दस साल में बढ़ी 13.77 प्रतिशत जनसंख्या, संसाधनों के नहीं पते

दस साल में बढ़ी 13.77 प्रतिशत जनसंख्या, संसाधनों के नहीं पते

Subodh Kumar Tripathi | Publish: Jul, 11 2019 01:36:36 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

दस साल में बढ़ी 13.77 प्रतिशत जनसंख्या, संसाधनों के नहीं पते

नीमच. वैसे तो आमजन में आई जागरूकता के कारण पहले की अपेक्षा अब जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। लेकिन फिर भी जिस हिसाब से जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है। उस हिसाब से लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि जिला बनने के 20 साल बाद भी जिलेवासी मूलभूत सुविधओं से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में आज भी पीछे हैं। ऐसे में लोग रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए स्वयं का जिला छोड़कर बड़े शहरों की ओर रूख करने तक को मजबूर हो गए हैं।


दस साल में 8 प्रतिशत की आई जनसंख्या वृद्धि में गिरावट
वर्ष 2001 में हुई जनगणना के आधार पर पता चला था कि जनसंख्या वृद्धि दस साल में करीब 21.30 प्रतिशत की गति से हुई है। वहीं सालाना 2.13 प्रतिशत की वृद्धि आंकी गई। वहीं वर्ष 2011 में हुई जनगणना में पता चला कि जनसंख्या वृद्धि की दर 13.77 रह गई। जिससे साफ पता चल रहा है कि जिले में हर साल 1.37 प्रतिशत की दर से जनसंख्या वृद्धि हुई है। लेकिन यह भी साफ है कि पिछले दशकों की अपेक्षा वर्ष 2011 में हुई जनगणना में जनसंख्या वृद्धि का ग्राफ काफी गिरा है। इस मान से साफ कहा जा सकता है कि वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना में निश्चित ही जनसंख्या वृद्धि दर 10 प्रतिशत के अंदर पहुंच जाएगी।


जनसंख्या के आंकड़ों पर एक नजर
विवरण वर्ष 20111 2001
जनसंख्या 826067 72670
पुरूष 422653 372419
महिला 403414 353651
जनसंख्या ग्रोथ 13.77 21.30
दस साल में आया अंतर 99997
हर साल बढ़ी जनसंख्या- 10000


महिलाओं की संख्या में 50 हजार की कमी
वर्ष 2001 और 2011 की जनगणना से साफ पता चल रहा है कि उक्त दस साल में महिला और पुरूष में करीब 50 हजार 234 का अंतर है। यानि पुरूष की अधिकता है वहीं महिलाओं की संख्या कम है। वैसे पिछले कुछ सालों में भ्रूण हत्या पर रोक, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि अभियान चले हंै। जिससे संभव है इस बार जो आंकड़ा निकलकर आएगा, उसमें निश्चित ही महिला और पुरूष में अधिक अंतर नहीं होगा।


बढ़ रही जनसंख्या, नहीं बढ़ रहे संसाधन
जिले की जनसंख्या जिस अनुपता में पिछले सालों में बढ़ी है, उस अनुपात में सुविधाओं ने बढऩे का नाम नहीं लिया है। चाहे स्वास्थ्य सुविधाएं हो या फिर शिक्षा या रोजगार या आवागमन के साधन, आज भी नीमच जिला संसाधनों के क्षेत्र में काफी पीछे है। इस कारण जिलेवासी भी विकास की गति में काफी पिछड़े हुए हैं।


शिक्षा-नीमच को जिला बने 20 साल हो चुके हैं। लेकिन आज भी हायर एज्युकेशन के लिए विद्यार्थियों को बड़े शहरों की ओर रूख करना पड़ता है। क्योंकि जिले में न तो आज तक कोई मेडिकल कॉलेज खुला है ओर न ही इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे में जिले के विद्यार्थियों को या तो पढ़ाई के लिए बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है या फिर यहीं रहकर सामान्य पढ़ाई करते हैं।


स्वास्थ्य-जिला बनने के बाद नीमच को सौगात के रूप में ट्रामा सेंटर मिला, लेकिन आश्चर्य की बात है कि वह केवल भवन तक सिमट कर रह गया, क्योंकि उसके लिए स्टॉफ और आधुनिक संसाधन आज तक नहीं मिले, यहां तक की बर्न यूनिट भी नहीं है। ऐेसे में मरीजों को उपचार के लिए उदयपुर, अहमदाबाद की ओर रूख करना पड़ता है।
रोजगार-जिले करीब 10 हजार की जनसंख्या प्रतिवर्ष बढ़ी है। लेकिन उस अनुपात में रोजगार के संसाधन नहीं बढ़े हैं। उल्टे कम ही हुए हैं। जिले में एक सीसीआई फेक्ट्री थी, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलता, लेकिन वह भी सालों से बंद पड़ी है। इसके अलावा अन्य कोई ऐसी बड़ी कंपनी नहीं खुली जिससे युवाओं को रोजगार मिले, ऐसे में जिला का युवा रोजगार के लिए बाहर जाने को मजबूर हो रहा है।
आवागमन के संसाधन सीमित-जनसंख्या बढऩे से आवागमन का ग्राफ भी काफी बढ़ा है। लेकिन आवागमन के संसाधनों में काफी कमी है। नीमच से बड़े शहरों के लिए काफी कम ट्रेनें है। इस कारण यात्रियों को कई बार पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती है। वे ट्रेनों में धक्के खाते हुए सफर करते हैं। कई बार तो यात्रियों को लटक कर जाते हुए तक देखा गया है।


दो संतान तक सीमित रहना होगा अगले ५० साल तक
जनसंख्या की बढ़ोतरी विभिन्न समस्याओं का मूल कारण हैं। सरकार जो भी योजनाएं बनाती है वह जनसंख्या के आधार पर बनाती है। लेकिन जब वे योजनाएं जमीन पर आती है तब तक जनसंख्या बढ़ जाती है। ऐसे में अनुपात बिगड़ जाता है। जनसंख्या बढ़ोतरी में कमी आने से निश्चित ही बेरोजगारी कम होगी, लोगों के जीवन स्तर का उन्नयन होगा, साथ ही अपराध स्वत: ही नियंत्रित हो जाएंगे। प्रत्येक नागरिक को अगले पचास सालों तक केवल दो ही संतान तक सीमित रहना होगा।
-डॉ संजय जोशी, समाजशास्त्री

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