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नई दिल्ली

जीरो वोट पाने वाले नेहरू और मोदी की कैसे हो सकती है बराबरीः सुधांशु

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने की राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत

नई दिल्लीJun 29, 2024 / 03:44 pm

Navneet Mishra

नई दिल्ली। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के मायने से लेकर अयोध्या में भाजपा की हार को लेकर विपक्ष के सवालों पर जवाब दिया। सुधांशु ने कहा कि जनता के स्पष्ट जनादेश से मोदीजी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इसके साथ ही पंडित नेहरू के उस रेकॉर्ड की बराबरी हो गई जिस पर वे बहुत इतराते थे। उन्होंने कहा कि राम हमारे लिए जीत-हार का विषय नहीं हैं।
भाजपा सांसद ने कहा कि बहुत से विपक्षी सदस्य कहते हैं कि नेहरू की मोदी से बराबरी नहीं हो सकती। ये तो मैं भी मानता हूं इन दोनों में बराबरी नहीं हो सकती। इसके लिए तीन कारण गिनाते हुए सुधांशु ने कहा कि जब 2013 में मोदी भाजपा की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार चुने जाने थे और उस वक्त पार्टी की बैठक होनी थी, तब उन्होंने कहा कि मैं उस बैठक में नहीं आऊंगा, जिसमें मेरे बारे में चर्चा हो रही है। ये होता है नैतिकता के आधार पर निर्णय।
जबकि 26 अप्रैल 1946 को जब कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाना था, जिसके लिए कांग्रेस की बैठक होनी थी। 20 अप्रैल को मौलाना आजाद को नामांकन वापस लेने के लिए पत्र लिखा। गांधी जी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि नेहरू पीएम बने। एक वोट मिला पट्टाभि सीतारमैया को और एक या दो वोट मिले आचार्य कृपलानी को, वहीं सरदार पटेल को सारे वोट मिले, जबकि नेहरू को जीरो वोट मिले। जीरो वोट पाकर पीएम बनने वाले नेहरू और पीएम मोदी के बीच तुलना कैसे हो सकती है?
सुधांशु ने तंज कसते हुए कहा, “मैं तो कहना चाहूंगा खरगे जी को अध्यक्ष बनना था तो सोनिया जी की इच्छा थी। इसलिए सभी ने खरगे को वोट किया और शशि थरूर ने नाम वापस ले लिया. इस लिहाज से तो आज खरगे जी की स्थिति उस समय के नेहरू जी से ज्यादा बेहतर है। “
भाजपा सांसद ने कहा कि शायर मजरूह सुल्तानपुरी ने एक आर्टिकल लिखा नेहरू जी के बारे में और उन्हें दो साल जेल में रहना पड़ा, वहीं मोदी के समय में किसी पर कोई एक्शन नहीं हो रहा है। इसलिए दोनों के बीच कोई तुलना नहीं है।
अयोध्या में भाजपा की हार पर बोलते हुए सुधांशु ने कहा कि हमें अपेक्षानुरूप सफलता नहीं मिली, तो विरोधी चित्रकूट से लेकर रामेश्वरम तक राम से जुड़ी सीटें गिना रहे हैं। ‘ये वो लोग हैं जो लोग भगवान राम का अस्तित्व नहीं मानते थे। क्या भगवान राम हमें चुनाव में हरवाने के लिए आए थे, नहीं वे ऐसे लोगों के लिए अपना अस्तित्व मनवाने के लिए आए थे।02:58 PM

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