सुन और बोल नहीं सकते उन बच्चों का भी हक मारा जा रहा

harinath dwivedi

Publish: Jul, 13 2018 11:31:03 PM (IST)

Neemuch, Madhya Pradesh, India
सुन और बोल नहीं सकते उन बच्चों का भी हक मारा जा रहा

- महिला एवं बाल विकास सभापति पहुंची जांच करने
- फटकार और चेतावनी

नीमच. रेडक्रास सोसायटी के मूकबधिर विद्यालय एवं छात्रावास की अव्यवस्थाओं के बारे में मिल रही शिकायतों के बाद नगरपालिका की महिला एवं बाल विकास सभापति छाया जायसवाल ने प्रारंभिक जांच की है।
हेमंत मूकबधिर छात्रावास और विद्यालय के बारे में शिकायतें मिली थी कि यहां मूक बधिर बच्चों की देखभाल ठीक से नहीं की जाती साथ ही संसाधनों और राशि का दुरूपयोग भी हो रहा है। शुक्रवार को सभापति छाया जायसवाल अचानक रेडक्रास सोसायटी के हेमंत मूकबधिर छात्रावास और विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंची। यहां पर उन्होने मेले कुचेले कपड़े पहने बच्चों को देखकर स्टॉफ को तलब किया और कारण पूछा। स्टॉफ के कर्मचारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
जायसवाल ने छात्रावास और विद्यालय में प्रवेश की स्थिति, भोजन सामग्री, सफाई व्यवस्था, आवास व्यवस्था आदि की जानकारी ली। साथ ही रजिस्टर भी जांचे। इस दौरान कर्मचारियों से उन्होने पूछा कि जब वेतन समय पर नहीं मिलता और कम मिलता है तो फिर क्यों यहां नौकरी कर रहे हैं इस पर स्टॉफकर्मी बगलें झांकने लगे। इस दौरान यहां पर कुछ कर्मियों के परिजनों के भी दिन भर रहने पर भी चेताया गया। छाया जायसवाल ने बताया कि संस्था के बारे में कई शिकायतें मिल रही हैं। प्रारंभिक तौर पर जांच की गई है, स्टॉफ को चेतावनी दी गई है कि व्यवस्था ठीक करें, विशेष आवश्यकता वाले इन बच्चों को कोई परेशानी नहीं होना चाहिए। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।


गौरतलब है कि मूक बधिर विद्यालय और छात्रावास के बारे में इससे पहले भी कई बार शिकायतें प्रशासन तक पहुंची है। रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से मूक बधिर विद्यालय, छात्रावास, वृद्धाश्रम सहित अन्य संस्थाएं संचालित की जाती हैं लेकिन इनकी वस्तुस्थिति प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती। यहां पर बरसों से स्टॉफ जमा हुआ है जबकि स्टॉफ द्वारा यह भी शिकायतें की जाती हैं कि उन्हें वेतन नहीं मिलता। इसके बावजूद वे यहां लगातार सेवाएं क्यों दे रहे हैं यह अपने आप में संदेह को जन्म देता है।
ज्ञात है हाल ही में दिव्यांग बच्चों के होस्टल में कर्मचारी द्वारा मारपीट करने का मामला भी सामने आया था, लेकिन जब महिला बाल विकास सभापति जांच करने पहुंची तो बच्चों ने बयान ही बदल दिए। अधिकांश ने वहां के स्टॉफ के पक्ष में जवाब दिए। हालांकि इस मामले में कलेक्टर द्वारा डिप्टी कलेक्टर की अगुवाई में जांच कमेटी बनाई गई है, इसकी जांच एक सप्ताह में पूरी होगी।

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