scriptRussian and Belarusian players banned from wimbledon | अब विंबलडन में भी नहीं खेल पाएंगे रूस व बेलारूस के टेनिस स्टार | Patrika News

अब विंबलडन में भी नहीं खेल पाएंगे रूस व बेलारूस के टेनिस स्टार

रूस के यूक्रेन पर हमले के विरोध में लिया फैसला। फीफा विश्व कप समेत कई बड़े टूर्नामेंटों में पहले ही रूसी खिलाडिय़ों को किया जा चुका है बैन। टेनिस खिलाड़ी टूर इवेंट तो खेल सकते हैं, लेकिन अपने देश का नाम व झंडे का उपयोग नहीं कर सकते। इस साल 27 जून से शुरू होगा वर्ष का तीसरा ग्रैंड स्लेम विंबलडन।

नई दिल्ली

Published: April 20, 2022 11:02:58 pm

रूस और बेलारूस के खिलाड़ी अब साल के तीसरे ग्रैंड स्लेम विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट में भी नहीं खेल पाएंगे। विंबलडन ने बुधवार को रूस व बेलारूस के खिलाडिय़ों पर प्रतिबंध लगा दिया। रूस के यूक्रेन पर जारी हमले के विरोध में यह फैसला लिया गया है। विंबलडन के आयोजक ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब ने यह जानकारी दी। क्लब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रूस के वैश्विक प्रभाव को सीमित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
अब विंबलडन में भी नहीं खेल पाएंगे रूस व बेलारूस के टेनिस स्टार
अब विंबलडन में भी नहीं खेल पाएंगे रूस व बेलारूस के टेनिस स्टार
स्टार खिलाड़ी होंगे प्रभावित

इस फैसले से विश्व नंबर दो पुरुष एकल खिलाड़ी डेनिल मेदवेदेव और महिला एकल में दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी बेलारूस की आर्यना सबालेंका के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। इनके अलावा कई अन्य स्टार खिलाड़ी भी इस फैसले से प्रभावित होंगे। हालांकि रूस व बेलारूस के खिलाडिय़ों को टेनिस टूर में हिस्सा लेने की इजाजत तो है, लेकिन ये अपने देश के झंडे तले नहीं खेल सकते। गौरतलब है कि इस साल विंबलडन का आयोजन 27 जून से 10 जुलाई तक होगा।
बस खेलना ही मकसद

हालांकि इन दोनों देशों के खिलाडिय़ों का मकसद सिर्फ खेलना है। वे स्कोरबोर्ड व रैंकिंग लिस्ट से अपने देश का नाम हटाए जाने के बावजूद भी विचलित नहीं हुए। पेशेवर टेनिस के पुरुष व महिला संघ डब्ल्यूटीपी व एटीपी दोनों ही इन खिलाडिय़ों को विभिन्न टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने से रोकने के पक्ष में नही हैं। उनके लगता है कि इन खिलाडिय़ों को अपने खेल को जारी रखने से रोकन अनुचित होगा।
मौन का अर्थ है कि आप इससे सहमत हैं: स्वितोलिना
दुनिया की 25वें नंबर की खिलाड़ी यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब के इस फैसले से सहमत हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि इस संकट के समय में मौन रहने का मतलब है कि आप जो हो रहा है उससे सहमत हैं। एक समय आता है जब मौन विश्वासघात होता है और अब वह समय आ गया है जब हमें आवाज उठानी होगी और खुल कर विरोध करना होगा।

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