अपने बल पर मनुष्य को अभिमान नहीं करना चाहिए

श्री देवनारायण कथा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब


नीमच/मनासा. श्री देवनारायण कथा के छटे दिवस के प्रसंग में कथा वाचक बापूलाल धनगर ने कहा कि देवनारायण व माता साडू अपने गांंव गोठा के लिए निकले, तो देवास से चलकर उज्जैन में एक देवी के मंदिर पर विश्राम किया।

उज्जैन के राजा जयसिंंग पंवार की लड़की जिसका नाम पिपलदै था। ये वही कन्या थी जो जगदम्बा होकर चोईस बगडावतो के मुंड की माला लेकर भगवान के पास गई थी। तब माता साड़ू ने भगवान से वरदान मांग रखा था कि जिसने मेरे परिवार को नष्ट किया उसी को मेरी बहू बनाकर मेरे पांव लगाना। पिपलदै जन्म से कुष्ठ रोग, अंधी, माथे पे एक सिंंग था जिसके कारण वो बहुत दुखी थी। इसके चलते प्रत्येक रविवार को वो अपनी सहेलियों के साथ देवी के मंदिर दुख दूर करवाने के लिए आती थी। उसी दिन देवनारायण भी मंदिर पर ही रुके थे। यह नजारा देख देवनारायण ने देवी की आग्या से पिपलदै का सारा कष्ट दूर कर दिया। तब पिपलदै ने तन मन सब देवनारायण के अर्पण कर राजा को बताई। राजा यह देखकर बहुत खुश हुए ओर पिपलदै का देवनारायण के साथ धूमधाम से विवाह करवाया। यह बात कथा वाचक बापुलाल धनगर ने गांव देेेवरान में उपस्थित भक्तों से कही आप ने कहा कि किसी भी मनुष्य को अपने बल पर इतना अभिमान नही करना चाहिए। अहंकार में सब गए धन वैभव और वंश। नहीं मानो तो देख लो रावण कोरव और कंस। अंहकार से जगदम्बा का भी यही हाल हुआ। इसका वंश नष्ट किया था उसी घर की बहू बनना पड़ा।

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Mukesh Sharaiya Bureau Incharge
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