ताऊजी हमेशाा शिक्षक के रूप में खड़े रहे सामने और दी प्रेरणा, बदल दी जिदंगी

ताऊजी हमेशाा शिक्षक के रूप में खड़े रहे सामने और दी प्रेरणा, बदल दी जिदंगी

By: Virendra Rathod

Published: 05 Sep 2020, 11:12 AM IST

नीमच। जीवन में बदलाव के लिए गुरू का बड़ा हाथ होता है। हमारे लक्ष्य की पूर्ति में शिक्षक का अहम रोल होता है, वह आपके पिता, मित्र, गुरू, पत्नी, आपके सीनियर सहपाठी भी हो सकते है। सभी से कुछ न कुछ सिखने को मिलता है।

पत्रिका से बातचीत के दौरान एसपी मनोज कुमार रॉय ने बताया कि वह उत्तरप्रदेश के जिला आजमगढ़ में छोटे से गढ़वा गांव के रहवासी है। उनके ताऊजी श्यामाचरण रॉय भी शिक्षक थे। वह सामाजिक कार्य में हमेशा जुड़े रहते थे। आसपास के गांव वाले भी समस्या के सामाधान के लिए उनके पास आते थे। वह सदैव उनके लिए प्ररेणा और ऊर्जा का स्रोत बने रहे। एसपी रॉय ने बताया कि वह मध्यम वर्गीय परिवार से है। गांव में प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्हें प्राइमेरी शिक्षा के लिए पांच किलोमीटर पढ़ाई के लिए पास के गांव जाना पड़ता था। वहां की पढ़ाई खत्म होने के बाद आगे पढ़ाई के लिए ताऊजी ने प्रेरित किया और साइकिल दिलाई जिसके बाद वह १२ किलोमीटर दूर हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए जाते थे। जिसके बाद इलाहाबाद कॉलेज ताऊजी ने भेजा और पढ़ाई को ब्रेक नहीं लगने दिया। पिताजी उमाशंकर रॉय भी शिक्षक थे। उन्होंने भी पढ़ाई के लिए सदा पे्ररित किया। लेकिन ताऊजी के निर्णय लेने की क्षमता और सच्चाई पर टिके रहने की शिक्षा आज भी उन्हें आत्मसात कर आगे बढ़ाती है। एसपी रॉय ने बताया कि परिवार पृष्ठ भूमि शिक्षक होने के नाते उन्हें भी शिक्षक बनना था। लेकिन इलाहाबाद में हॉस्टल मे रहने के बाद कुछ सीनियर की शिक्षा ने भी उनके जीवन की राह को कुछ अलग मोड़ दिया। उनके गाइडेंस में उन्होंने १९९२ में ग्रेजुएशन करने के बाद सिविल परीक्षा पहली बार में ही पास कर ली। ताऊजी गांव में सामाजिक कार्य में लगे रहते है, उनके आदर्श पर आज वह भी सामाजिक लोगों की सेवा से जुड़ गए है और प्रयास रहता है कि मजबूर गरीब लोगों की हमेशा सेवा करें।

यह संदेश
शिक्षा जहां से भी मिले बंटोर लेनी चाहिए कब वह आपके जीवन को ऊचाई पर ले जाकर परिवर्तन ला सकती है। युवा वर्ग के लिए संदेश है कि उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और उसके प्रति ईमानदारी से समर्पित होना चाहिए। जिनका समर्पण और इरादे मजबूत होते हैै निश्चिततौर पर सफलता मिलती है। अभाव में भी पक्के इरादे होने पर भविष्य को संवार सकते हैं। मैं आपके सामने उदाहरण हूं।

Virendra Rathod Reporting
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