG-21 Bison का इस्तेमाल कर रही है। इसके चार स्क्वाड्रन्स काम कर रहे हैं। एक स्क्वाड्रन में 16-18 विमान हैं। 90 के दशक में ही इस विमान के बदले दूसरे हल्के वजन वाले विमान को सेना में शामिल करने का प्लान तैयार किया गया था, लेकिन लड़ाकू विमान नहीं मिलने के चलते वायु सेना को इसका इस्तेमाल जारी रखना पड़ा। वर्तमान में वायु सेना इसे इंटरसेप्टर के रूप में इस्तेमाल कर रही है। विमानों को पाकिस्तान से लगी सीमा के करीब के एयरबेस पर तैनात किया गया है ताकि ये हमला होने की स्थिति में दुश्मन के विमान को नष्ट कर सकें।
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भारतीय वायु सेना में 874 मिग 21 शामिल किए गए थे। इनमें से 60 फीसदी से अधिक विमान रूस से लाइसेंस लेकर भारत में ही बनाए गए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार 6 दशक में मिग 21 विमानों के 400 से अधिक हादसे हुए। इनमें 200 से अधिक पायलटों की मौत हो गई। मिग 21 विमानों के अधिक हादसे की एक वजह विशेषज्ञ भारतीय सेना में इसके अधिक संख्या में और अधिक समय तक इस्तेमाल भी बताते हैं।

दो साल पहले मिग 21 ने किया था F-16 का शिकार:
मिग 21 विमान भले ही पुराना हो गया हो, लेकिन इसकी ताकत कम नहीं है। 27 फरवरी 2019 को विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्धमान ने इसी विमान से पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था। 2230 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार, हल्का वजन और छोटा आकार इस विमान को लड़ाई में घातक बनाता है। इसे उड़ाने के लिए एक पायलट की जरूरत होती है।

पहले कहा जा रहा था कि हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए हल्के वजन वाले लड़ाकू विमान तेजस से मिग-21 को रिप्लेस किया जाएगा। हालांकि भारत सरकार ने पिछले दिनों यह स्पष्ट कर दिया है कि तेजस मिग-21 का रिप्लेसमेंट नहीं है। चीन और पाकिस्तान से एक साथ जंग की स्थिति में भारतीय वायु सेना को 42 स्क्वार्ड्न की जरूरत है। वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है, जिसके चलते मिग 21 को पुराना पड़ने के बाद भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

मिग-21 पर वायुसेना क्या कहता है:
जिस तरह से मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और उसके साथ भारत के वीर सपूत भी शहीद हो रहे हैं यह चिंता का विषय है। 2014 में भारतीय वायुसेना प्रमुख रहे अरूप राहा ने इस लड़ाकू विमान को लेकर कहा था कि पुराने विमानों को हटाने में भारत जितनी देरी करेगा भारत के लिए सुरक्षा की दृष्टि से खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा।
भारतीय वायुसेना के कई पायलटों ने मिग-21 विमानों को लेकर शिकायत की है कि इसके कुछ मॉडल बहुत तेजी से लैंडिंग करते हैं और इसके पुराने डिजाइन होने के कारण खिड़कियों की बनावट ऐसी है कि पायलट अंदर से रनवे को ठीक से देख नहीं पाते।

वायु सेना के रिटायर्ड अधिकारी मार्शल सुनील नानोदकर मिग-21 के इस्तेमाल पर कहते हैं कि, हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है अपने आसमान की सुरक्षा के लिए। क्योंकि इतने सालों में हमने वायुसेना में फाइटर जेट्स शामिल करने में देरी कर दी है। उन्होंने आगे कहा कि आज हमने भले ही 36 राफेल अपनी एयरफोर्स में शामिल किए हैं, लेकिन जरूरत के हिसाब से ये आज भी कम हैं।’

अपग्रेड करने के बाद भी क्यों होते हैं हादसे:
जब से यह विमान भरतीय वायुसेना में शामिल हुआ है तब से लकर अब तक मिग-21 को दर्जनों बार अपग्रेड किया जा चुका है, लेकिन इतने अपग्रेड के बावजूद भी इसके इंजन में सुधार नहीं किया जा सका। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक वायुसेना अधिकारी ने बताया कि जेट द्वारा भार उठाए जा सकने की क्षमता को अपग्रेड करना संभव नहीं है, क्योंकि इसका एयर फ्रेम इस तरह से ही डिजाइन किया गया है।

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