नीमच जिले को संवेदनशील माना इस फोर्स ने

- एक सप्ताह तक हर स्थिति का अध्ययन कर केंद्र को दी जाएगी रिपोर्ट - संवेदनशील क्षेत्रों, भौगोलिक स्थिति, राजनैतिक, सामाजिक स्थिति की जानकारी जुटाई जाएग

By: harinath dwivedi

Published: 13 Mar 2018, 11:07 PM IST

नीमच. नीमच जिला संवेदनशील क्षेत्र है, यहां पर पूर्व में हुई घटनाओं को देखते हुए पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सीरे से कवायद शुरू की गई है। १ अधिकारी के साथ ५० जवानों की विशेष टुकड़ी जिले के सभी थाना क्षेत्रों के संवेदनशील इलाकों, संदिग्ध लोगों, संभावित खतरों का डाटा बेस तैयार करने में जुट गई है।
रेपिड एक्शन फोर्स के मध्यक्षेत्र मुख्यालय भोपाल से आरएएफ की १०७ बटालियन के कमांडेंट नवीन सौलंकी के नेतृत्व में ५० सशस्त्र जवानों का दस्ता मंगलवार को नीमच पहुंचा है। १८ मार्च तक नीमच जिले के सभी थानों पर परिचय अभ्यास किया जाएगा।
जिले में १०७ संवेदनशील क्षेत्र-
नीमच जिले में रेपिड एक्शन फोर्स की स्टडी के अनुसार १०७ संवेदनशील क्षेत्र हैं। वर्ष २०१४ में जिले के जावद में रंग तेरस के दिन ही सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हुई थी और कफ्र्यू लगा दिया गया था। परिचय अभ्यास ेके जरिए रेपिड एक्शन फोर्स जिले में पिछले वर्षों में हुई सांप्रदायिक घटनाओं, आंदोलनों, संदिग्ध लोगों, बलवाइयों, जनसंख्या के आधार पर वर्गीकरण, संभावित ऐसे मुद्दे जो विवाद का रूप ले सकते हैं, आदि के आंकड़े जुटाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। यह भी जानकारी ली जा रही है कि किसी भी तनाव या बड़ी घटना के दौरान स्थिति पर नियंत्रण के लिए नियत स्थल तक किन मार्गों से सुगमता से पहुंचा जा सके। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के राजनैतिक, सामाजिक विशिष्ट व्यक्तियों से भेंट की जाएगी। आम नागरिकों से भी फीडबैक लिया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लेग मार्च भी किए जाएंगे।


ेगौरतलब है कि रेपिड एक्शन फोर्स की उत्पत्ति केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल से हुई है जिसकी जन्म स्थली नीमच है। पिछले वर्ष किसान आंदोलन के दौरान भी रेपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई थी। अधिकांश स्थानों पर दंगा नियंत्रण के लिए रेपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया जाता है। नीमच के रंगरूट प्रशिक्षण केंद्र पर भी आरएएफ के जवानों को दंगा नियंत्रण के तरीकों के बारे में सघन प्रशिक्षण दिया जाता है। देश भर में आंतरिक सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के साथ ही आरएएफ की भी बड़ी भूमिका रहती है। रेपिड एक्शन फोर्स को अब इस तरह के टास्क भी दिए जा रहे हैं कि जहां पर पूर्व में सांप्रदायिक दंगे या अन्य कारणों से उपद्रव हो चुके हैं वहां ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए फोर्स संबंधित इलाकों में पहुंंचकर हर स्थिति का बारीकी से अध्ययन करती है और उस पर रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपती है।
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harinath dwivedi Editorial Incharge
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