सरकारी खरीद से पहले अन्नदाता के निकल रहे आंसू

सरकारी खरीद से पहले अन्नदाता के निकल रहे आंसू

Mahendra Kumar Upadhyay | Updated: 03 May 2019, 12:04:10 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

-कोई छोड़कर जाने को मजबूर, तो कोई यूं ही बांटने लगा प्याज
-समर्थन मूल्य पर प्याज बेचने के चक्कर में अन्नदाता ने भी रोक लिए हाथ

नीमच. प्याज ने अन्नदाता को फिर से रूलाना शुरू कर दिया है। क्योंकि दिनों दिन गिरते प्याज के दाम के कारण अन्नदाता त्रस्त हो चुके हैं। हाल यह है कि प्याज की नीलमी के दाम पानी मौल लगने के कारण कोई किसान मंडी में ही प्याज के ढेर छोड़कर जाने को मजबूर है, तो कोई यूं ही लोगों को प्याज बांट रहा है। ताकि वापस घर तक ले जाने के भाड़े से बच जाए।
बतादें की प्याज के दामों में फिर एक बार लगातार गिरावट आती जा रही है। मंडी में प्याज १ रुपए से लेकर ६ से ७ रुपए किलो तक बिक रहे हैं। हालांकि बुधवार को प्याज ९ रुपए तक बिका है। लेकिन गुरूवार को प्याज में काफी गिरावट आंकी गई। प्याज के दाम गिरने के कारण अन्नदाता को इतना भी पैसा नहीं मिल रहा है। जितना पैसा भाड़ा लगाकर वे मंडी तक प्याज लेकर आते हैं। ऐेसे में किसान फिर भाड़ा लगाकर गांव तक प्याज ले जाने की अपेक्षा मंडी में ढेर छोड़कर जा रहे हैं। गुरुवार को प्याज की आवक ८०० से एक हजार कट्टे के बीच रही।
आधा दर्जन किसान छोड़ गए प्याज के ढेर
पत्रिका ने जब गुरुवार को प्याज मंडी में नजर डाली तो हालात आश्चर्य जनक नजर आए। क्योंकि मंडी के अंदर करीब आधा दर्जन ढेर ऐसे पड़े थे। जो बहुत कम दाम पर नीलाम हुए थे और कुछ ढेर ऐसे थे जिन्हें किसी ने खरीदना ही मुनासिब नहीं समझा। कुछ ढेर बुधवार को किसान छोड़कर चले गए थे, तो कुछ ढेर गुरुवार को किसान छोड़ गए। वहीं कुछ किसानों ने बताया कि इन्हें घर तक ले जाने की अपेक्षा यहीं छोड़कर जाना ही समझदारी है, क्योंकि गांव भी ले जाएंगे तो क्या करेंगे। ऊपर से भाड़ा लगेगा जो अलग।
सरकारी खरीद के चक्कर में रोका प्याज

समर्थन मूल्य पर प्याज की खरीदी ८ रुपए प्रति किलो के मान से होगी। इस कारण अधिकतर किसानों ने प्याज रूककर बेचने का मन बना लिया है। ताकि कम से कम ८ रुपए किलो तो प्याज के दाम मिलेंगे। हालांकि किसान प्याज रोक तो रहे हैं। लेकिन उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा, कि कहीं प्याज खराब न हो जाए, अन्यथा जो मिल रहा है उससे भी हाथ धो बैठेंगे। मंडी में इस समय छोटे छर्रे प्याज की आवक अधिक हो रही है। इस कारण छोटे प्याज के दाम कोई व्यापारी लगना पसंद नहीं कर रहा है। जिससे अन्नदाता मंडी में ही ढेर छोड़कर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
मैं १० बोरी प्याज लेकर आया था। लेकिन मंडी में किसी ने बोली ही नहीं लगाई। कहा यह प्याज नहीं चलेगा। इस प्याज को गांव से मंडी तक लाने में करीब १५०० रुपए का खर्च आया है। अब वापस ले जाने में फिर भाड़ा लगेगा, इस कारण मंडी में ही प्याज छोड़कर जा रहा हूं। कुछ प्याज तो लोगों को बांट दिए हैं।
-मन्नालाल बंजारा, किसान, ग्राम ढाणी
किसानों को प्याज के दाम अच्छे नहीं मिल रहे हंै। इसलिए किसानों की रूचि भी प्याज लाने में नहीं रही है। इस कारण प्याज की आवक भी प्रभावित हो रही है। जब किसानों को प्याज लाने में भाड़ा लायक दाम भी नहीं मिलेंगे, तो क्यों किसान प्याज लेकर आएगा। इस कारण अधिकतर किसान अब प्याज समर्थन मूल्य की खरीदी शुरू होने पर ही बेचने के मुड में हैं।
-रंगनाथ पाटीदार, किसान, ग्राम पिपल्या
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