VIDEO - बारिश व पाले के चलते अफीम फसल बिगडऩे के 1462 किसानों ने दिए आवेदन

बारिश व पाले के चलते अफीम फसल बिगडऩे के 1462 किसानों ने दिए आवेदन

By: Virendra Rathod

Updated: 03 Mar 2019, 12:42 PM IST

नीमच। पिछले दिनों बारिश व ओलावृष्टि के चलते पाला गिरने से अफीम फसल की नुकसानी को लेकर नारकोटिक्स विभाग ने पांच मार्च आवेदन देने की अंतिम तिथि दी है। अभी तक माने तो जिले में करीबन सौ किसानों ने फसल नुकसानी के लिए आवेदन किया है। इनकी जांच के बाद विभागीय टीम द्वारा 10 मार्च से फसल उखड़वाने की कार्रवाई की जाएगी। जिले में 28 दिसंबर व 28 जनवरी 2019 को पाला गिरने तथा 13 फरवरी को ओलावृष्टि व बारिश से फसल को नुकसान हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक १२१२ आवेदन तो अकेले मंदसौर और नीमच जिले से करीबन 100 आवेदन तथा 150 आवेदन जावरा व रतलाम के किसानों ने दिए हैं। वही तीन को रविवार और चार मार्च का शिवरात्रि की छुट्टी होने के कारण अभी तक प्राप्त आवेदन ही फाइनल माने जा रहे है।

 

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार ओलावृष्टि, शीतलहर से फसल प्रभावित होने पर औसत पूरी नहीं होने की आशंका में फसल उखड़वाने के लिए नारकोटिक्स विभाग ने करीब 15 दिन पहले से किसानों से आवेदन लेना शुरू किए थे। इसमें उन्हीं किसानों के आवेदन मान्य किए जाएंगे जिन्होंने डोडों में चीरे नहीं लगाए हैं। आवेदन देने के बाद अगर डोडों में चीरा लगा लिया तो ऐसे किसानों को औसत पूरी करके अफीम विभाग को सौपना होगी। जिले के कई क्षेत्रों में किसानों ने खेतों में पूजा-अर्चना कर डोडों में चीरा लगाने के साथ अफ ीम संग्रहण शुरू कर दिया है। जिन किसानों ने आवेदन दिए हैं वे विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। जिले में 13 फ रवरी को ओले गिरने से अफीम के पौधे झुक गए थे और डोडे टूट गए थे।

 

प्रति 10 आरी की खेती में 70 से 80 हजार तक का खर्चा आता
किसान 10 आरी में बोवनी, सिंचाई, दवाए मजदूरी, अफ ीम लेकर विभाग तक पहुंचाने की प्रक्रिया में करीब 70 से 80 हजार रुपए खर्च करता है। खेती मौसम पर ही निर्भर रहती आई है। 10 आरी के खेत में से औसत साढ़े 6 किलो से 7 किलो तक अफीम निकलती है। मौसम पूरी तरह से अनुकूल रहता है तो उत्पादन अच्छा होता है। मौसम से फ सल प्रभावित होती है तो उत्पादन पर भी असर पड़ता है।

 

जिले में अफीम किसान 11 हजार 573
नीमच जिले को नारकोटिक्स ने तीन डिवीजन में बांट रखा है। जिसमें नीमच फस्र्ट डिवीजन में नीमच और जावद का क्षेत्र आता है। जिसमें 178 गांव और ३ हजार ५७२ काश्तकार है। नीमच सैंकड डिवीजन में रामपुरा, सिंगोली और जीरन क्षेत्र आते है। जिसमें 198 गांव में 4 हजार 511 काश्तकार है। नीमच थर्ड डिवीजन में मनासा क्षेत्र आता है। जिसमें 130 गांव और 3 हजार 502 किसान है।

 

अभी तक करीब 10 आवेदन हुए प्राप्त
विभाग ने बारिश व ओलावृष्टि में फसल नुकसानी के चलते किसानों के आवेदन लेने की अंतिम तिथि ५ मार्च रखी है। जिसमें खाासकर भागोर, मनापुरा और सेमलिया के अधिकांश आवेदन प्राप्त हुए है। करीब १०० आवेदन प्राप्त हुए है। जिनकी जांच की जाएगी। जिसके बाद नुकसानी होने पर १० मार्च को फसल उखड़वाने की कार्रवाई की जाएगी।
- आरसी रजवानिया, एएनसी नारकोटिक्स विभाग नीमच।

Virendra Rathod Reporting
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