scriptFormation Day of Tripura, Meghalaya and Manipur | लक्ष्य -2047 सिर्फ़ एक दस्तावेज़ नहीं, त्रिपुरा की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का चित्रण, राज्य के भविष्य का ख़ाका-अमित शाह | Patrika News

लक्ष्य -2047 सिर्फ़ एक दस्तावेज़ नहीं, त्रिपुरा की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का चित्रण, राज्य के भविष्य का ख़ाका-अमित शाह

त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का स्थापना दिवस

त्रिपुरा के युवा नशे से मुक्त हुए, देशभर में ड्रग्स आने का सबसे बड़ा रास्ता बंद हुआ

नई दिल्ली

Published: January 21, 2022 08:59:52 pm

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 50वें त्रिपुरा दिवस समारोह को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विडियो संदेश भी दिखाया गया जिसमे उन्होने त्रिपुरा के लोगों को राज्य के 50वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी।

त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का स्थापना दिवस  : लक्ष्य -2047 सिर्फ़ एक दस्तावेज़ नहीं, त्रिपुरा की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का चित्रण, राज्य के भविष्य का ख़ाका-अमित शाह
त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का स्थापना दिवस : लक्ष्य -2047 सिर्फ़ एक दस्तावेज़ नहीं, त्रिपुरा की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का चित्रण, राज्य के भविष्य का ख़ाका-अमित शाह

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने अपने संबोधन की शुरूआत मां त्रिपुरा सुंदरी को नमन करके की। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के साथ ही मेघालय और मणिपुर के स्थापना दिवस पर तीनों राज्यों के लोगों को हार्दिक शुभकामनायें देता हूँ। त्रिपुरा भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण राज्य है जिसका एक गौरवशाली इतिहास है और राज्य के 50 वर्ष पूर्ण होने पर हमें संकल्पना करनी चाहिए कि 25 साल बाद त्रिपुरा कहां होगा। शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने संकल्प-2047 के माध्यम से त्रिपुरा की जनता के सामने एक लक्ष्य रखा है। भारत सरकार के डाक विभाग ने राज्य का स्मारक डाक टिकट भी जारी किया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि देश के विभाजन के समय से त्रिपुरा ने अनेक विभीषिकाओं को झेला और उस वक़्त महाराजा वीरविक्रम किशोर माणिक्य भारत संघ के साथ जुड़े। विभाजन के समय त्रिपुरा के महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य पहले ऐसे राजा थे जिन्होंने भारतीय संघ के साथ जुड़ने की घोषणा की। जब से अंग्रेज़ों ने फूट डालो और शासन करो की नीति अपनाना शुरू किया, उन्होंने सबसे पहले भारतीय संघ का समर्थन किया। जब आततायी पूर्वी पाकिस्तान की ओर से त्रिपुरा में घुसने लगे, तब महारानी कंचन प्रभा जी ने सरदार पटेल से बात करके मदद मांगी थी और सरदार पटेल ने असम से वायु सेना भेजकर त्रिपुरा की मदद की थी। हर क्षेत्र में राजा साहब ने त्रिपुरा के विकास की नींव डाली और इसीलिए राजा साहब की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगरतला हवाई अड्डे का नाम राजा साहब के नाम पर रखा है। 438 करोड़ रूपयों की लागत से एक भव्य और अत्याधुनिक हवाईअड्डा बनाने का काम त्रिपुरा में हुआ है। प्रतिभा को बढ़ावा देने का सबे बड़ा उदाहरण हैं भारत के श्रेष्ठ वैज्ञानिक जगदीशचन्द्र बोस। उन्हें अगर त्रिपुरा के महाराजा आर्थिक सहयोग ना देते तो वो शायद विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया में नाम नही करते।

शाह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वाटरवे कनेक्टिविटी के कारण आने वाले दिनों में त्रिपुरा में बहुत निवेश आएगा। अगरतला-अखौरा रेल लिंक का काम भी तेज़ी से चल रहा है। हमारी त्रिपुरा सरकार ने शांति और स्थिरता लाने का बहुत बड़ा प्रयास किया है। आज उग्रवाद, घुसपैठ, ब्लॉकेड, ड्रग, आर्म्स ट्रैफ़िकिंग, भ्रष्टाचार, जातीय तनाव की जगह विकास, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स, निवेश, और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना, इस दिशा में त्रिपुरा आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2019 में एनएलएफ़टी के साथ समझौता करके भारत सरकार और त्रिपुरा सरकार ने बहुत बड़ा काम किया, जिससे आज एक अशांति का वातावरण समाप्त हो गया है। 100 करोड रुपए का पैकेज दिया गया और 40 करोड रुपये त्रिपुरा सरकार को जारी भी कर दिए गए हैं। ब्रू समझौते में भारत सरकार ने बहुत बड़ा पैकेज देकर लगभग 37,000 लोगों की 30 साल पुरानी समस्या का समाधान करने का काम किया है और ब्रू शरणार्थी अब राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होकर भारत और त्रिपुरा के विकास में योगदान देने को अग्रसर हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एक नए युग की शुरुआत है और सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात है कि जो लक्ष्य- 2047 जारी किया गया है वह त्रिपुरा का कायाकल्प करने वाला एक दस्तावेज है। उन्होंने त्रिपुरा के सभी युवाओं से अपील की कि वे अब त्रिपुरा की विकास यात्रा में जुड़ें। समारोह में त्रिपुरा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य और मुख्यमंत्री श्री बिप्लब कुमार देब समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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