यह कैसा पैसा है, जो व्यापारियों के साथ बैंक वालों ने भी लेने से खड़े किए हाथ

यह कैसा पैसा है, जो व्यापारियों के साथ बैंक वालों ने भी लेने से खड़े किए हाथ

By: Subodh Tripathi

Published: 05 Sep 2019, 01:01 PM IST

नीमच/सिंगोली. नगर में पिछ्ले कुछ दिनों से अचानक बड़ी चिल्लर की आवक से नगर के छोटे बड़े व्यापारियों ने बैंक में चिल्लर नहीं लेने का हवाला देकर विशेष कर एक व दो रुपए के सिक्के लेने से पल्ला झाड़ रहे हैं। व्यापारियों के चिल्लर न लेने से आम आदमी को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारी चिल्लर दे तो रहे हैं लेकिन लेने से इंकार
नगर में व्यापारी सामान खरीदने पर ग्राहक को तो खुल्ले पैसे की जगह चिल्लर थमा रहे हैं। लेकिन वहीं ग्राहक चिल्लर अथवा छुट्टे पैसे लेकर सामान खरीदने जाता है तो व्यापारियों द्वारा चिल्लर लेने से मना कर दिया जाता है। जिसके कारण आए दिन बाजार में दुकानों पर ग्राहकों व व्यापारियों में नोंक-झोंक होते देखी जा रही है। आए दिन चिल्लर को लेकर होने वाले विवाद कोई बड़ा रुप न ले ले इस ओर व्यापारियों तथा बैंकों को उचित उपाय निकालकर आम जन को राहत प्रदान करना चाहिए।
चिल्लर नहीं लेने के संबंध में व्यापारियों का कहना है कि जब बैंक द्वारा ही चिल्लर नहीं ली जा रही है तो हम लेकर क्या करेंगे। हमें भी आगे व्यापारियों को भुगतान करना होता हैं वह भी चिल्लर नहीं लेते हैं। इतनी चिल्लर को जमा करके हम इसको क्या करेंगे। नगर के छोटे बड़े व्यापारियों एवं बैंकों द्वारा चिल्लर नहीं लेने के कारण आम जनता को छोटी-छोटी जरुरत की चीजों को खरीदने के लिए भी खुल्ले पैसे होने के बावजूद समान नहीं मिल रहा हैं। परेशान उपभोक्ता ऐसे में व्यापारी से आमने-सामने हो जाते हैं और विवाद की स्थिति तक बन जाती है।


राजस्थान से आती है कमीशन पर चिल्लर
जानकारी के अनुसार कुछ व्यापारी चिल्लर में जमकर मुनाफा खोरी करते हैं। कमीशन के लिए व्यापारी राजस्थान से 10 से 20 रुपए प्रति सैंकड़ा की दर से चिल्लर लाकर नगर के बाजार में खपाते हैं। नगर में चिल्लर की भरमार होने का एक सबसे बड़ा कारण चिल्लर में कमीशनबाजी ओर मुनाफाखोरी भी रहा है।


पिछ्ले एक वर्ष में बैंक में चिल्लर का भंडारण अधिक होने व चिल्लर भंडारण में जगह के अभाव में फिलहाल बैंक में चिल्लर नहीं ली जा रही है। सितम्बर माह के बाद प्रयास करेंगे चिल्लर को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानी न हो। आम उपभोक्ताओं से भी अधिक से अधिक चिल्लर लेने का प्रयास करेंगे।
-हरीश लुधानी, शाखा प्रबंधक, एसबीआई सिंगोली

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