जलवायु संबंधी लक्ष्य पूरे करने के लिए पेरिस समझौते पर असहमति दूर की जाए- प्रभु

विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा, ‘विश्व कारोबार के लिए सप्लाई चेन को लचीला बनाना जरूरी’

RIS, CII और इंडियन साइंस अकादमी की ओर से आयोजित हुआ ‘बी-20 ग्लोबल डायलॉग इन इंडिया’

By: Vivek Shrivastava

Updated: 09 Oct 2020, 02:08 PM IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री और जी-20 शिखर सम्मेलन के शेरपा सुरेश प्रभु ने कहा कि जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पेरिस समझौते की असहमतियों को दूर किया जाना चाहिए। इसी तरह विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) राहुल छाबड़ा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करते हुए आपूर्ति श्रंखला को लचीला बनाए जाने की जरूरत है।

नई दिल्ली में ‘बी-20 ग्लोबल डायलॉग इन इंडिया’ को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत अपनी प्राथमिकताएं तय करेगा लेकिन जो कार्य अब तक अध्यक्ष रहते हुए अन्य देशों ने किया है, उसे भी आगे बढ़ाएगा। भारत 2022 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जी-20 देशों को डिजिटल खाई को पाटने और मजूबत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। इस संवाद का आयोजन आरआईएस, सीआईआई तथा इंडियन साइंस अकादमी ने संयुक्त रूप से किया है।

इस मौके पर विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) राहुल छाबड़ा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनजीर्वित करते हुए आपूर्ति श्रंखला को लचीला बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही उत्पादक क्षेत्रों को भी नए सिरे से खड़ा करना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भारी घरेलू जरूरत की पूर्ति के साथ-साथ भारत ने कई देशों को दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की है। साथ ही भारत ने अन्य देशों को रैपिड रिस्पांस टीम, सूचना प्लेटफार्म, स्वास्थ्यकर्मियों को आनलाइन प्रशिक्षण के रूप में भी मदद प्रदान की है।

आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि आरआईएस विभिन्न पक्षकारों जैसे व्यवसाय, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री तथा सिविल सोसायटी के बीच विचारों के आदान-प्रदान में संलग्न है। ताकि नीति निर्मातओं के लिए जी-20 स्तर पर इन्हें अमल में लाने में आसानी हो। इसी सिलसिले में जी-20 डायजेस्ट का प्रकाशन भी शामिल है जिसका मकसद 2022 के भारत की अध्यक्षता के लिए उपयोगी जानकारी जुटाना है। आरआईएस के चैयरमैन मोहन कुमार ने भी इसमें शिरकत की।

बी-20 समूह दरअसल जी-20 देशों का बिजनेस समुदाय है जो जी-20 देशों को नीति निर्माण के लिए आवश्यक इनपुट देता है। कुछ अन्य समूह भी इसमें बने हैं जैसे टी-20 जो थिंक टैंक है।

Vivek Shrivastava Reporting
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