Crime News सड़क हादसों में 18 से 45 वर्ष आयु के 70 फीसदी की मौत

सड़क हादसे न हो इस मानक अनुसार जल्द बनेंगी सड़कें

By: Mukesh Sharaiya

Published: 10 Mar 2019, 03:55 PM IST

नीमच. अब तक सड़क हादसों को नियंत्रित करने का दायित्व पुलिस प्रशासन के हाथ में ही था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी नगरीय निकायों के इंजीनियरों को भी सौंपी गई है। इसके लिए बकायदा5 दिन का प्रशिक्षण दिया गया है। इंजीनियर सड़क निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देकर हादसों को नियंत्रित करेंगे। पिछले चार सालों में जिले में कुल एक हजार 827 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 358 लोगों की मौत हुई है और दो हजार 33 लोग घायल हुए हैं।

फोरलेन पर हर साल होते हैं बड़े हादसे
विदित हो कि नयागांव-लेबड़ फोरलेन निर्माण के दौरान संबंधित कम्पनी ने नियमों का ध्यान नहीं रखा। जहां फ्लाईओवर ब्रिज बनाए जाने थे वहां इनका निर्माण नहीं किया गया। चौराहों पर भी ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते फोरलेन पर सड़क हादसों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जो जानकारी मिली है इनमें अधिकांश हादसे फोरलेन पर ही हुए हैं। पिछले साल जिले में कुल 404 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 97 लोगों की मौत हुई और 364 घायल हुए। इनमें से करीब 60 लोगों की मौत फोरलेन पर हुई है। फोरलेन पर नयागाव टोल टेक्स, केसरपुरा फंटा, कानका फंटा, मालखेड़ा फंटा, जैतपुरा फंटा, भाटखेड़ा बायपास, हर्कियाखाल फंटा आदि पर हर साल बड़ी संख्या में लोग हादसे का शिकार होते हैं। कानका फंटा पर पिछले कुछ सालों में भीषण हादसों की संख्या काफी बढ़ी है। यह सब फोरलेन निर्माण में बरती गई लापरवाही की वजह से हुआ है।

प्रतिवर्ष डेढ़ लाख लोग मरते हैं सड़क हादसों में
मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों के चुनिंदा इंजीनियरों को भोपाल में सड़क सुरक्षा विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान बताया कि प्रतिवर्ष देश में करीब डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं और करीब 5 लाख घायल होते हैं। प्रशिक्षण में बताया कि सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही की वजह से भी हादसे होते हैं। सड़क निर्माण के दौरान सावधानियों का ध्यान रखा जाए तो बड़ी संख्या में हादसों को कम किया जा सकता है। फोरलेन या शहरी सीमा में ब्लैक स्पॉट कैसे कम किए जा सकते हैं इस ओर भी प्रशिक्षण में विशेष ध्यान दिया गया। सड़क निर्माण के दौरान ही साइन बोर्ड लगाए जाए। लोगों की सुरक्षा का अधिक से ध्यान रखा जाए। सड़क निर्माण के दौरान ही सड़क पर रिफलेक्टर लगाए जाए। साइन बोर्ड लगाते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि कहीं इसकी वजह से तो हादसे नहीं होंगे या हो रहे हैं। प्रशिक्षण में बताया कि जितने भी सड़क हादसे होते हैं इनमें से 70 फीसदी हादसों में मरने वाले लोगों की आयु 18 से 45 वर्ष की बीच होती है।

ब्लैक स्पॉट समाप्त करने पर देंगे ध्यान
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट (एआईटीडी) नई दिल्ली द्वारा नगरीय निकायों के इंजीनियरों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण भोपाल में आयोजित किया गया था। इसमें सड़क सुरक्षा विषय पर जानकारी दी गई। इंजीनियरों को ब्लैक स्पॉट समाप्त करने पर अधिक ध्यान देने को कहा गया है। सड़क निर्माण के दौरान साइन बोर्ड लगाने, मानक स्तर का फुटपॉथ बनाने आदि पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। सड़क निर्माण में बरती गई सावधानी से हादसों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- लोकेशकुमार विजय, नीमच नपा इंजीनियर

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Mukesh Sharaiya Bureau Incharge
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