एक मच्छर ने तोड़ दिए पांच साल के सभी रिकार्ड

एक मच्छर ने तोड़ दिए पांच साल के सभी रिकार्ड

Subodh Kumar Tripathi | Publish: Mar, 15 2019 08:06:04 AM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

एक मच्छर ने तोड़ दिए पांच साल के सभी रिकार्ड

नीमच. यूं तो मलेरिया को नियंत्रण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाख जतन किए जा रहे हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि मलेरिया के ग्राफ में कमी आने की अपेक्षा साल दर साल बढ़ोतरी आती जा रही है। पिछले पांच सालों में मलेरिया के मरीजों में चार गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इस ओर जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
बतादें की जिले में वर्ष 2018 में मलेरिया के सबसे अधिक मरीज सामने आए हैं। जहां वर्ष 2014 में मात्र 103 मरीज मलेरिया से प्रभावित हुए थे, वहीं वर्ष 2018 में 442 मरीजों को मलेरिया ने अपनी चपेट में जकड़ा है। वर्ष 2018 में मलेरिया के मरीजों ने पिछले पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इतने अधिक मरीज आज तक सामने नहीं आए, जितने मरीज वर्ष 2018 में मलेरिया की चपेट में आए थे, आंकड़ों के अनुसार निश्चित ही जिम्मेदारों को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए था, लेकिन अभी तक इस ओर स्वास्थ्य विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया है।
पिछले पांच साल के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष कुल
2014 103
2015 99
2016 363
2017 87
2018 442
(आंकड़े जनवरी से दिसंबर तक)
आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2016 और2018 में सबसे अधिक मरीज मलेरिया की चपेट में आए। जिसमें डीकेन और मनासा क्षेत्र काफी संवेदनशील क्षेत्र की श्रेणी में आ रहा है। इन क्षेत्रों में हर साल सबसे अधिक मरीज मलेरिया की चपेट में आते हैं। वर्ष 2018 में भी मनासा और डीकेन क्षेत्र में सबसे अधिक मरीज मलेरिया से प्रभावित हुए हैं।
2015 की स्थिति में बांट दी मच्छरदानियां, 2018 के आंकड़ों पर नहीं ध्यान
वर्ष 2015 में मात्र 99 मरीज मलेरिया की चपेट में आए थे, इसके बावजूद भी शासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में मलेरिया की रोकथाम के लिए मेडीकेटेड मच्छरदानियों का वितरण किया आश्चर्य की बात है कि वर्ष 2018 में मलेरिया के मरीजों ने पांच साल के रिकार्ड तोड़े हैं। लेकिन इस ओर स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जबकि इस साल वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार ही मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण किया गया है।

मलेरिया की रोकथाम के लिए फीवर सर्वे किया जाता है। यह सर्वे घर घर जाकर किया जाकर मौके पर ही मरीजों को ट्रीटमेंट दिया जाता है। ताकि मलेरिया का प्रभाव बढ़े नहीं, इस बार मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकेटेड मच्दरदानियों का वितरण भी किया गया है। ताकि मलेरिया पर नियंत्रण हो सके।
-डॉ सरिता सिंधारे, जिला मलेरिया अधिकारी

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