आरोपी बचे नहीं इसके लिए ये करें

एफआईआर में हो घटना का पूरा उल्लेख
पुलिस कंट्रोल रूप में दिया जा रहा पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण

By: harinath dwivedi

Published: 20 Jan 2018, 10:05 PM IST

नीमच. अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की कोई भी पीडि़त महिला थाने या पुलिस अधिकारी के पास अपनी व्यथा लेकर पहुंची तो उसे गंभीरता से लिया जाए। जातिसूचक शब्दों या अन्य तरीके से प्रताडऩा का पूरा जिक्र एफआईआर में लिखा जाए इसका विशेष रखें। इससे पीडि़त पक्ष को न्यायालय में काफी सहायता मिलती है।
यह कहना था अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिवक्ता कृष्णपालसिंह झाला का। वे शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम पर पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे थे। झाला ने बताया कि कैसे एक पीडि़त महिला अपने साथ हुई घटना को पूरी तरह से समझा नहीं पाती। ऐसे में पुलिस अधिकारियों और जवानों की भूमिका महत्वपूर्ण बन जाती है कि वे पीडि़त महिला की मदद कर उसका संबल बढ़ाएं। पुलिस अधिकारी और जवान यदि पीडि़त महिलाओं की मदद करेंगे जो नि:संदेह महिला उत्पीडऩ के मामलों में भी कमी आएगी। इस अवसर पर एनजीओ संचालक भगवान बोरीवाल ने भी प्रशिक्षणार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। पुलिस कंट्रोल रूम पर महिला सेल प्रभारी निरीक्षक अनुराधा गिरवाल के नेतृत्व में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान आरक्षक नीरज राजवेद्य भी उपस्थित थे।
७ सप्ताह से चल रहा है प्रशिक्षण
महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता विषय पर आयोजित प्रशिक्षण में जिले के प्रधानआरक्षक से लेकर निरीक्षक तक को पुलिस मुख्यालय भोपाल से प्राप्त निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाना है। २ दिसंबर से चल रहे प्रशिक्षण में प्रत्येक शनिवार और रविवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। पिछले ७ सप्ताह से पुलिस अधिकारियों और जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से पीडि़त महिलाओं की कैसे मदद की जा सकती है। नाबालिगों पर होने वाले अपराधों पर लगने वाले पास्को एक्ट के बारे में भी इस दौरान विस्तार से जानकारी दी गई। यह भी बताया कि हमेशा इस बात का ध्यान रखा जाए कि नाबालिग या पीडि़त महिला की पहचान उजागर न हो। बढ़ते महिला उत्पीडऩ के मामलों पर रोक लगाने में इस तरह के प्रशिक्षण काफी मददगार साबित हो रहे हैं।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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