कहीं बना तालाब, तो कहीं टपकने लगी विद्यालय की छत

-सुबह से शुरू हुई बारिश, न बच्चों के बैठने की जगह न बचा खेलकूद का स्थान
-कहीं तीन चार, तो कहीं पहुंचे मात्र 10 प्रतिशत बच्चे

By: harinath dwivedi

Published: 20 Jul 2018, 11:38 PM IST

नीमच. किसी विद्यालय में दो, किसी में तीन तो किसी में दस से १२ बच्चे नजर आ रहे थे। जोरदार बारिश के कारण जहां अधिकतर बच्चे विद्यालय नहीं पहुंचे, वहीं कुछ बच्चे विद्यालय पहुंचने के बाद बैठने के लिए सूखी जगह तलाशते नजर आए। यह हालात एक दो नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के अधिकतर विद्यालयों के थे। जिसका मुख्य कारण गुरुवार सुबह से शुरू हुई बारिश के चलते जहां विद्यालय के अधिकतर कक्षों की छतों से बारिश का पानी टपक रहा था, तो कहीं विद्यालय के सामने पानी का तालाब भरा होना था।
बतादें की गुरुवार को सुबह करीब ९ बजे से जोरदार बारिश शुरू हो चुकी थी। ऐसे में लोगों का घर से बाहर निकलना भी दुश्वार हो रहा था, जिसके चलते अधिकतर बच्चे भी विद्यालय की ओर रूख नहीं कर पाए, क्योंकि सुबह से शुरू हुई बारिश ने दोपहर २ बजे तक थमने का नाम नहीं लिया। ऐसे में जब पत्रिका टीम शहर में स्थित शासकीय विद्यालयों में पड़ताल करने पहुंची तो हालात आश्चर्य जनक नजर आए।

केस १. शासकीय प्राथमिक विद्यालय विद्या मंदिर यादव मंडी में दो कक्षों में जोरदार बारिश के चलते छत से लगातार पानी टपक रहा था। ऐसे में बच्चों को पढ़ाना तो दूर की बात, बच्चों को बैठने लायक जगह भी नहीं नजर आ रही थी। वैसे इस विद्यालय में कक्षा १ से ५ तक कुल १२८ बच्चे दर्ज हैं। लेकिन बारिश के चलते विद्यालय मात्र २० बच्चे ही पहुंचे। वह भी छत से टपकते पानी के कारण मौका देखकर घर निकल लिए। दोपहर करीब १२.२० बजे इस विद्यालय में २-४ बच्चे ही नजर आ रहे थे।

केस २. शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय नीमच कैंट में प्रवेश करते ही बच्चों को मैदान में भरे पानी से बने तालाब से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में इस विद्यालय में दर्ज कुल १२३ बच्चों में से चंद बच्चे ही विद्यालय पहुंच पाए। बारिश के कारण कम बच्चे पहुंचने से कक्षा १ से ४ तक के बच्चों को एक साथ एक कक्ष में बिठाया था, ऐसे में मात्र १० बच्चे नजर आ रहे थे, वहीं कक्षा पांचवी में भी ३ बच्चे ही नजर आ रहे थे।

केस ३. शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय क्रमांक २ में यूं तो करीब १६० छात्राएं दर्ज हैं। लेकिन गुरुवार को जोरदार बारिश के चलते ५० छात्राएं भी विद्यालय नहीं पहुंच पाई। हालांकि इस विद्यालय में लगातार पानी नहीं टपक रहा था, लेकिन छतों में जगह जगह से सीलन नजर आ रही थी।

केस ४. शहर के बीचों बीच स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिंधी शाला में यूं तो करीब २०० बच्चे अध्यनरत हैं। लेकिन बारिश के चलते यहां के हालात काफी दयनीय नजर आए। यहां हर कक्ष की छत से पानी टपक रहा था, लगातार पानी टपकने के कारण जहां छतें पूर्ण रूप से भीगी नजर आ रही थी, वहीं फर्श पर भी पानी फैलने के कारण बच्चे बैठने के लिए सूखी जगह तलाश रहे थे। ऐसे में शिक्षक भी जैसे तैसे उस स्थान पर बैठे थे, जहां पानी कम टपक रहा था।

केस ५. मध्यान्ह भोजन किस प्रकार वितरित किया जाता है वह गुरुवार को साफ तौर पर नजर आ रहा था। बरसते पानी में भी मध्यान्ह भोजन वितरण करने वाले बाईक पर कड़ी चावल रखकर विद्यालय विद्यालय जा रहे थे, ऐसे में जहां चावल में लगातार बारिश का पानी टपक रहा था, वहीं जब बाईक पर टंगी टंकी से कड़ी वितरण करने लगा तो वितरण कर्ता के सिर और शरीर से टपकने वाला पानी भी कड़ी में जा रहा था। ऐसे में कैसे कह दें की बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण भोजन मिल रहा है। क्योंकि चावल भी किसी प्लास्टिक की कैन में भरकर लाए गए थे।
इसी प्रकार यह किसी को नहीं मालूम था कि गुरुवार को बारिश के चलते बच्चे ना के बाराबर पहुंच पाएंगे। इस कारण मध्यान्ह भोजन भी प्रतिदिन की खपत अनुसार विद्यालय में आया था, ऐसे में जिम्मेदार कम से कम भोजन लेने के इच्छुक नजर आ रहे थे। लेकिन वितरण कर्ता को भी भोजन खपाना था, इस कारण वे जिम्मेदारों के मना करने के बाद भी प्रतिदिन के अनुसार ही भोजन डाल रहे थे। जिससे साफ नजर आ रहा था कि आज भोजन फिकना जरूर है।

विद्यालयों के कक्षों में छत से पानी टपक रहा है तो उन्हें चिन्हित कर एसएमसी की राशि से दुरूस्त करवाया जाएगा। अगर कहीं अधिक काम होगा तो उसे वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।
-केएम सौलंकी, सहायक परियोजना समन्वयक

harinath dwivedi Editorial Incharge
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