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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री मोदी निष्पक्ष जांच की मांग पर चुप-गौरव गोगोई

-परीक्षा में बैठे 24 लाख छात्रों का भविष्य मोदी सरकार के कारनामों से दांव पर लगा

नई दिल्लीJun 14, 2024 / 01:17 pm

Shadab Ahmed

नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि नीट रिजल्ट में हुई धांधली के आरोपों पर सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर उसे आत्ममंथन करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सरकार ने बताया है कि ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 छात्रों का स्कोर कार्ड रद्द किया जाएगा और उन्हें 23 जून को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। वे बच्चे जो दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उनके ग्रेस मार्क्स हटाने के बाद जो अंक रहेंगे, वही फाइनल अंक माने जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब तक एनटीए के ग्रेस मार्क्स के विषय पर ही हमने निर्णय सुना। लेकिन जो बड़ा घोटाला हुआ है, उसके संदर्भ में आज सरकार से हमें कोई ठोस कदम सुनने को नहीं मिला है।
गोगोई ने यह बातें कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान निष्पक्ष जांच की मांग पर चुप हैं, वे इस मुद्दे पर चर्चा से भाग रहे हैं। जिस एनटीए के नेतृत्व में यह पूरा घोटाला हुआ, उसी एजेंसी से मामले में जांच कराने की बात कही जा रही है। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र और कोचिंग सेंटर का एक नेक्सस बन चुका है, जिसने आज हमारे मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग को अस्थिर कर दिया है। हमने अलग-अलग रिकॉर्डिंग सुनी है कि कैसे लाखों रुपए मांगे जा रहे हैं। एक ही केंद्र में बच्चों को एक जैसे नंबर मिल रहे हैं। अगर परीक्षा केंद्र-कोचिंग सेंटर को कहीं से प्रश्न पत्र मिला है तो इसमें जरूर कोई एनटीए का अधिकारी शामिल है। ऐसे में एनटीए निष्पक्ष जांच कैसे करेगा।
गौरव गोगोई ने कहा कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन परीक्षा पर चर्चा करने वाले प्रधानमंत्री आज कहां है। इस मामले में सरकार का रवैया कमजोर रहा है। लेकिन देश के मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है और हम सदन के अंदर 24 लाख छात्रों की आवाज जोर-शोर से उठाएंगे।

जयराम के सरकार से तीन सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार से इस मामले में तीन किए हैं।

1. क्या नीट का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जैसा कि कई मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स और पटना में एक छात्र की ओर से दर्ज़ की गई एफआईआर से संकेत मिलता है?
2. क्या नीट पेपर के रिजल्ट अनुमानित रूप से तय समय से दस दिन पहले – 14 जून के बजाय 4 जून को जारी किए गए थे, ताकि वे लोकसभा चुनाव के नतीजों के शोर में दब जाएं और मीडिया का कम ध्यान जाए?
3. 2019 के बाद से नीट के किसी भी वर्ष में तीन से अधिक टॉपर नहीं रहे हैं। यह परीक्षा देश के सभी एमबीबीएस कार्यक्रमों में एंट्री के लिए एकमात्र प्रवेश द्वार है। 2019 और 2020 में एक-एक टॉपर थे। 2021 में तीन, 2022 में एक और पिछले साल दो टॉपर थे। ऐसे में सवाल उठता है कि एक या दो नहीं, बल्कि 67 छात्रों ने 2024 में 720 का परफेक्ट स्कोर कैसे हासिल किया? उनमें से 44 को ग्रेस मार्क्स से लाभ हुआ। यदि इन्हें हटा दें तो फिर भी फिर भी 23 टॉपर बचते हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में ग्यारह गुना अधिक है। इस साल आखऱि ऐसा क्या बदल गया?
4. एक ही राज्य से आने वाले कई टॉपर्स के रोल नंबर एक जैसे कैसे हो सकते हैं? क्या वे एक ही परीक्षा केंद्र से थे?11:27 AM

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