शहर में खाने के योग्य बर्फ की एक भी फैक्ट्री नहीं

शहर में खाने के योग्य बर्फ की एक भी फैक्ट्री नहीं

Mahendra Kumar Upadhyay | Publish: Apr, 10 2019 11:35:11 AM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

- फिर रोजाना खप रहा है 100 क्विंटल से अधिक बर्फ
- केंद्र सरकार का आदेश भी नहीं मान रहे है, बर्फ विक्रेता
- जहरीली बर्फ का कारोबार धड़ल्ले से शुरू

नीमच। गन्ने का रस, नीबू-पानी, शिकंजी हो या फिर खाने-पीने दूसरे चीजें, सभी को ठंडा करने के लिए जो बर्फ मिलाई जा रही है, वह आपकी सेहत को बिगाड़ सकती है। इस बर्फ की कोई जांच नहीं होती, जांच इसलिए नहीं होती कि शहर में खाद्य बर्फ बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं है, जबकि अखाद्य बर्फ की छह फैक्ट्री हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शहर में रोजाना खपने वाली सैकड़ों क्विंटल बर्फ कहां से आ रही है।

फू ड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया ने (एफएसएसएआई) खाद्य व अखाद्य बर्फ में फ र्क करने के लिए अखाद्य बर्फ को नीला करने को कहा है। एक महीने पहले जारी इस आदेश का जिले समेत मप्र में कहीं भी पालन नहीं हो रहा है। अब 1 जून से बर्फ निर्माताओं पर सख्ती करने की तैयारी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अखाद्य वर्फ बनाने का लाइसेंस छह फैक्ट्रियों के पास है, पर खाद्य वर्फ कहीं नहीं बनती। उधर, शहर में हर जगह बर्फ के खाने-पीने में उपयोग हो रहा है। दूसरे जिलों से भी भोपाल में बर्फ नहीं आ रही है। इससे साफ है कि शहर में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर बर्फ अखाद्य श्रेणी की ही है।

इसलिए नीली की जा रही अखाद्य बर्फ
बर्फ की किसी तरह की पैकिंग नहीं की जाती। ऐसे में यह पता करना मुश्किल होता है कि कौन सी बर्फ खाने वाली है और कौन सी नहीं। दुकानदार इसका फ ायदा उठाकर अखाद्य बर्फ भी खाने.पीने की चीजों में मिलाकर बेचते हैं। यह समस्या अकेले नीमच या मध्यप्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। लिहाजा एफएसएसआई ने अखाद्य बर्फ का रंग नीला करने के निर्देश महीने भर पहले दिए थे।

इसलिए नुकसानदेह है अखाद्य बर्फ
इस बर्फ का उपयोग किसी चीज को बाहर से ठंडा करने के लिए किया जाता है। लिहाजा इस बर्फ की बड़ी सिल्ली बनाई जाती है। कारखानों में साफ लिखा रहता है यह बर्फ खाने योग्य नहीं है। इसके बाद भी इसके टुकड़े कर खान-पान की चीजों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अखाद्य बर्फ में उपयोग होने वाले पानी के लिए कोई मापदंड नहीं है। साफ.सफाई का ध्यान भी नहीं रखा जाता है।

खाद्य बर्फ में इन मापदंडों का पालन जरूरी
-खाद्य बर्फ बनाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से लाइसेंस लेना होता है।
-बर्फ बनाने के लिए आरओ का पानी इस्तेमाल करना होता है।
- कारखाने में साफ.सफाई को विशेष ध्यान रखना होता है। कर्मचारियों का मेडिकल कराना होता है।
-फ ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत लैब में जांच कराई जा जा सकती है।

सभी छह फैक्ट्रियों को दिया नोटिसए अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अखाद्य बर्फ बनाने वाली सभी छह फैक्ट्रियों को रंग नीला करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी किसी ने इस पर अमल नहीं किया तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। एक मई से इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक अखाद्य बर्फ रंग नहीं बदला जाता तो इसे खाद्य मानते हुए इसके नमूने लिए जाएंगे। यह देखा जाएगा कि किस पानी से बन रही है। कर्मचारियों का मेडिकल है या नहीं। नमूने फेल होने पर 3 से 5 लाख रुपए तक जुर्माना और छह महीने की सजा हो सकती है।

नीमच की स्थिति
- जिले में हर दिन बर्फ की खपत खान-पान में. 1०0 क्विंटल
- अखाद्य बर्फ की फैक्ट्री ०6
- बर्फ को रंगीन करने में खर्च, 15 रुपए रोज प्रति कारखाना
- जुर्माना 3 से 5 लाख रुपए तक जुर्माना और छह महीने की सजा हो सकती है नमूने फेल होने पर

अखाद्य वाले नहीं कर सकते कार्रवाई
न खाने योग्य बर्फ का रंग नीला रखा गया है। अगर कोई सफेद रंग की अखाद्य बर्फ बेच रहा है तो जल्द ही फैक्ट्री में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
राजू सोलंकी, खाद्य एंव सुरक्षा अधिकारी नीमच।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अमानक बर्फ
अमानक बर्फ के सेवन से आंतों में सूजन, छाले, दस्त, पेचिस, टायफ ाइड, पीलिया आदि बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक इस तरह की बर्फ के इस्तेमाल से पेट की गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं
-डॉ. बीएल बोरीवाल सिविल सर्जन जिला अस्पताल नीमच।

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