व्यवस्थाओं को ऐसे सुधारना चाहते हैं चेंजमेकर और प्रमुख दलों के दावेदार

- जावद में चेंजमेकर और दावेदारों ने गिनाई प्राथमिकताएं
- सूरत बदलनी चाहिए

By: harinath dwivedi

Published: 12 Oct 2018, 11:50 PM IST

नीमच. जिले की जावद विधानसभा में प्रमुख चेंजमेकर से लगाकर कांग्रेस, भाजपा के दावेदार तस्वीर को और बेहतर बनाने के ख्वाहिशमंद हैं। सुधार की लगातार जरूरत बताई जा रही है। सभी दावे कर रहे हैं कि उन्हें अवसर मिलता है तो बहुतकुछ बदलाव किए जाएंगे।
चेंजमेकर शुभम चतुर्वेदी-
पत्रिका के चेंजमेकर अभियान के जरिए चुनाव में ताल ठोक रहे शुभम चतुर्वेदी युवा हैं, वे शोधार्थी हैं। हाल ही में सांसद को घेरकर एट्रोसिटी एक्ट पर आवाज न उठाने का कारण पूछकर शुभम सुर्खियोंं में आए थे। हालांकि सिंगोली क्षेत्र में युवाओं की टीम को साथ लेकर वे सामाजिक गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहे हैं। शुभम का कहना है कि इस क्षेत्र में रोजगार के साधन होने बहुत जरूरी हैं, युवाओं को अवसरों की तलाश है इस दिशा में वे काम करना चाहते हैं।

ओमप्रकाश सकलेचा- विधायक जावद
पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्रकुमार सकलेचा के पुत्र ओमप्रकाश सकलेचा, लगातार तीसरी बार विधायक हैं। इस बार भी वे भाजपा से खुद का ही दावा पुख्ता मानते हैं। उनकी प्राथमिकताओं में क्षेत्र का सर्वांगीण विकास है। लेकिन वे औद्योगिक विकास और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को ज्यादा जरूरी मानते हैं। हालांकि बीते कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को वे अपनी उपलब्धि मानते हैं।
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पूरण अहीर, दावेदार भाजपा-
भाजपा की ओर से पूरण अहीर भी उम्मीदवारी के मैदान में हैं। उनकी पत्नी सुगना अहीर वर्तमान में जनपद अध्यक्ष हैं। १५ वर्षों से खुद की राजनीति में सक्रियता की बदौलत वे इस बार टिकिट के लिए दांव आजमा रहे हैं। अहीर का कहना है कि जावद क्षेत्र में विकास की प्रचुर संभावनाएं मौजूद हैं। इस क्षेत्र के संसाधनों का बेहतर उपयोग विकास और रोजगार के लिए किया जाना चाहिए।
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श्याम काबरा, दावेदार भाजपा-
श्याम काबरा जावद नगर परिषद के अध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में जिला महामंत्री भाजपा में हैं। हालांकि वे रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देना चाहते हैं। क्षेत्र में विकास और रोजगार के साधनों को बेहतर करने की जरूरत वे मानते हैं।
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नरेंद्र गांधी, दावेदार भाजपा-
नरेंद्र गांधी संघ में सक्रिय हैं। उनके पास विभाग का दायित्व है। इस बार उनका भी नाम दावेदार के रूप में प्रमुखता से लिया जा रहा है। गांधी की अपेक्षा है कि जावद में चिकित्सा, रोजगार की दिशा में काम करने की जरूरत है और औद्योगिक विकास की यहां अपार संभावनाएं हैं।
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समंदर पटेल, दावेदार कांग्रेस-
समंदर पटेल का नाम पिछले दो चुनावों से दावेदार के रूप में लिया जाता रहा है। वे धाकड़ समुदाय से आते हैं और जावद क्षेत्र में धाकड़ वोटों का खासा वर्चस्व है। सिंधिया खेमे से जुड़े समंदर लंबे समय से यहां सक्रिय हैं। वे मानते हैं कि विकास करना ही उद्देश्य नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों की मूलभूत जरूरत स्वास्थ्य, रोजगार की समस्या दूर करना बेहद आवश्यक है। घटते जलस्तर के लिए व्यापक मुहिम की जरूरत है।
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सत्यनारायण पाटीदार, दावेदार कांग्रेस-
सत्यनारायण पाटीदार जावद जनपद अध्यक्ष रहे हैं। इस बार उनका नाम इसलिए प्रमुख दावेदार के रूप में उभरा है कि किसान आंदोलन के बाद पाटीदार समुदाय के सम्मेलन में हार्दिक पटेल के साथ वे खड़े दिखाई दिए। कांग्रेस में वे लगातार सक्रिय हैं। किसान आंदोलन के मद्देनजर कांग्रेस संसदीय क्षेत्र में पाटीदार समाज के व्यक्ति को अवसर देकर पाटीदारों को साधना चाहती है। सत्यनारायण का कहना है कि क्षेत्र में विकास के नाम पर दलाली प्रथा हावी हुई है। इसे रोककर आम लोगों की अपेक्षाएं पूरी करना प्राथमिकता है। उच्च शिक्षा संस्थान की जरूरत क्षेत्र में है।
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राजकुमार अहीर, दावेदार कांग्रेस-
राजकुमार अहीर बीते पंद्रह वर्षों से जावद में कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं। एक बार वे कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड़े और अच्छा मुकाबला किया। जबकि पिछले चुनाव में वे बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में डटे थे। इस बार फिर से वे कमलनाथ के सानिध्य में टिकिट पाने की जुगत में हैं। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार इस क्षेत्र में फैलता जा रहा है। युवाओं को रोजगार नहीं है। पलायन हो रहा है। मूलभूत सुविधाओं से गांव परे हैं। इन मुद्दों पर काम करके वे दिखाएंगे।
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शिवनारायण पाटीदार, दावेदार कांग्रेस-
शिवनारायण पाटीदार वर्तमान में सरपंच हैं। वे लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय हैं। ग्रामीण नेता के रूप में उनकी पहचान है। पाटीदारों को साधने की कांग्रेस की रणनीति में वे अपना भी दावा मजबूत मानते हैं। उनका कहना है कि अवसर मिलता है तो वे स्वच्छ राजनीति करना चाहेंगे। युवाओं को रोजगार मिले, उद्योग खुले, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ सिंचाई की सुविधाएं बेहतर हो इस दिशा में काम करना चाहेंगे।
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harinath dwivedi Editorial Incharge
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