वर्धा यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स ने फूंका UGC का पुतला, सीट कटौती के फैसले से हैं नाराज

 महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) में शुक्रवार शाम को विद्यार्थियों ने 'यूजीसी' और केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। सीट कटौती के विरोध में दो दिनों से प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने यूजीसी से फौरन इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। 

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) में शुक्रवार शाम को विद्यार्थियों ने 'यूजीसी' और केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। सीट कटौती के विरोध में दो दिनों से प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने यूजीसी से फौरन इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। 

आक्रोशित विद्यार्थियों ने यूजीसी के फैसले को सरकार की साजिश करार दिया है। वर्धा से एमफील कर रही छात्रा अंकिता रासुरी का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक की नहीं बल्कि सभी विद्यार्थियों के हक की लड़ाई है। इसे लेकर देशभर की यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को एकजुट होना चाहिए। अगर आज छात्र-छात्राएं एकत्रित नहीं होंगे  तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

अंकिता का कहना है कि अभी तो एम फिल/ पीएच. डी की सीटें काटी जा रहीं हैं, हो सकता है कल को शिक्षा से वंचित कर दिया जाए। छात्र नेता अरविंद यादव व राजेश सारथी का कहना है कि यूजीसी नोटिफिकेशन में शिक्षक और शोधार्थियों का निश्चित अनुपात होने की बात कही गई है। इसकी आड़ में विद्यार्थियों के एक बड़े वर्ग को शोध से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है। शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जरूरी था कि शिक्षको की संख्या बढाई जाए लेकिन उल्टा विद्यार्थियों की ही संख्या कम कर दी गई। बता दें कि यूजीसी नोटिफिकेशन की वजह से इस बार वर्धा में एम.फिल की 66 और पी.एच.डी.की 31 सीटे ही आई हैं जबकि पिछले वर्ष एम.फिल की 240 और पी.एच.डी. की 65 सीटें थीं। 
ललित fulara
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