काफी प्रचार के बाद भी नसबंदी में पुरूष की बेरूखी

- सालभर में सिर्फ 31 पुरूष ने कराई नसबंदी

नीमच। जनसंख्या स्थिरता के मामले में नीमच जिला अपने लक्ष्य से काफी पिछड़ा हुआ दिख रहा है। यहीं कारण है कि इसे मिशन परिवार विकास के तहत चुनिंदा जिलों में शामिल किया गया है। जनसंख्या में स्थिरता लाने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नसबंदी के शिविर भी आयोजित किए जा रहें हैं, लेकिन इन शिविरों में महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों की रूचि न के बराबर है।

वर्ष 2019-20 के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिला नीमच में परिवार कल्याण के मामले में पिछड़ा माना रहा है। मिशन परिवार विकास के तहत नीमच की सकल प्रजनन दर को 3.1 माना गया है। जबकि इसे कम करके 2.1 पर लाना है। जिसके चलते शासन विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को जागृत करने का प्रयास कर रहा है। जिसका असर महिलाओं पर तो हो रहा है, लेकिन पुरूष इससे बच रहें हैं।

वर्ष 2045 के पूर्व लाना है स्थिरता
जिले में सकल प्रजनन दर को 2.1 पर लाने का प्रयास करने में जुटे है। वर्तमान में जिले में प्रति एक हजार जनसंख्या पर 26 बच्चों का होना माना जा रहा है। वर्ष 2.45 तक शासन जनसंख्या में स्थिरता लाना चाह रहा है, जिसके तहत वह आमजन को नसबंदी के लिए जागृत करने में जुटा है।

फैक्ट फाइल
- जिले में नसबंदी का लक्ष्य 5692
- अब तक ऑपरेशन हुए 2405
- एलटीटी ऑपरेशन हुए 1436
- सीटीटी ऑपरेशन हुए 754
- एनएसवीटी ऑपरेशन हुए 30

मात्र 30 पुरूषों ने कराई नसबंदी
नसबंदी कराए जाने के मामले में पुरूष, महिलाओं से काफी पीछे है। विभाग को महिला व पुरूषों के लिए मिले लक्ष्य में पुरूषों के लिए मिले लक्ष्य में पुरूषों की सहभागिता महज नाम की है। आंकड़ो पर नजर डाले तो महज 30 पुरूषों ने नसबंदी कराई है। जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 2374 तक पहुंच गया है।

क्षतिपूर्ति भी दे रहे है ज्यादा
नसबंदी के ऑपरेशन के दौरान महिला व पुरूषों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति की राशि अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक दी जा रही है। हालांकि मिशन परिवार विकास के जिन २५ जिलों में शामिल किया गया है। उनमें नीमच की स्थिति अच्छी नहीं है।

इनका यह कहना है
महिलओं के मुकाबले में पुरूष नसबंदी कराने में काफी पीछे है, जबकि उनकी नसबंदी आसानी से होती है। जिले में सकल प्रजनन दर 3.1 है, जो कि पूर्व के सर्वे पर आधारित है। जल्द ही नए सिरे से सर्वे होना है, जिसमें रतलाम में यह दर २.१ पर आएगी। बीते चार वर्ष में टीम ने बहुत काम किया है। जिसके चलते उम्मीद है कि यह आंकड़ा कम होगा।
- एसएस बघेल, सीएमएचओ नीमच।

Virendra Rathod Reporting
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