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चेतावनी की बजाय junk food में भी अच्छाई तलाशेगी नई व्यवस्था

जहां पैरेंट्स junk food vs healthy food की उधेड़बुन में परेशान हैं, FSSAI कर रहा है इंडस्ट्री के मुनाफे की चिंता।

- ज्यादा शुगर, फैट या नमक वाली (High in Sugar/ Salt/ Fat) पैकेटबंद चीजों पर जरूरी है सामने की ओर चेतावनी

-डायबिटीज और बीपी hypertension जैसी बीमारियों से बचाव के लिए बहुत उपयोगी है ऐसी चेतावनी

-दुनिया भर में अपनाई जा रही सामने की ओर चेतावनी FOPL की ऐसी व्यवस्था

-‘पत्रिका’ पहले ही उठा चुका है नियामक प्राधिकरण FSSAI पर इंडस्ट्री के दबाव का मुद्दा

नई दिल्ली

Published: March 21, 2022 06:52:49 pm

आपकी सेहत के लिए भारी नुकसान वाली चीज की भी अच्छाई बताए उसे क्या चेतावनी कहा जा सकता है? खाने-पीने की ऐसी चीजों के पैकेट पर ऊपर की ओर चेतावनी (Front-of-pack labelling यानी FOPL) के नाम पर हमारे देश में यही व्यवस्था लागू करने की तैयारी हो रही है। भारी दबाव के बाद खाद्य संरक्षा और नियामक प्राधिकरण (FSSAI) सामने की ओर चेतावनी की व्यवस्था लाने को तो राजी हुआ है, लेकिन अब हेल्थ स्टार रेटिंग (Health Star raging/ HSR) की व्यवस्था लागू करने की ओर बढ़ रहा है।

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‘पत्रिका’ पहले भी इस संबंध में हो रहे फैसलों में उद्योग जगत के भारी दखल और प्रभाव की बात सामने ला चुका है। इस अखबार के पास उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक प्राधिकरण बहुत जल्दी ही इस संबंध में नियमन का मसौदा पेश करने जा रहा है और उसमें हेल्थ स्टार रेटिंग को ही अपनाने वाला है। खास बात है कि 15 फरवरी को हुई जिस बैठक के आधार पर यह फैसला लिया गया उसमें मौजूद स्वास्थ्य और उपभोक्ता संगठनों ने खुल कर वहीं इसका विरोध किया। जबकि उद्योग जगत के सभी प्रतिनिधियों ने इसका भरपूर स्वागत किया है।

नियम बनाने में भी कंपनियां की अहम भूमिका

चेतावनी व्यवस्था के बारे में फैसला लेने के लिए प्राधिकरण अपनी बैठकों में जहां बड़ी संख्या में उन्हीं उद्योग के लोगों को शामिल करता है जो नुकसानदेह चीजें बेच रहे हैं। ‘पत्रिका’ ने पहले भी यह मुद्दा उठाया था। इसके बावजूद 15 फरवरी की बैठक में भी जहां इन कंपनियों की ओर से 17 प्रतनिधियों को बुलाया गया था, वहीं सिर्फ 6 प्रतिनिधि स्वास्थ्य और ग्राहक संगठनों की ओर से थे। बैठक के मिनट्स में भी दर्ज है कि गैर सरकारी संगठनों सेंटर फॉर सायंस एंड एन्वायरनमेंट, कट्स, कंज्यूमर व्हाइस और सीएजी ने स्टार रेटिंग को ले कर आगाह किया है।

क्यों जरूरी स्पष्ट चेतावनी?

प्राधिकरण ने भी दुनिया भर में स्थापित इस तथ्य को माना है कि वसा, चीनी या नमक की अधिक मात्रा वाली पैकेटबंद चीजों पर इस संबंध में चेतावनी छापी जानी जरूरी है। डायबिटीज और बीपी से ले कर हृदय रोग तक दर्जनों बीमारियों का भारत में खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यह चेतावनी खास तौर पर बच्चों को इनसे बचाने में बहुत प्रभावी होगी।

स्टार रेटिंग में क्या कमी?
जहां लोगों को निगेटिव न्यूट्रिएंट्स यानी नुकसानेह तत्वों से सावधान करने की बात थी, स्टार रेटिंग में उस नुकसानदेह चीज की अच्छाइयों को भी प्वाइंट मिल सकेंगे। जिन दो देशों ने इसे अपनाया था, वहां इसका खूब दुरुपयोग हो रहा है। विटामिन डी मिला कर शीतल पेय भी सेहत के स्टार हासिल कर रहा है। यही वजह है कि उद्योग जगत इसे लागू करवाने के पक्ष में है।

क्या है प्राधिकरण के तर्क

प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि हेल्थ स्टार रेटिंग का फैसला आइआइएम अहमदाबाद की ओर से करवाए गए सर्वेक्षण के आधार पर लिया गया है। इस अध्ययन में पाया गया कि ग्राहकों को यह रेटिंग ज्यादा आसानी से समझ में आती है।

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