RTI में पूछा गया खेल रत्न का नाम बदलने को कितने पत्र मिले, PMO ने कहा - 'ये सूचना नहीं'

एक आरटीआई (RTI) दाखिल कर पीएमओ (PMO) से पूछा गया था कि खेल रत्न अवार्ड (khel ratna award) का नाम बदलने के संबंध में कितने पत्र मिले थे। इस पर पीएमओ ने जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि ये सूचना के अधिकार से बाहर है।

By: Nitin Singh

Published: 21 Aug 2021, 11:29 AM IST

नई दिल्ली। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड (major dhyan chand khel ratna award) कर दिया था। इस संबंध में घोषणा करते हुए पीएम ने कहा था कि उन्हें बीते काफी समय से इसको लेकर लोगों ने पत्र मिल रहे थे, जिसमें वे खेल रत्न का नाम मेजर ध्यानचंद के नाम पर करने की अपील कर रहे थे। वहीं हाल ही में एक आरटीआई (RTI) के माध्यम से पूछा गया था कि खेल रत्न का नाम बदलने को लेकर पीएमओ (PMO) को कितने पत्र मिले थे। वहीं पीएमओ ने इस संबंध में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है।

PMO ने आवेदनकर्ता पर लगाए गंभीर आरोप

पीएमओ (PMO) का कहना है कि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती क्योंकि यह सूचना के अधिकार से बाहर है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने आवेदनकर्ता पर ही इल्जाम लगाया है कि वे इस तरह की सूचना मांगकर घुमा-फिराकर कुछ जांचने की कोशिश कर रहे हैं।

मेजर ध्यानचंद के लिए भारत रत्न की मांग

गौरतलब है कि इस बार ओलंपिक में भारत के शानदार प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm modi) ने खेल रत्न का नाम बदलकर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद (major dhyan chand) के नाम पर कर दिया था। इस दौरान पीएम मोदी ने दावा किया था कि उन्हें इसको लेकर कई दिनों से लोगों के पत्र मिल रहे थे। हालांकि पीएम मोदी की इस घोषणा के बाद से मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग तेज हो गई है।

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बता दें कि मेजर ध्यानचंद ने भारत को ओलंपिक में तीन बार पदक दिलाया है। एक गेम के दौरान उनके प्रदर्शन को देखकर कमेनटेटर कहने लगा कि ये हॉकी नहीं जादू था। 29 अगस्त को उनके जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है और इसी तारीख को हर साल राष्ट्रीय खेल पुरस्कार दिए जाते हैं।

सरकार पर हमलावर हुआ विपक्ष

पीएमओ की इस प्रतिक्रिया के बाद से विपक्ष, केंद्र सरकार पर एक बार फिर से हमलावर हो गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी मनमानी कर रही है। उसे नियमों और संविधान से कोई मतलब नहीं है। विपक्ष ने उस वाकये का जिक्र भी किया जब पीएमओ की ओर से कोरोना रिलीव फंड के संबंध में जानकारी देने से इनकार कर दिया था।

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