मृत्यु भोज के खिलाफ छेड़ी जंग, कहीं बंद तो कहीं मिठाई रहित होने लगे भोज

मृत्यु भोज के खिलाफ छेड़ी जंग, कहीं बंद तो कहीं मिठाई रहित होने लगे भोज

Subodh Kumar Tripathi | Publish: Aug, 16 2019 01:57:44 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

मृत्यु भोज के खिलाफ छेड़ी जंग, कहीं बंद तो कहीं मिठाई रहित होने लगे भोज

नीमच. शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद पाटीदार समाज के शिवनारायण पाटीदार ने मृत्यु भोज के खिलाफ जंग छेड़ दी, उनका मानना है कि इस कुरीति को जड़ से मिटाना है। जिसके चलते वे वर्ष 1963-64 से लगातार इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। जिसके सार्थक परिणाम यह नजर आए कि कई समाजजनों ने पूर्ण रूप से मृत्यु भोज बंद कर दिया, तो कईयों ने मृत्यु भोज में मिठाई का निर्माण करना ही बंद कर दिया।


पाटीदार समाज के प्रांतीय महामंत्री डॉ राजेश पाटीदार ने बताया कि उनके पिताजी शिवनारायण पाटीदार समाज को कुरीतियों से दूर करने के लिए लगातार जुटे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरूआत नारायणगढ़ से की थी। जिसके चलते स्वयं उनकी दादी की मृत्यु होने पर किसी प्रकार का मृत्युभोज का कार्यक्रम नहीं रखते हुए उनकी स्मृति में श्मशान घाट में नहाने की टंकी व कन्या हायरसेकेंंडरी नारायणगढ़ में करीब 2.5 लाख रुपए की लागत से कक्ष का निर्माण करवाया था। ताकि समाज भी कुरीतियों को छोड़कर ऐसे कार्य करें, जिससे सभी का किसी न किसी रूप में लाभ हो।


अब नहीं होता समाज में कहीं भी बाल विवाह
डॉ पाटीदार ने बताया कि आजादी के बाद भी समाज में बाल विवाह होते थे। लेकिन समाजजनों को लगातार जागरूत करते हुए उन्हें समझाईश दी गई। कड़े रूप से बाल विवाह का विरोध किया गया, जिसका परिणाम यह है कि आज समाज में बाल विवाह भी पूर्णत: बंद हैं। इसी के साथ शादियों में होने वाले अनावश्यक खर्च को भी रोकने के लिए सामुहिक विवाह सम्मेलन की शुरूआत की, जिसमें धीरे धीरे समाजजन भी आगे आने लगे।


मृत्युभोज का शास्त्रों में कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए समाज से अपील करते हैं कि वे मृत्युभोज नहीं करें, साथ ही जिस परिवार में शोक होता है, उसमें मिठाईयों का सेवन कहीं से कहीं तक उचित नहीं है। समाज में जागरूकता आई है नारायणगढ़ में कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने मृत्यु भोज नहीं किया, वहीं मनासा में कई परिवार है जिन्होंने मृत्युभोज में मिठाई बनाना पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। समाज में जागृति आ रही है। जिसका परिणाम यह है कि समाज के युवाओं ने मृत्युभोज ग्रहण करना भी बंद कर दिया है। हम इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए हमेशा कार्यरत रहेंगे, जब तक की यह प्रथा पूर्ण रूप से बंद न हो जाए।
-डॉ राजेश पाटीदार, प्रांतीय महामंत्री, पाटीदार समाज

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