जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बन रही जहरीली शराब, कार्रवाई की दरकार

जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बन रही जहरीली शराब, कार्रवाई की दरकार

By: Virendra Rathod

Published: 16 Oct 2020, 10:51 AM IST

नीमच। लॉक डाउन में शराब बंदी के दौरान जहरीली शराब यानी कच्ची दारू का धंधा शुरू हुआ था, अब यह कारोबार गांव-गांव में जडे जमा चुका है। गांव-गांव में सरेआम मौत की पोटली बिक रही है। उज्जैन जिले में जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में जहरीली शराब बेचने और बनाने वालों की धरपकड शुरू हो गई है। नीमच जिले में भी सैकडों गांवों में जहर की पोटली 20 से 50 रूपए में बेची जा रही है। मौत को दावत देती हुई कच्ची जहरीली शराब के खिलाफ मुहिम चलाने की दरकार है। क्या पुलिस प्रशासन उज्जैन जिले में हुई घटना से सबक लेते हुए नशे के कारोबार में लिप्त संगठित गिरोह के खिलाफ मुहिम चलाकर कार्रवाई करेगा या फि र किसी बडी घटना का इंतजार है।

हाथभटटी कच्ची शराब का गौरखधंधा भी लॉक डाउन में तेजी से बढा था। नीमच जिले में सैकडों ऐसे गांव हैए जहां पर हाथभटटी कच्ची शराब बनाई जा रही है और लोगों को उपलब्ध करवाइ जा रही है। हाथभटटी शराब में यूरिया व अन्य केमिकल का उपयोग किया जा रहा हैए जो कि सेहत के लिए खतरनाक है। केेन और प्लास्टिक की थैलियों में भरकर उक्त जहरीली शराब बेची जा रही है। कच्ची जहरीली शराब को थैलियों में पैक कर बेचा जा रहा है। दूरस्थ गांवों में कच्ची शराब बनाने का गौरखधंधा लॉक डाउन में फ ल-फू ल रहा है। एक लीटर की कच्ची शराब 50 से 60 रूपए में बेची जा रही है।

स्प्रीट और यूरिया से तैयार करते है जानलेवा कच्ची शराब
हाथभटटी देशी शराब बनाने और बेचने का धंधा नया नहीं है, पूर्व में यह बांछडा समुदाय के कुछेक गांवों में यह धंधा चलता था। लेकिन लॉक डाउन में शराब बंदी के दौरान यह गांवकृगांव में फैल गया। अब यह स्थिति है कि नीमच जिले में सौ से अधिक गांवों में भटिटयां संचालित हो गई है। स्थिति तो यह है कि पकडने का डर खत्म होने के कारण अब यह गांव में ही ड्रमों सेे बनाई जा रही है। कच्ची शराब को और अधिक नशीली बनाने के चक्कर में यह जहरीली हो जाती है। गुड, शीरा के अलावा इसमें यूरिया भी डाला जाता है, ताकि इसका नशा तेज और टिकाउ हो जाए। अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सीटोसिन भी मिलाया जाता है। जो मौत का कारण बनती है। ऑक्सीटोसिन के कारण नपुसंकता और नर्वस सिस्टम से जुडी कई भंयकर बीमारिया हो सकती है। इसके सेवन से आंखो में जलनए खारिश और पेट में चलन हाती है। लंबे समय से इसके सेवन से आंखों की रोशनी चली जाती है। कच्ची शराब में यूरिया, ऑक्सीटोसिन जैसे केमिकल प्रदार्थ मिलाने की वजह से मिथाईल एल्कोहल बन जाता है। जो मौत का कारण बनता है। मिथाईल शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन हो जाता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते है और तुरंत मौत हो जाती है।

देशी सफेद और लाल भी नकली बनाने का गौरखधंधा जारी
स्प्रीट से नकली देशी लाल और सफेद शराब बेचने का धंधा भी जिले में जारी है। नीमच जिला राजस्थान से सटा हुआ है, राजस्थान से नकली शराब की खेप आने के मामले भी नीमच में पूर्व में पकडाए है। स्प्रीट से नकली शराब बनाकर नकली लोगोए होलोग्राम और बारदान में इसे पैक कर दिया जाता है। क्वार्टर हूबहू असली जैसे दिखते है। प्रतापग पुलिस ने करीब छह माह पहले नकली शराब बनाने की फैक्टरी का भंडाफ ोड किया था। जिसमें 160 पेटी नकली देशी शराब जब्त की थी, जिनके पव्वों पर एमपी का लेबल लगा हुआ था।

मेडिकल स्टोर पर भारी मात्रा में बिक रही स्प्रीट
कोरोना काल में सेनेटाइजर के रूप में स्प्रीट काफी खुले में मेडिकल स्टोर बिकी। जिसे अवैध शराब में इस्तेमाल किया गया। उज्जेन की घटना में भी जिंजल स्प्रीट मेडिकल स्टोर से खरीद कर जहरीली शराब बनाना सामने आया है। जबकि इस जिंजल स्प्रीट का उपयोग मेडिकल में घाव साफ करने के लिए होता है। अभी आबकारी विभाग के पास मेडिकल स्टोर में जांच के अधिकार नहीं है। लेकिन इस घटना के बाद शासन के निर्देश पर अधिकार मिलने पर मेडिकल स्टोर की भी जांच की जाएगी। अधिक मात्रा में स्प्रीट मिलने पर जांच की जाएगी।
- अनिल सचान, जिला आबकारी अधिकारी नीमच।

अभियान चलाकर की जाएगी कार्रवाई
जिला पुलिस जहरीली शराब बनाने वालों पर लगातार कार्रवाई करती है। पिछले १४ दिनों में ७५ लोगों पर जहरीली शराब बनाने में कार्रवाई की गई है। वहीं गुरुवार को भी पांच स्थान पर कार्रवाई हुई है। जिसमें कुकडेश्वर में ५० लीटर जहरीली शराब जब्त की गई है। यह गंभीर मामला है, क्षेत्र चिन्हित कर जहरीली शराब बनाने वालों के खिलाफ आबकारी के साथ मिलकर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- मनोज कुमार रॉय, एसपी नीमच।

Virendra Rathod Reporting
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