जानें किस न्यायाधीश को न्याय के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

harinath dwivedi

Publish: Apr, 17 2018 01:11:49 PM (IST)

Neemuch, Madhya Pradesh, India
जानें किस न्यायाधीश को न्याय के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट में एक मई को होगी सुनवाई

नीमच. निलंबित अपर जिला न्यायाधीश द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 28 अक्टूबर 17 को प्रस्तुत अवमानना याचिका प्रारंभिक सुनवाई के लिए स्वीकृत हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में एक मई 18 को सुनवाई होगी।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी एवं निलंबित अपर जिला न्यायाधीश आरके श्रीवास नीमच की अवमानना याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से (कार्यवाही) पूर्व में इंकार कर दिया गया था। इसका आधार यह बताया गया था कि अवमानना याचिका व्यक्तिगत रूप से (अधिवक्ता के) माध्यम से प्रस्तुत नहीं की गई। उच्चतम न्यायालय द्वारा श्रीवास की अनुपस्थिति के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत अवमानना याचिका ग्रहण करने से इंकार कर दिया था। विदित हो कि श्रीवास ने न्यायाधीशों को वार्षिक गोपनीय चरित्रावली की प्रतिलिपि प्रदान/संसूचित किए जाने बाबत अवमानना याचिका स्पीड पोस्ट से दायर की थी। निलंबित न्यायाधीश श्रीवास पूर्व में विशेष कत्र्तव्यस्थ अधिकारी के रूप में उच्च न्यायालय जबलपुर में पदस्थ थे, जिन्हें नीतिगत बातों का समर्थन करने के कारण उच्च न्यायालय के कतिपय अधिकारियों ने नीमच स्थानांतरित कर निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद अपना संघर्ष जारी रखते हुए निलंबन के दौरान याचिका व्यक्तिगत रूप से 28 अक्टूबर २०17 को प्रस्तुत की। करीब 8 माह बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतत: एक मई 2018 को प्रारंभिक सुनवाई के लिए नियत कर ही लिया। निलंबित न्यायाधीश श्रीवास ने बताया कि शायद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक इतिहास में यह पहली घटना (अवमानना याचिका) होगी, जिसको सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा इतनी सूक्ष्मता व गंभीरता से 8 माह की गहन जांच उपरांत काफी जद्दोजहद के बाद सुनवाई के लिए नियत किया गया है। श्रीवास ने बताया कि उक्त अवमानना याचिका वार्षिक गोपनीय चरित्रावली की प्रतिलिपि प्रदान न करने के संबंध में ५ पूर्व व वर्तमान न्यायाधीशों के विरूद्ध अवमानना याचिका क्रमांक 000781/2018 पर 24 फरवरी 2018 को दर्ज कर एक मई 2018 को प्रारंभिक सुनवाई के लिए नियत किया गया। श्रीवास ने उच्चतम न्यायालय में पूर्ण आस्था एवं निष्ठा अभिदर्शित करते हुए व्यक्त किया कि उन्हें पूर्ण उम्मीद है कि देर सवेर उन्हें न्याय जरूर प्राप्त होगा।

 

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