एक छोटा टिड्डी दल 2500 आदमी या 10 हाथी और 25 ऊंट के बराबर खाता है खाना

Highlights

- टिड्डी (Locust) एक प्रवासी कीट है, जो अफ्रीका (Africa) के रेगिस्तान (Desert) में पैदा होते हैं और लाखों की संख्या में झुंड बनाकर हरियाली की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर दूसरे देशों की सीमाएं लांघकर भारत (India) आ जाते हैं।

- कोरोनावायरस (Coronavirus) और लाॅकडाउन (Lockdown) से बेहाल किसान अब टिड्डी दल से परेशान हैं, जो मानसून (Monsoon) तक भारत में सक्रिय (Active in India) रह सकते हैं, मगर तब तक खरबों रुपए की फसल नष्ट हो जाएगी।

By: Ashutosh Pathak

Updated: 28 May 2020, 02:27 PM IST

आशुतोष पाठक। नई दिल्ली

देश में किसान कोरोना वायरस (Coronavirus) और लॉकडाउन (Lockdown) से कितने बेहाल और परेशान हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। उस पर अब यह टिड्डी दल का हमला (Locusts Attack) मानों किसानों के लिए कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। टिड्डी दल (Locust) अभी खासकर उत्तर भारत (North India) के तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश (Rajasthan, Madhya Pradesh and Uttar Pradesh) के किसानों के लिए आतंक का पर्याय बने हुए हैं। टिड्डियों का यह दल जिस तरह एक राज्य से दूसरे राज्य होते हुए आगे बढ़ रहा और किसानों की फसल को देखते ही देखते बर्बाद करता जा रहा है, उससे हर कोई हैरान और परेशान है।

देखा जाए तो भारत (India) में इससे पहले टिड्डी दल का इतना बड़ा हमला करीब 26 साल पहले (26 years ago) हुआ था। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की मानें तो देश में टिड्डी दल का यह संकट मानसून (Monsoon) तक रह सकता है। वहीं, खेती-किसानी से जुड़े कई जानकार (Agricultural Expert) और आर्थिक विशेषज्ञ (Economic Experts) इस बात को लेकर आशंकित हैं कि अगर इस टिड्डी दल का खात्मा जल्द से जल्द नहीं हुआ तो ये जातेे-जाते काफी बड़ी मात्रा में फसलों का नुकसान कर देश को अरबों-खरबों रुपये का चूना लगा चुके होंगे।

...तो आइए जानते हैं कि टिड्डी दल वास्तव में कहते किसे हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में टिड्डी आते कहां से हैं और इनका आना न सिर्फ किसानों बल्कि, देश की आर्थिक सेहत पर किस तरह और कितना असर डालता है, इसे एक नजर में समझते हैं --

10 प्रजातियों वाला प्रवासी कीट, 2 हजार मील तक उड़ान
टिड्डी ग्रॉसहोपर (Grasshopper Attack) समुदाय में एक्रिडाइडी परिवार के आर्थाप्टेरा गण का एक कीट है। दुनियाभर में टिड्डियों की कुल 10 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 4 भारत में समय-समय पर देखी जाती रही हैं। यह एक प्रवासी कीट है। यानी यह न सिर्फ शहर और राज्य बल्कि, देेश की सीमाएं तक लांघ जाते हैं। इनकी कुल उड़ान दो हजार मील तक हो सकती है, जबकि एक दिन में करीब 15 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से डेढ़ सौ किलोमीटर तक उड़ सकती हैं। भारत में जो टिड्डी दल हमला किए हुए है, वह पाकिस्तान (Pakistan) से आया है।

रेगिस्तान में पैदा हुए, तलाश हरियाली की
टिड्डी दल यानी छोटे-छोटे कीटों के कई बड़े झुंड। एक झुंड में हजारों से लाखों कीट हो सकते हैं। ये रेगिस्तानी इलाके में पैदा होते हैं। खासकर, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका में। जब इन्हें एक समान पर्यावरणीय हालात (हरियाली, मानसून आदि) मिलते हैं, तो दिमाग में सेरेटॉनिन नामक रासायनिक पदार्थ उत्पन्न होता है। इसके बाद ये प्रजनन करते हैं। इनकी संख्या 50 से 100 गुना तक तेजी से बढ़ती है। इसके बाद झुंड हरियाली की तलाश में दुनियाभर के लिए उड़ान भरता है।

पाकिस्तान से घुसे, देश में कहां-कहां घूमे
भारत में टिड्डी दल ने सबसे पहले राजस्थान के गंगानगर से हमला शुरू किया। इसके बाद जयपुर और आसपास के जिलों में किसानों की फसल चट कर गए। अक्सर गुजरात और राजस्थान तक सीमित रहने वाला यह झुंड इस बार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहुंच गया। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ से होते हुए यह बुंदेलखंड के रास्ते उत्तर प्रदेश में घुसा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तबाही मचाते हुए दिल्ली-एनसीआर की ओर बढ़ रहा है।

इस बार कहानी अलग, पहली बार शहर क्यों आए
हरियाली की खोज में टिड्डी दल सिर्फ गांवों और खेतोंं की सरहद तक सीमित रहते थे। यह पहली बार है, जब इनके दल ने शहरों की तरफ रुख किया है। जयपुर, मुरैना, श्योपुर के शहरी क्षेत्र में आतंक मचाने के बाद अब ये दिल्ली-एनसीआर की तरफ रुख कर रहे। माना जा रहा कि भारत में जुलाई से अक्टूबर के बीच आने वाले टिड्डी दल ने इस बार पहले दस्तक दी है। इस साल खेतों में फसल कट चुकी है और अब मजबूरी में ये हवाओं के साथ उसी दिशा में सफर कर रहे हैं। बीते करीब डेढ़ साल में कई बार टिड्डी हमारे देश पर हमला कर चुके हैं।

झुंड बड़ा हुआ तब, नुकसान नहीं, तबाही आएगी
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर टिड्डी दल का झुंड छोटा है तो ये खेती को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकते। मगर एक झुंड में इनकी संख्या हजारों-लाखों में है, तो ये सिर्फ नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि, तबाही लाते हैं। हालांकि, भारत में घुसा झुंड भी अब दो से तीन भागों में बंट चुका है और यह सभी के लिए राहत भरी खबर है।

सर्दियों में खत्म हो जाती थी, इस बार नहीं हुई
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो टिड्डियां सर्दियों में खुद खत्म हो जाती हैं। इससे पहले 1993 में टिड्डी दल ने हमला किया, तब उस साल अक्टूबर-नवंबर में ठंड से उनकी मौत हो गई थी, लेकिन इस सर्दी में ठंड जब अपने चरम पर थी, तब भी टिड्डियां मरी नहीं बल्कि, गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में खतरनाक तरीके से तबाही मचा रही थीं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जलवायु परिवर्तन का असर है और ये टिड्डियां पहले से ज्यादा खतरनाक हैं।

टिड्डी दल का कहर, 2500 आदमी का खाना हजम
टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) की ओर से टिड्डी नियंत्रण एवं शोध विषय पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे खतरनाक रेगिस्तानी टिड्डी होती है, जो भारत में सक्रिय है। यह किस हद तक नुकसानदेह साबित हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाएं कि एक छोटा टिड्डी दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या फिर 2500 आदमियों के बराबर का खाना हजम कर जाती हैं।

खतरा टला नहीं, बारिश अभी बाकि है
जानकारों की मानें तो टिड्डियां बारिश के समय प्रजनन करती है। मानसून आने वाला है। ऐसे में इनकी संख्या अभी जबरदस्त तरीके से बढ़ सकती है। इसको लेकर अभी से तैयारी करनी होगी, वरना एक से डेढ़ महीने में खतरा कई गुना बढ़ सकता है और तब यह खेतों में खड़ी खरीफ की फसल के लिए खतरा पैदा करेंगी।

इन्हें रोकें कैसे, थाली पीटें-कीटनाशक छिडक़ें
टिड्डियों का उत्पात अगर एक बार शुरू हो गया तो इसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो जाता हैै। इस पर नियंत्रण के लिए हवाई जहाज से कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव करें। जिन खेतों से गुजरने की संभावना हो, उनमें विषैला चारा रखें। बेंजीन हेक्साक्लोराइड से भीगी गेहूं की भूंसी भी खेतों में रख सकते हैं। साथ ही, अगर टिड्डियों का दल आए तो जोर-जोर से आवाजें करते हुए थाली पीटें या ढोल बजाकर इन्हें भटकाने की कोशिश करें।

Ashutosh Pathak
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