अब पूर्व न्यायाधीश ने यह क्या कर दिया...

मामला निलंबित जज को अनिवार्य सेवानिवृत्ति किए जाने का

By: harinath dwivedi

Published: 25 Apr 2018, 09:56 PM IST

नीमच. उच्च न्यायालय जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा 500 के तहत मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी एवं सेवानिवृत अपर जिला न्यायाधीश आरके श्रीवास अनिवार्य परिवाद पत्र प्रस्तुत किया।
सेवानिवृत अपर जिला न्यायाधीश श्रीवास नीमच की ओर से अधिवक्ता प्रमेन्द्र सेन ने 24 अप्रैल को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जबलपुर के समक्ष परिवाद उच्च न्यायालय जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल फईम अनवर के विरूद्ध अपराध धारा 500 भादवि के अंतर्गत परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। परिवाद में कहा गया कि परिवादी के विरूद्ध उच्च न्यायालय द्वारा 7 सिंतबर 17 को रजिस्ट्रार जनरल के कथनों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई संस्थित की गई। एक अगस्त 17 को रजिस्ट्रार जनरल फईम अनवर द्वारा परिवादी को उक्त दिनांक को सूचना देकर को बुलाया गया था। परिवादी द्वारा कोई कदाचरण नहीं किया गया था इसके बावजूद भी उक्त आरोप अनावश्यक रूप से परिवादी की प्रतिष्ठा को धूमिल, क्षति कारित करने के आशय व कोई आधार नहीं होते हुए लगाए गए थे। आरोप लगाते हुए मेरे प्रार्थी के विरूद्ध विभागीय जांच प्रारंभ की गई। अभियुक्त को यह तथ्य ज्ञात था कि उनके मिथ्या आरोप के उपरांत भी वे परिवादी के विरूद्ध कोई आरोप प्रमाणित नहीं हो सकता। इस कारण अभियुक्त ने विभागीय जांच में अभियुक्त अथवा किसी अन्य साक्षियों की साक्ष्य प्रस्तुत कर कथन नहीं कराए। बिना साक्ष्य प्रस्तुत किए ही विभागीय जांच भी 11 जनवरी 18 को समाप्त घोषित की गई। परिवादी द्वारा भी 27 फरवरी 18 को आवेदन पत्र प्रस्तुत कर अभियुक्त व अन्य साक्षियों को बचाव साक्षियों के रूप में आहुत करने हेतु निवेदन जांचकर्ता अधिकारी के समक्ष किया गया था, किन्तु जांचकर्ता अधिकारी द्वारा 23 मार्च 18 को उक्त आवेदन अस्वीकार कर अभियुक्त व अन्य साक्षियों को बचाव साक्षियों के रूप में आहुत नहीं किया गया। इसके बाद २४ अप्रैल १८ को फिर आवेदन दिया इसे भी खारिज कर दिया गया। परिवादी के विरूद्ध विभागीय जांच को विधि अनुसार प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। साथ ही लगाया गया आरोप असत्य है। इसके उपरांत भी मिथ्या व मनगढंत आधारों पर विभागीय जांच मानहानि व क्षतिकारित करने के आशय से संस्थित करवाई गई। अभियुक्त द्वारा किए गए कार्य के फलस्वरूप परिवादी के परिवार, समाज तथा विभाग में परिवादी की धोर मानहानि व ख्याति को क्षति हुई है। परिवादी को अब सभी संशय की दृष्टि से देखने लगे हैं। अभियुक्त के कृत्य के कारण परिवादी की मानहानि के फलस्वरूप ही परिवादी के विभाग द्वारा परिवादी की सेवा समाप्त कर अनिवार्य रूप से 19 अप्रैल 18 को सेवानिवृति की गई है। इस कारण अभियुक्त के विरूद्ध भादवि की धारा 500 में संज्ञान लिया जाकर उन्हें योग्य दंड से दंडित किए जाने का निवेदन किया गया।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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