अल्पसंख्यक आयोग ने कैराना पर एनएचआरसी के रिपोर्ट को नकारा , कहा दावे आधारहीन 

अल्पसंख्यक आयोग ने कैराना पर एनएचआरसी के रिपोर्ट को नकारा , कहा दावे आधारहीन 
Minorities panel trashes NHRC report

एनसीएम की टीम ने कैराना दौरा करने के बाद वहां से हिंदू परिवारों के पलायन को नकार दिया। टीम का कहना है कि वहां पर पलायन के कोई सुबूत नहीं मिले। 

नई दिल्ली. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के एक दल ने कैराना का दौरा करने बाद अपनी रिपोर्ट में  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की  रिपोर्ट को नकार दिया है।एनसीएम ने पहले की रिपोर्ट को पूरी तरह से आधारहीन करार किया है। एनएचआरसी की रिपोर्ट में बताया गया था कि हिंदुओं ने कैराना से डर के कारण पलायन किया। 

कैराना में नहीं मिले पलायन के सुबूत 
एनसीएम (यूपी) टीम की प्रमुख फरीदा अब्दुल्लाह खान ने कहा कि एनएचआरसी की रिपोर्ट आधारहीन लगता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्थानीय परिवार के लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। जांच के दौरान इस बात के कोई सुबूत नहीं मिले जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि वहां से हिंदुओं का पलायन हुआ है। इसलिए एनएचआरसी की पहले के रिपोर्ट को सही नहीं ठहराया जा सकता है। 

एनएचआरसी पर लगाया पोलराइजेशन का आरोप 
उन्होंने कहा कि एनएचआरसी रिपोर्ट में इस बात का भी सुझाव दिया गया था कि कैराना में अपराधों में वृद्धि की वजह से शरणार्थी बने लोगों का पुनर्वास किया जाए। लेकिन इस मामले में कोई कागजी सुबूत नहीं है, जिसके आधार पर एनएचआरसी की रिपोर्ट को सत्यापित करना संभव हो सके। बशर्ते,  उन्होंने कहा कि दंगों की वजह से शहर का डेमोग्राफिक बदलाव हुआ और उसके बाद से करीब 30,000 लोगों ने अपना आवास बदला या नये लोग यहां आकर बसे। खान ने एनएचआरसी पर पोलराइजेशन करने का आरोप लगाया है। 

एनसीएम की रिर्पोट राजनीति से प्रेरित 
स्थानीय भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि एनसीएम की रिपेार्ट में एक गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कैराना अब नया कश्मीर बन गया है। यहां से 250 हिंदू परिवार बहुसंख्यक लोगों के डरस से पलायन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में कम से कम एनसीएम को संवेदनशील होना चाहिए था, क्योंकि यह एक गंभीर मसला है। 

डर के मारे किया था पलायन 
एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि शामली के कैराना से 250 हिंदू परिवारों ने पलायन किया था। रिपोर्ट में भाजपा सांसद हुकुम सिंह के आरोपों को सही ठहराते हुए कहा था कि कम से कम 24 गवाहों ने बताया था कि कैराना के बहुसंख्य समुदायों के युवक अल्पसंख्यक परिवारों के महिला सदस्यों के खिलाफ छींटाकशी और अशोभनीय कमेंट करते रहे हैं। हिंदू 
परिवार की महिलाएं और लड़कियों ने घर से बाहर निकलना तक बंद कर दिया था। न ही वो इतनी हिम्मत जुटा पाते थे पुलिस में जाकर इस बात की शिकायत कर सकें। 







खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned