अवैध अफीम खेती पर चीरा लगने के तैयारी अभी तक नहीं हुई टीम की जांच पूरी

अवैध अफीम खेती पर चीरा लगने के तैयारी अभी तक नहीं हुई टीम की जांच पूरी

By: Virendra Rathod

Updated: 12 Mar 2021, 06:57 PM IST

नीमच। शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर रेवली देवली गांव के समीप निपानिया गांव में अवैध रूप से खेती करने के मामले में मौका नपती और कार्रवाई के सप्ताहभर से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी नारकोटिक्स की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है।

 

हालांकि वहीं काश्तकार की फसल में डोडे आ चुके है और उसने अफीम निकालने के लिए चीरा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। काश्तकार दिनेश नागदा के पास गांव रेवली देवली में अफीम फसल बोने का पट्टा था, लेकिन उसने गैरकानूनी तरीके से समीप गांव दूसरे के खाते की जमीन पर अवैध तरीके से अफीम की फसल बो दी। अब नारकोटिक्स मामले में जांच की दुहाई देते हुए अभी कोई निर्णय पर नहीं पहुंची है कि फसल को हकवाना है या क्या करना है। जबकि जांच को सात दिन से भी अधिक हो गए है। नारकोटिक्स की ढीलपोल की कार्रवाई का ही नतीजा है कि गत दिनों में रामपुरा तहसील के मोखमपुरा गांव में पांच स्थानों पर अवैध अफीम की 28.39 आरी में खेती होना पाई गई थी। वहीं उसके दूसरे दिनकुकडेश्वर तहसील के बघाना ग्राम पंचायत में नो स्थानों पर जंगल में अवैध रूप से अफीम खेती २८.९० आरी से अधिक में होना पाई गई थी। इतना नहीं एक खेत में गांजा मिला है। इतना सबकुछ होने के बाद भी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरों टीम इन खेतों के मालिकों के बारे में भी अभी तक कुछ पता नहीं लगा पाई है। जिला प्रशासन को एक लेटर लिखकर खानापूर्ति कार्रवाई में की है। आखिर जमीन वन विभाग की है या शासकीय है तो यह किन की कस्टैडी में है। उनकी देखरेख में अफीम बोई जा रही थी। अगर नहीं बोई गई तो वह जिम्मेदार क्या कर रहे थे। उनके खिलाफ नारकोटिक्स विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया। इसका मतलब तस्करों को जंगल और शासकीय भूमि पर मादक पदार्थ खेती की छूट है।

निपानिया गांव में अवैध खेती का यह है मामला
गावं के एक मुखबिर ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नई दिल्ली को एक शिकायत की थी कि कि ग्राम पंचायत रेवली देवली का पूर्व सरपंच लक्ष्मीनारायण नागदा जो वर्तमान में अफीम काश्तकार भी है और लंबरदार अर्थात मुखिया भी है। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। रेवली देवली निवासी दिनेश पिता कंवरलाल के नाम से अफीम पट््टा जारी है। लेकिन खेती निपानिया गांव में खातेदार कंवरलाल नागदा की जमीन पर अवैध तरीके से अफीम की काश्तकारी की जा रही है। शिकायत में बताया गया है कि निपानिया विरान में केवल एक ही व्यक्ति छतर सिंह के पास अफीम की खेती का लाइसेंस है जबकि वहां पर दो खेतों में अफीम की फसल खड़ी है। इस सूचना पर नारकोटिक्स की टीम खेतों में दबिश देने पहुंची। मौके पर वाहन क्रमांक एमपी 44 सीए 0416 एवं वाहन क्रमांक एमपी 44 सीए 3228 से नारकोटिक्स अधिकारियों की टीम पहुंची थी। मौके पर जांच के बाद कंवरलाल नागदा को टीम साथ लेकर नीमच आ गई थी। जिसके बाद देर शाम को उसे छोड़ दिया गया। लेकिन खेती अब सभी अधिकारी मामले जांच की बात कह रहे है कि जांच चल रही है। जबकि जांच को सात दिन से भी अधिक हो गए है, वहीं अवैध खेती करने वाले काश्तकार ने अब डोडे में चीरा लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

अफीम काश्तकारी का स्थान बदलने का यह है नियम
निपानिया गांव के मुखिया छतर सिंह ने बताया कि उनके गांव में एक ही पट्टा जारी हुआ है। कंवरलाल नागदा के खेत में अवैध रूप से काश्तकारी हुई है। उसके पास रिकॉर्ड में खेती का कोई लेखा जोखा नहीं है। यह जानकारी तो रेवली देवली के मुखिया लक्ष्मीनारायण नागदा मुखिया को भी है। उन्होंने तो ही वहां की नपती कराई है। यह संभव नहीं है कि उन्हें कुछ पता नहीं था। अगर काश्तकारी का स्थान बदलना है तो उसका भी नियम है। काश्तकार अपनी खेती किसके खेत पर कर रहा है। इसका 500 के स्टाम्प पर लीज एग्रीमेंट होता है। नक्शा और भूमि क्रमांक सभी दर्शाना होता है। वहीं अफीम निकलने के बाद कहां रखेगा। सब दर्शाना होता है। यह रिकॉर्ड मुखिया लक्ष्मीनारायण के पास भी नहीं है। अवैध तरीके से निपानिया गांव की भूमि पर अफीम काश्तकारी हुई है। इस पर नारकोटिक्स विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।

इनका यह कहना है
रेवली देवली के काश्तकार दिनेश नागदा को पांच आरी अफीम खेती के लिए लाइसेंस जारी हुआ था। उसने पास के निपानिया गांव में अफीम काश्तकारी किस आधार पर की है। जिसकी जांच जिला अफीम अधिकारी कर रहे है। उनकी रिपोर्ट दो से चार दिन में आ जाएगी। जांच पूरी नहीं होने से पहले किसान डोडे में चीरा नहीं लगा सकता है। अगर किसान ने निर्धारित स्थान पर से बिना अनुमति के अन्य स्थान पर अफीम काश्तकारी की है तो निश्चित तौर कार्रवाई की जाएगी।
- एससी रजवानिया, एएनसी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरों नीमच

Virendra Rathod Reporting
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