कोरोना काल में फ सल खराब, मुआवजे की आस में किसान

कोरोना काल में फ सल खराब, मुआवजे की आस में किसान

By: Virendra Rathod

Updated: 02 Sep 2020, 11:45 AM IST

जीरन। तहसील क्षेत्र में किसान के फ सलों की हालत बड़ी खस्ता दिखाई दे रही है यही जीरन तहसील केंद्र से 8 किलोमीटर दूर चिताखेड़ा में बारिश की खेच के बाद इल्लियो व अलग-अलग रोग के प्रकोप से खेतो में ही खराब हो रही किसानो की बेशकिमती सोयाबीन फसल। पीला मोजेक रोग लगने और बारिश के कारण फ लियों में सडऩ तथा रिंग कट्र व फ ली एवं पत्ता चट करने वाली इल्लियो का हमला होने के कारण सोयाबीन की फ सलो में 45 प्रतिशत नुकसान हो गया है। लगातार बरसात के कारण सोयाबीन के पौधो पर फलियों में फफूंद आकर सडऩ पैदा हो गई है।

बारिश की खेच के बाद चीताखेड़ा क्षेत्र में सोयाबीन की फसल पर इल्लियो व अलग-अलग प्रकार के रोगो ने अटैक कर दिया। फ सल पर आए रोग से फसल खराब हो रही और सोयाबीन अचानक से पीली पड़ गई। हरे-भरे खेत अब पीले दिखाई देने लगे है। ऐसे में इस बार सोयाबीन पर संकट के बादल मंडराने लगे है। किसान का बेटा बने मुख्यमंत्री इस समय अपने बाप की परेशानियों को भुलकर सरकार गिराने और बनाने में व्यस्थ है कौन सुने बाप की पीड़ा को। पिछले वर्ष भी सोयाबीन की फ सल अतिवर्षा से नष्ट हो गई थी जिसकी बीमा राशि आज तक हजारो किसानो को नही मिली और न ही मुआवजा। पीला मोजेक रोग और कीटो ने किसानो के निवाले सोयाबीन को बनाया निवाला। चीताखेड़ा, हरनावदा, घसुण्डी जागीर, अमावली जागीर पंचायत क्षेत्र के हजारो किसानो के खेतो में सोयाबीन का रकबा करीब 90 प्रतिशत है ऐसे में स्वभाविक है कि सोयाबीन की फ सल को बड़े पैमाने पर नुकसान होने का अनुमान है कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिक तथा प्रशासन भले ही औसत अनुमान कम होने का अनुमान लगाए। लेकिन धरातल पर किसान 35 से 45 प्रतिशत नुकसान की बात कर रहे है। खड़ी सोयाबीन के पौधे पर लगी फलियों में सडऩ पैदा हो रही है। पीला मोजेक रोग लगने और बारिश के कारण फलियों में सडऩ तथा रिंग कट्र व फ ली एवं पत्ता चट करने वाली इल्लियो का हमला होने के कारण सोयाबीन की फ सलो में 45 प्रतिशत नुकसान हो गया है। इस बार सफेद मखीए पीला मोजेक और रिंग कटर एवं पत्ता व फ लियो को चट करने वाली इल्लियो के आक्रमण होने से क्षेत्र में इस किस्म का ही अधिक नुकसान देखने में आ रहा है तथा किसानो के कई खेतो में सोयाबीन की फ सलो पर अफ लन होने के कारण किसान दुखी है। ऐसे में शासनए प्रशासन की तरफ से किसानो के हित में मदद हेतु कोई भी आगे नही आए है। सोयाबीन की फ सलो में आई बीमारी एवं इल्लियो को रोकने के लिए मंहगी दवाईयो का छिड़काव तीन से चार बार कर चुके फिर भी फ सलो के हालात वही है। दवाईयो के आर्थिक मार को झेलकर भी फ सलो में कोई सुधार नही आने को देखते हुए दु:खी किसान आर्थिक सहयोग हेतु सरकार की ओर राहत की उम्मीद लगाए हुए है।

पिछले वर्ष भी हुआ था भारी नुकसान न मिला मुआवजा और न मिला बीमा
गत वर्ष भी अतिवर्षा के कारण खरीब की फसले पुरी तरह से बर्बाद हो चुकी थी। जिसका मुआवजा और न ही बीमा आज तक किसानो को नही मिला और रबी की फसलो में भी शीतलहर के कोप का भाजन बन चुकी थी। जिसका भी किसानो को कुछ भी आर्थिक सहायता नहीं मिली। गत वर्ष की मार से उभर भी नही पाए किसान और कोरोना संक्रमण के कारण लोकडाउन और फिर उपर से बीमारियो व प्रकृति का फ सल पर प्रभाव किसान हैरान और परेशान है करे तो क्या करे।

यह इनका कहना है
तीन बार दवाईयो का छिड़काव किया फिर भी इल्लिया फसल को नुकसान पहुंचा रही है। शासन और प्रशासन को चाहिए की किसानो की हर बार की पीड़ा समझते हुए शीघ्र ही फसलो में हुए नुकसान का आंकलन कर मुआवजा एवं बीमा राशि उपलब्ध कराए।
- रामसिंह, किसान हरनावदा ग्राम

सोयाबीन के पौधो पर अफलन है कई पौधो पर एक भी फली नही है रही बची सोयाबीन की फसलो में तरह.तरह की बीमारियों ने जकड़ लिया है। ऐसे में उन्होंने सर्वे करवाकर प्रशासन से मुआवजा राशि दिलाने की मांग की है। किसान छगन माली का कहना है कि लगातार रिमझिम बारिश केे कारण सोयाबीन के पौधे पर फलियों में फ फुंद आने के कारण फलिया सडऩे लगी है। दवा का छिड़काव करने के बाद भी फसल में कोई सुधार नही आ रहा है।
- रामनारायण परमार, किसान चीताखेड़ा ग्राम

पिछले साल खरीब की सीजन के समय क्षेत्र में अतिवर्षा के कारण कई हेक्टर फसल पुरी तरह चैपट हो गई थी। उस समय किसानो को आर्थिक नुकसान हुआ जिसकी भरवाई अब तक नहीं हो पाई वही रबी की सीजन में लोकडाउन के कारण फसल का उत्पादन और अन्य काम प्रभावीत हुए तो फसल में किसानो को भारी नुकसान झेलना पड़ा इस बार खरीब से उम्मीद थी तो अब प्रकृति की मार के बाद फसलो में लगे रोग से सोयाबीन पीली पड़ गई शीघ्र ही नुकसान का सर्वे कर सहायता किसानो को मिलनी चाहिए।
- नरेश पाटीदार, किसान ग्राम पीठ

Virendra Rathod Reporting
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