VIDEO: यहां दो रात करनी पड़ती है चौकीदारी, फिर मिलता है अपनी ही उपज का पैसा

VIDEO: यहां दो रात करनी पड़ती है चौकीदारी, फिर मिलता है अपनी ही उपज का पैसा

By: Subodh Tripathi

Published: 02 Mar 2019, 01:06 PM IST

नीमच. लहसुन मंडी में हो रही बंपर आवक के चलते मंडी प्रांगण से लेकर मंडी गेट के बाहर दोनों तरफ की सड़कें पिछले तीन चार दिनों से खचाखच भरी नजर आ रही है। यही हालात शुक्रवार को भी रहे, जहां मंडी के अंदर करीब 20 हजार बोरी लहसुन के ढेर थे, वहीं मंडी के बाहर भी वाहनों पर लदी लहसुन की बोरियां 20-25 हजार से कम नहीं है। वर्तमान में अन्नदाता को लहसुन बेचने के लिए एक रात मंडी के बाहर, दूसरी रात मंडी के अंदर गुजारनी पड़ रही है। जब जाकर तीसरे दिन लहसुन बिक रही है। ऐसे एक दो नहीं बल्कि अधिकतर किसानों के साथ हो रहा है। यहां किसानों को लहसुन की दो रात रखवाली करनी पड़ती है, जब जाकर तीसरे दिन नीलामी होने के बाद पैसा मिलता है।
लहसुन मंडी गेट के शुक्रवार को एक नहीं बल्कि एक साथ दो दो वाहनों की कतार सीआरपीएफ रोड पर दूर दूर तक लगी थी। ऐसे में कई किसान थकान दूर करने के लिए कोई टे्रक्टर ट्राली के नीचे सोया था, तो कोई सड़क किनारे छांव देखकर वहीं पाल बिछाकर आराम कर रहा था। क्योंकि जब तक खेतों से निकलकर लहसुन बाहर आ रही है तब तक किसानों को लहसुन बेचने के लिए अब एक से दो रात मंडी में गुजारना आम बात हो गई है।
यह थे हालात
पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला कि लहसुन मंडी के बाहर जो किसान वाहनों में भरी लहसुन के साथ खड़े थे, वे गुरुवार दोपहर से आए हुए थे। उन्हें मंडी गेट के समीप आने के बाद भी प्रवेश नहीं मिल पाया, ऐसे में एक रात उन्होंने गेट के बाहर ही खुले आसमान के नीचे गुजार दी, वहीं हर दिन किसानों को शाम को मंडी में प्रवेश दिया जा रहा है। जब मंडी पूर्ण रूप से खाली हो जाती है। ऐसे में जिन किसानों को प्रवेश मिलता है उन्हें फिर एक रात मंडी के अंदर गुजारनी पड़ रही है। इस प्रकार दो रात गुजारने के बाद जाकर तीसरे दिन मंडी में लहसुन बिक पाती है। तब जाकर वे तीसरे दिन घर पहुंचे हैं। किसानों ने बताया कि अब लहसुन बेचने के लिए तीन से चार दिन लग रहे हैं। जबकि अन्य उपज बेचने में एक दिन भी नहीं लग रहा है।
शुक्रवार को जहां अनाज, मसाला, सहित अन्य मंडियों में सामान्य आवक थी, वहीं लहसुन मंडी में पैर रखने की जगह भी नहीं थी। हालात यह थे कि प्याज मंडी तक लहसुन के ढेर फेले हुए थे।
फस्र्ट ऊंटी के मिल रहे अच्छे दाम
वैसे तो फस्र्ट ऊंटी के दाम में एक सप्ताह में करीब 1100 से 1200 रुपए की गिरावट आ गई है। क्योंकि यही फस्र्ट ऊंटी एक सप्ताह पूर्व 5400 से ऊपर बिक रही थी। लेकिन अधिक आवक होने के कारण लगतार इसके दाम में गिरावट आ रही है। फस्र्ट ऊंटी शुक्रवार को 3 हजार रुपए से लेकर 4100 रुपए क्ंिवटल तक बिकी। वहीं विदेशा सहित अन्य लहसुन 1800 से 2500 के आसपास चल रही थी। चूकि पिछले साल पूरे साल लहसुन के दाम पानी समान रहे हैं। इस कारण किसान इस बार रिस्क नहीं ले रहा है। उन्हें अभी मिलने वाले दाम भी ठीक लग रहे हैं। क्योंकि बाद में आवक ओर बढ़ गई तो दाम ओर भी कमजोर हो सकते हैं।
हम रतलाम जिले से लहसुन बेचने आए हैं। क्योंकि यहां की मंडी में अन्य मंडियों की अपेक्षा 400-500 रुपए की तेजी रहती है। हम गुरुवार दोपहर तीन बजे आ गए थे। पर मंडी फूल होने के कारण प्रवेश मिलना तो दूर की बात, लाईन में भी काफी दूर लगे थे, हम 3 बजे से रात 9 बजे तक आधा किलोमीटर आगे भी नहीं पहुंच पाए और गेट बंद हो गया। अब शुक्रवार शाम को प्रवेश मिलने पर शनिवार को ही नीलामी होगी।
इस प्रकार दो रात खुले में ठंडे मौसम में गुजारनी पड़ी, क्योंकि बिस्तर गादी भी नहीं मिल रहे हैं।
-संतोष पाटीदार, किसान, ईटावा माताजी
फस्र्ट ऊंटी के दाम 3000 से 4000 के बीच चल रहे हैं। हालांकि दाम में पहले की अपेक्षा काफी गिरावट आई है जो लहसुन हम एक सप्ताह पहले 4700 रुपए बेचकर गए थे, वह 3900 रुपए बिकी है। इस प्रकार एक दो सप्ताह में रेट काफी गिर गए हैं।
-बसंतीलाल धाकड़,किसान अठाना

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