"दिल्ली किसी के बाप की नहीं है, सबकी है"

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| Updated: 16 Jan 2015, 12:10:00 PM (IST) New Delhi, Delhi, India

कांग्रेस समेत कई अन्य विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी सांसद और पार्टी की दिल्ली...

नई दिल्ली। कांग्रेस समेत कई अन्य विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी सांसद और पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष विजय गोयल के उस बयान की कड़ी आलोचना की है जिसमें राजधानी की समस्या के समाधान के लिए देश के अन्य राज्यों से लोगों के आने पर रोक लगाने की जरूरत बताई गई है।

कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने गोयल के बयान का विरोध करते हुए कहा कि वह दिल्ली के राज ठाकरे बनने की कोशिश कर रहे हैं जो उचित नहीं है। उन्हीं की पार्टी के दक्षिण पश्चिम दिल्ली से पूर्व सांसद और पार्टी में पूर्वाचल के चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले महाबल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली किसी व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं है जो ये तय करे कि कौन यहां रहेगा और कौन नहीं। मिश्रा ने कहा कि दिल्ली किसी के बाप की नहीं है, दिल्ली सबकी है।

उन्होंने कहा कि गोयल को अपने बयान के लिए माफी मांगानी चाहिए। आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने ट्वीट कर गोयल के बयान का विरोध करते हुए कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा की सहयोगी शिवसेना महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के प्रवेश का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की बांटने की राजनीति का एक उदाहरण है।

इस बीच गोयल ने गुरूवार को राज्यसभा में दिल्ली के बजट पर चर्चा के दौरान दिए गए अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मेरे कहने का तात्पर्य था कि अगर देश के अन्य राज्य विकसित होंगे तो लोग दिल्ली नहीं आएंगे, मुझे गलत उद्धत किया गया। दिल्ली में राष्ट्रपति शासन होने की वजह से राजधानी का बजट संसद से पारित किया गया है।

राज्यसभा में बजट पर हुई चर्चा में गोयल ने कहा था कि हरदिन एक नया प्रवासी दिल्ली आता है। ये अधिकांश उत्तर प्रदेश और बिहार से होते हैं। वे यहां इसलिए आते हैं क्योंकि उन्हें अपने राज्य में रोजगार के अवसर नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले ये प्रवासी झुग्गी झोंपड़ी बस्तियों में रहते हैं जो बाद में अवैध कालोनी के रूप में बस जाती हैं। अगर दिल्ली की समस्या का समाधान करना है तो प्रवासियों को रोकना होगा।

गोयल ने देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों को रोकने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की शाखा दूसरे राज्यों में खोलने का भी सुझाव दिया था। उनका कहना था कि यहां हर साल बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं पढ़ाई करने के लिए आते हैं क्योंकि उनके राज्यों में अच्छे कालेज नहीं है। छात्र छात्राओं के इस प्रवाह को दिल्ली में आने से रोकने के लिए अन्य राज्यों में कालेज की शाखाएं खोली जा सकती हैं।
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