ऐसा शहर जहां अधिकारी सांड दिखने पर कहते हैं गाय होगी

पूर्व में दो हादसों में हो चुकी है दो लोगों की मौत

By: harinath dwivedi

Published: 13 Mar 2018, 11:17 PM IST

नीमच. सोमवार को सांड के हमले में एक और बुजुर्ग ने अपने प्राण गवा दिए। पूर्व में दो बार सांड के हमले हो चुके हैं। इसके बाद भी नगरपालिका अधिकारी यह बात स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि शहर में खुलेआम सांड विचरण कर रहे हैं। आश्चर्य इस बात पर है कि वे सांड को गाय बताने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
बघाना में सांड ने किया बुजुर्ग पर हमला
सोमवार को बघाना स्थित गणेश स्कूल के सामने सड़क पर सुबह ९.३० बजे सफाई कर रहे एक बुजुर्ग को सांड ने अपना शिकार बना लिया। सड़क पर जिस समय सीताराम पिता छीतरमल (६५) निवासी धनेरियाकलां रोड बघाना पर सफाई कर रहे थे तभी पीछे से सांड ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में सीताराम गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत जिला चिकित्सालय ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत का कारण गंभीर अंदरूनी चोट बताया गया था। अन्त्य परीक्षण कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। नगरपालिका के स्वास्थ्य अधिकारी विश्वासचंद्र शर्मा ने बताया कि सीताराम रेलवे से सेवानिवृत्त सफाईकर्मी थे। हादसे में नगरपालिका की किसी प्रकार की लापरवाही नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमला सांड ने ही किया था।
पूर्व में दो लोगों की हो चुकी है मौत
जिला मुख्यालय पर ही पिछले २ सालों में सांड के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस बारे में नगरपालिका प्रशासन को भी जानकारी है। बावजूद इसके शहर में स्वच्छंद विचरण कर रहे मवेशियों को पकडऩे में नपा प्रशासन गंभीरता नहीं बरत रहा है। सांड के हमले का पहला मामला बघाना स्थित रेलवे फाटक पर सामने आया था। एक बुजुर्ग साइकिल सवार पर सांड ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। दूसरा मामला स्कीम नंबर ९ खेत नंबर २७ चमड़ा कारखाने के पास बनी रपट पर हुआ था। यहां अग्रवाल समाज के ७० वर्षीय बुजुर्ग जो अपने घर के बाहर बैठे उन्हें सांड ने अपना शिकार बनाया था। इस हमले में उनकी भी मौत हो गई थी। इस हमले के बाद से क्षेत्र के रहवासी सांड से इतने डरे हुए हैं कि जब भी सामने से सांड आता दिखाई देता है या तो वे अपना रास्ता बदल लेते हैं या पहले सांड को जाने देते हैं।
४८ हजार रुपए महीना खर्च फिर भी बदतर हालात
मवेशियों को पकडऩे के लिए नगरपालिका प्रशासन ने ६ अस्थाई कर्मचारियों को तैनात कर रखा है। प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिमाह ८ हजार रुपए वेतन दिया जाता है। चौकाने वाली बात यह है कि इन कर्मचारियों पर प्रतिमाह नगरपालिका ४८ हजार रुपए खर्च करता है। इसके साथ ही सभी संसाधन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। बावजूद इसके शहर में खुलेआम मवेशी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इतना ही नहीं मुख्य मार्गों पर बैठकर यातायात भी बाधित करते हैं। नगरपालिका प्रशासन ने अक्टूबर २०१७ में जिला मुख्यालय को आवारापशु मुक्त शहर घोषित कर दिया था। इसके बाद भी शहर में चहुओर मवेशियों के झुंड के झुंड दिखाई दे रहे हैं।
शहर में नहीं हैं सांड
शहर में कहीं भी सांड नहीं है। हमने सभी को पकड़कर शहर के बाहर कर दिया है। तीन-चार दिन का अवकाश होने की वजह से मवेशियों को नहीं पकड़ा जा सका था। जल्द अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य में नपा के ६ कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पकड़े जाने के बाद मवेशियों को गोशाला भेज दिया जाता है। वहां से मालिक जुर्माना भरकर मवेशियों को छुड़ा लाते हैं। इस कारण हालात जस के तस बन जाते हैं।
- विश्वासचंद्र शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नपा

harinath dwivedi Editorial Incharge
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