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नई दिल्ली

संतुलन साधकर चलते हैं जेपी नड्डा

– मोदी 1.0 में देश को आयुष्मान और जन औषधि जैसी दो बड़ी योजनाएं देने वाले नड्डा को फिर से मिली स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी
– भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते कोविड महामारी के दौरान ‘सेवा ही संगठन’ अभियान चलाने का रिकॉर्ड बनाया, सदस्यता पहुंचाई 18 करोड़ पार

नई दिल्लीJun 21, 2024 / 04:02 pm

Navneet Mishra

नवनीत मिश्र

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की एक बार फिर मोदी सरकार में वापसी हुई है। स्वास्थ्य और उर्वरक एवं रसायन जैसे दो बड़े मंत्रालयों की कमान वे संभाल रहे हैं। 64 वर्षीय नड्डा की पहचान संतुलन साधकर चलने वाले और हर परिस्थिति में फिट हो जाने वाले नेता की रही है। 90 के दशक में जब नरेंद्र मोदी हिमाचल के प्रभारी थे तब नड्डा उनके संपर्क में आए थे। उस समय बने रिश्ते धीरे-धीरे प्रगाढ़ होते गए। 30 जून को राष्ट्रीय अध्यक्ष का उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद भाजपा के सामने नए और ऊर्जावान अध्यक्ष को खोजने की भी चुनौती है। मोदी सरकार में उनके इस दूसरे कार्यकाल के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिससे उन्हें पार पाना होगा।
नड्डा यूं तो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के रहने वाले हैं, लेकिन जन्म उनका बिहार के पटना में 2 दिसंबर 1960 को हुआ। जेपी आंदोलन से जुड़कर 1975 में राजनीति में उतरे। 1977 में पटना विश्विद्याल छात्रसंघ के सेक्रेटरी बने। पटना विवि से बीए करने के बाद हिमाचल यूनिवर्सिटी से कानून की शिक्षा ले चुके हैं। 1987 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने के कारण 45 दिनों तक निरुद्ध रहे। 1991 में 31 साल की उम्र में वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए थे। इसके बाद 1993 में पहली बार बिलासपुर से विधानसभा के चुनाव लड़े तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखे। 2012 तक तीन बार विधायक रहे।

महासचिव के बाद बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

2010 में जब नितिन गडकरी राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो उन्होंने नड्डा को राष्ट्रीय महासचिव बनाया। अमित शाह के कार्यकाल में तीसरी बार नड्डा महासचिव बने। फिर शाह के 2019 में गृहमंत्री बन जाने के बाद वे कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और अगले साल 20 जनवरी 2020 को पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वे 1998-2003 तक हिमाचल सरकार में स्वास्थ्य और संसदीय कार्य मंत्री रहे और फिर 2008-10 में वे वन, पर्यावरण, विज्ञान और तकनीकी मंत्री रहे। 2012 से अब तक लगातार राज्यसभा सदस्य हैं।

स्वास्थ्य मंत्री रहते गेमचेंजर स्कीम बनाई

मोदी 1.0 में हुए कैबिनेट फेरबदल के दौरान उन्हें देश के स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी मिलीथी। इस दौरान देश के करीब 55 करोड़ लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने वाली आयुष्मान योजना को उन्होंने धरातल पर उतारा। इसके अलावा सस्ती जेनरिक देवाओं की उपलब्धता के लिए जन औषधि केंद्र खोलने की भी नड्डा ने शुरुआत की। अस्पतालों का डिजिटलीकरण करके स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में भी सुधार का प्रोजेक्ट भी शुरू किया। मोदी सरकार में देश के अलग-अलग हिस्सों में नए एम्स निर्माण की शुरुआत भी करने वाले नड्डा रहे।

कार्यकाल में मातृ मृत्यु दर हुई कम

नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए देश में मातृ मृत्यु दर में कमी दर्ज हुई। 44000 मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा नीचे गिरकर 32,000 पहुंचा।

सेवा ही संगठन अभियान ने बनाया रेकॉर्ड

राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान भाजपा को राजनीतिक नहीं सेवा संगठन के रूप में ढालने में सफल रहे। कोविड महामारी के समय ‘सेवा ही संगठन’ अभियान चलाकर देश के 900 से अधिक जिलों में 220 मिलियन से अधिक खाद्य किट, 50 मिलियन राशन किट और 56.6 मिलियन फेस मास्क वितरण का रेकॉर्ड बनाया।

चुनौतियां

70 साल से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को आयुष्मान योजना का लाभ देना
एम्स दिल्ली की तरह अन्य एम्स में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं
सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना
अस्पतालों में पर्याप्त बेड की व्यवस्था
दवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना

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