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नोटरी पब्लिक की नियु्क्ति में भी आरक्षण की सिफारिश

locationनई दिल्लीPublished: Dec 11, 2023 09:46:08 pm

Submitted by:

Suresh Vyas

- संसदीय समिति ने कहा, पेशे को आकर्षक बनाने को हों प्रयास

नोटरी पब्लिक की नियु्क्ति में भी आरक्षण की सिफारिश
नोटरी पब्लिक की नियु्क्ति में भी आरक्षण की सिफारिश

नई दिल्ली। शपथ पत्र व आम मुख्त्यार नामा समेत विभिन्न प्रकार के विधिक दस्तावेजों को सत्यापित करने वाले नोटरी पब्लिक की नियुक्ति में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है।

कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय सम्बन्धी संसदीय समिति ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया व नोटरी संघों समेत कई हितधारकों व विधि-न्याय मंत्रालय के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श के बाद सोमवार को सदन के दोनों सदनों में पेश 140वीं रिपोर्ट में कहा कि नोटरी की नियुक्ति में हालांकि अजा-जजा, ओबीसी, महिला व दिव्यांग श्रेणी को पात्रता में तीन साल की छूट दी जाती है, लेकिन नोटरी की नियुक्ति में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। नोटरियों की नियुक्ति में अजा, जजा, ओबीसी, महिला व दिव्यांग व अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व के लिए नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए। आवेदन चरण में ही अभ्यर्थी को उनकी श्रेणी दर्शाने के लिए कहा जाना चाहिए, ताकि श्रेणी वार आंकड़े भी उपलब्ध हो सके।

कारों-टैक्सियों में कर देते हैं सत्यापित

समिति ने नोटरी पेशे में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई स्थानों पर नोटरी कारों-टैक्सियों में बैठकर दस्तावेज सत्यापित करते देखे गए हैं। झूठे प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर भी आलोचना होती है। कई जगह निर्धारित से ज्यादा शुल्क लेने की बातें सामने आती हैं। यह पेशा काफी हद तक अनियमित होने से कदाचार व अनैतिक व्यवहार चलन में आ जाता है। इस चुनौती से पार पाने के लिए नोटरी पेशे को आकर्षक बनाने की जरूरत है, ताकि सुयोग्य वकील इसकी तरफ आकर्षित हों।

सरकार से वेतन नहीं, शुल्क भी बहुत कम

समिति ने कहा कि नोटरी को सरकार से वेतन या कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता। नियमों में निर्धारित शुल्क भी आखिरी बार साल 2014 में संशोधित किया गया था, वह भी काफी कम है। समिति ने नोटरी शुल्क में वृद्धि व इसे महंगाई से जोड़ने की सिफारिश करते हुए कहा कि शुल्क हर पांच साल बाद संशोधित किया जाना चाहिए। समिति ने साक्षात्कार आधारित नियुक्ति खत्म कर बार कौंसिल की साल में दो बार होने वाली अखिल भारतीय बार परीक्षा का पैटर्न लागू करने की सिफारिश भी की है।

यह भी की सिफारिशें

-राज्य की आबादी, मुकदमों की संख्या व आर्थिक-वाणिज्यिक गतिविधियों के आधार पर निर्धारित हो नोटरी की संख्या
-पात्रता के लिए प्रैक्टिस की अवधि 10 साल से घटाकर की जाए 5 साल
-हर पांच साल बाद नवीनीकरण की बाध्यता खत्म कर दें तय आयु तक प्रैक्टिस री अनुमति
-डिजिटलीकृत हो नोटरी प्रक्रिया, बढ़े ई-हस्ताक्षर, ई-मुहर व ई-टिकट का प्रयोग

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