शहर के कोविड सेंटर में दो संक्रमित की मौत पर हुआ हंगामा

- परिजनों ने ऑक्सीजन खत्म होने के कारण मौत होना बताया

By: Virendra Rathod

Published: 19 Apr 2021, 08:14 PM IST

नीमच। शहर के आनंद मंगल स्थित कोविड सेंटर में शनिवार बीती रात कोरोना संक्रमित दो व्यक्तियों की मौत के बाद रविवार सुबह परिजनों ने ऑक्सीजन खत्म होने के चलते उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। जिसके बाद मौके पर सिविल सर्जन बीएल रावत, तहसीलदार अजय हिंगे सहितह प्रशसानिक और चिकत्सा अधिकारी मौके पर पहुंचकर यथास्थिति को देखते हुए परिजनों की समझाइश की और मामला शांत किया। रविवार को जिले में कोरोना के चलते सात मौत हुई, जिनका एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। जिसके बाद शहर में गमगीन माहौल के साथ दहशत हो गई है।

मृतक के परिजन वीरेन्द्र पुंगलिया ने पत्रिका को बताया कि उनके लगभग 52 वर्षीय भांजे अजयराज को बीते दिनों कोरोना पॉजिटिव आने के बाद आंनद मंगल स्थित कोविड सेंटर में भर्ती कराया था। जहां उनकी शनिवाार बीती रात मौत हो गई। उन्होंने बताया कि भांजे सहित उसकी पत्नी और बच्चों की तबीयत बिगडऩे पर उन्हें केयरवेल हॉस्पिटल दिखाया गया। वहां पर इलाज के करीब २० हजार से अधिक रुपए खर्च कर दिए गए। जहां जांच के बाद कोविड पॉजीटिव होने पर उन्हें आनंद मंगल कोविड सेंटर भर्ती कर दिया गया। जहंा तीन-चार दिन में एक भी गोली नहीं दी गई। सिर्फ ऑक्सीजन लगाई गई थी। यहां तक की रेमडेसिविर का इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं था। जिसकी व्यवस्था भी बाहर से हमने की और फिर लगवाया गया। उसके बाद बाद ऑक्सीजन रात को खत्म हो गई और रात को ११ बजे बोल रहे है कि हमारे पास संसाधन उपलब्ध नहीं है, इन्हें कहीं और लेकर चले जाओ। ऐसी रात में कहा लेकर जाएंगे। इसी लापरवाही के कारण उनके भांजे और साड़ी संसार वाले के परिवार का सदस्य को भी ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हुई है। मृतक के ओमप्रकाश गोयल के पुत्र नीलेश गोयल ने बताया कि नीमच में चिकित्सा नाम की कोई चीज नहीं है। यहां पर रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित ऑक्सीजन भी उपलब्ध नहीं है।

कोई जिम्मेदार चिकित्सक कोविड सेंटर मौजूद नहीं
वीरेंद्र पुंगलिया ने आंखों में आंसू भरते हुए बताया कि कोविड सेंटर पर कोई जिम्मेदार चिकित्सक मौजूद नहीं है। सभी चिकित्सक अपनी निजी दुकान चलाने में मस्त है। यहां पर कम्पाउंडर के भरोसे कोविड सेंटर छोड़ रखा है। जबकि नियम है कि २४ घंटे एक एमडी चिकित्सक उपलब्ध रहना चाहिए। उसके बाद इतना बड़ा सेंटर खोलने के बाद ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं है। खाली सिलेंडर लगा रखे है। वहीं ऑक्सीजन की कमी होने के चलते मरीज की ऑक्सीजन प्रेशर को 14 से 4 पर कर दिया गया। अगर उसकी मौत नहीं होगी तो फिर क्या होगा। चिकित्सा की काफी लच्चर व्यवस्था है।

जिला अस्पताल पहुंचे 177 ऑक्सीजन सिलेंडर
शनिवार बीती देर रात को कोरोना संक्रमित दो व्यक्ति की ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत के बाद रविवार को आनन-फानन में प्रशासन ने करीब 177 ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए है। जिन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी हादसे के बाद ही प्रशासन क्यूं चेतता है। जब स्थिति पूर्व अनुमानित भयावह थी तो फिर ऑक्सीजन सिलेंडर का पूर्व में इंतेजाम क्यों नहीं रखा गया था।

इनका यह कहना है
मामले को लेकर जिला कलेक्टर से चर्चा हुई है। अगर लापरवाही बरती गई है, तो निश्चित ही कार्यवाही होगी।
- बीएल रावत, सिविल सर्जन जिला चिकित्साल नीमच।

गंभीर मरीजों को रखने के लिए सीसीसी सेंटर नहीं था और ऑक्सीजन के साथ सिरियस हो रहा है, तो एक बड़ी परेशानी है। ऑक्सीजन की कमी, तो है इसमे कोई डाउट नहीं है। उसके लिए भी अलग-अलग तरह से प्रयास किए जा रहे है। राजस्थान से आने वाली ऑक्सीजन के लिए मना कर दिया गया है। दो चीजे है, जो गंभीर मरीज है, प्रोटोकॉल के तहत उनको रखना नहीं है और हो रहे है, तो अस्पताल की और आना होगा।
- मयंक अग्रवाल, जिला कलेक्टर नीमच।

कोविड सेंटर प्रभारी डॉ निलेश पाटीदार से सीधी बात
पत्रिका- सर, आनंद मंगल कोविड सेंटर में दो लोगों की मौत हुई है, परिजनों ने ऑक्सीजन खत्म होने के चलते इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
डॉ. पाटीदार- दोनों मरीज की स्थिति क्रिटकल थी, जिन्हें दो दिन पहले ही यहां से ले जाने के लिए कहां गया था। यहां पर संसाधन उपलब्ध नहीं थे। इस पर उनके परिजनों ने कहा कि वह संसाधन जुटा रहें हैं। वह लेकर नहीं गए।
पत्रिका- कोविड सेंटर पर ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं थी, जिस कारण उनकी मौत हुई।
डॉ. निलेश पाटीदार- उनके ऑक्सीजन सिलेंडर लगा हुआ था, जो दो खाली सिलेंडर वह बता रहे है, उसके अलावा एक सिलेंडर और मौजूद था। वहीं करीब पांच से छह सिलेंडर स्टॉक में भी मौजूद थे। यहां तक की ओमप्रकाश के परिजनों को भी समझाया गया था कि क्रिटिकल हालत है। इन्हें अन्य स्थान लेकर जाए।
पत्रिका- जब मरीज आपके पास भर्ती है तो आप उसे एम्बुलेंस सुविधा के साथ रैफर करें, गंभीर हालत में परिजन उसे कहां लेकर जाएंगे।
डॉ. पाटीदार- यह सबसे बड़ी समस्या है, आखिरकार परिजन भी उन्हें कहां लेकर जाए। यहां आसपास ऐसी कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है। लेकिन अब ऐसे में क्या कर सकते हैं।

Virendra Rathod Reporting
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