बगैर बिल और नियम के विरूद्ध बिक रही मेडिकलों पर दवाईयां

बगैर बिल और नियम के विरूद्ध बिक रही मेडिकलों पर दवाईयां

Virendra Singh Rathore | Publish: Jun, 18 2019 01:24:49 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

-हर माह 30 मेडिकलों के निरीक्षण का लक्ष्य, फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई

नीमच.... जिले में हर चार कदम पर खुले मेडिकल स्टोर्स नियम ताक में रखकर मरीजों को दवाईयां पकड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दवाईयों का बिल नहीं देने की तो जैसे इन्होंने कसम खा रखी है। वहीं दूसरी ओर मोटी कमाई करने के उद्देश्य से प्रतिबंधित ओर नशे में उपयोग होने वाली दवाईयां भी बेचने में पीछे नहीं हट रहे हैं। जिसका मुख्य कारण जिम्मेदारों द्वारा लंबे समय से इनकी नकेल कसने के लिए समय समय पर निरीक्षण नहीं करना है



जिले में ३५० से अधिक मेडिकल, कार्रवाई के नाम पर जीरो
जिले में करीब ३५० से अधिक मेडिकल स्टोर्स हैं। इन मेडिकल स्टोर्स को संचालित करने के लिए कई नियमों को ध्यान में रखना पड़ता है। वहीं इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी जांच समय समय पर ड्रग इंस्पेक्टर को करना होती है। ताकि मेडिकल स्टोर्स से मिलने वाली दवाईंयां मरीजों को किसी रूप में गलत नहीं मिले। लेकिन आश्चर्य की बात है कि जिले में मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण हुए लंबे समय बीत चुका है।

यह है मेडिकल स्टोर्स संचालित करने के नियम
-सभी रिटेल मेडिकल स्टोर्स पर एक फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है।
-जो दवाईयों मरीजों को दे रहे हैं वे चिकित्सक द्वारा लिखी होनी चाहिए।
-फार्मासिस्ट के पास डी फार्मेसी का प्रमाण पत्र होना चाहिए।
-हर मेडिकल स्टोर्स का बोर्ड हो और उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा हो।
-मेडिकल स्टोर्स पर फ्रीज की व्यवस्था होनी चाहिए।
-मेडिकल स्टोर शीशायुक्त हो ताकि धूल के कण दवाओं पर न जमें।
-प्रत्येक मेडिकल स्टोर्स पर जीवित पंजीयन प्रमाण पत्र होना चाहिए।

प्रतिबंधित और नशे में उपयोग होने वाली दवाईयां बिक रही धड्ल्ले से
कुछ दवाईयां ऐसी होती है। जिन्हें बेचना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर्स से वे दवाईयां आसानी से उपलब्ध हो जाती है। क्योंकि उनसे मेडिकल स्टोर्स संचालकों को मोटी कमाई होती है। इसी प्रकार कुछ दवाईयों व सिरप क उपयोग कुछ लोग नशे के रूप में करते हैं। इस प्रकार की दवाईयां बिना चिकित्सक के लिखे नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन यह भी मेडिकल स्टोर्स संचालक आसानी से उठाकर दे देते हैं। जिसका मुख्य कारण निरीक्षण का अभाव है।

सालों से प्रभारी के भरोसे चल रहा था जिला, अब आए हैं ड्रग इंस्पेक्टर
लंबे समय से जिले में ड्रग इंस्पेक्टर के रूप में कोई स्थाई रूप से पदस्थ नहीं था, इस कारण काफी समय तक नीमच जिले का चार्ज बाहर के ड्रग इंस्पेक्टर को दे रखा था, ऐसे में वे भी यदा कदा ही आकर निरीक्षण करते थे। जिससे मेडिकल संचालकों को भी किसी बात की फिक्र नहीं थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिले में चंद माह पहले स्थाई रूप से ड्रग इंस्पेक्टर पदस्थ कर दिए गए हैं। लेकिन जिले में अभी तक कोई विशेष जांच या कार्रवाई होने का नाम नहीं नजर आ रहा है।

हर माह ३० इंस्पेक्शन का रहता है लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ड्रग इंस्पेक्टर को हर माह करीब 30 इंस्पेक्शन का लक्ष्य रहता है। जिसके तहत ड्रग इंस्पेक्टर को मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचकर निरीक्षण करना होती है कि मेडिकल स्टोर्स से मरीजों को दी जाने वाली दवाईयां मानकों पर खरी उतर रही है या नहीं, प्रतिबंधित दवाईयां तो नहीं बेची जा रही है। एक्सपायरी डेट की दवाईयां तो नहीं बेची जा रही है। दवाईयों का बिल दिया जा रहा है या नहीं, इसी के साथ मेडिकल स्टोर्स में अन्य नियमों का पालन भी किया जा रहा है या नहीं आदि की जांच करना होती है। लेकिन लंबे समय से कहीं जांच होती नजर नहीं आई।

मेडिकलों का नहीं हो रहा भौतिक सत्यापन
मेडिकल स्टोर्स की अनुमति, स्थान बदलना, पंजीयन आदि कार्य आजकल ऑनलाइन हो चुके हैं। इसके लिए संबंधित मेडिकल स्टोर्स संचालक को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। जिसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया जाता है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि नीमच जिले में लंबे समय से जो मेडिकल नए खुल रहे हैं या जिनका स्थान परिवर्तित हुआ है उनका भी भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है।

शिकायत आती है तो निश्चित जांच कर कार्रवाई

भोपाल से सर्वर में कुछ समस्या आने के कारण नीमच की एप्लीकेशन अपडेट नहीं हो पा रही है। संभवता एक दो दिन में हो जाएगा। जिले में निरंतर लक्ष्य के अनुसार इंस्पेक्शन का काम चल रहा है। जिसमें अभी तक कहीं किसी प्रकार की कोई कमी नहीं नजर आई। मेडिकल पर बिल नहीं दिया जा रहा है या अन्य कोई शिकायत आती है तो निश्चित जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-जयप्रकाश कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर, नीमच

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