आपसी समझौते के बाद अब तलाक की अर्जी लंबित होने पर भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

आपसी समझौते के बाद अब तलाक की अर्जी लंबित होने पर भी दूसरी शादी मान्य: सुप्रीम कोर्ट

Anil Kumar | Publish: Aug, 26 2018 09:48:14 PM (IST) New Delhi, Delhi, India

कोर्ट ने कहा कि यदि तलाक को लेकर दोनों पक्षों के बीच केस वापसी पर समझौता हो गया हो तो याचिका पेंडिग रहते हुए भी दूसरी शादी मान्य होगी।

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बेहद ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि तलाक को लेकर दोनों पक्षों के बीच केस वापसी पर समझौता हो गया हो तो याचिका पेंडिग रहते हुए भी दूसरी शादी मान्य होगी। आगे कोर्ट ने यह साफ करते हुए कहा कि तलाक के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज होने से पहले दूसरी शादी पर रोक संबंधि तमाम प्रावधान तब लागू नहीं होगा जबतक कि दोनों पक्षकारों ने केस वापस लेने का समझौता कर लिया हो। बता दें कि मौजूदा स्थिति में हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के खिलाफ दाखिल याचिका अदालत में पेंडिंग के दौरान दोनों पक्षों में से कोई भी दूसरी शादी नहीं कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

आपको बता दें कि देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि हमारा मत है कि हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 15 के तहत तलाक के खिलाफ अपील की पेंडिंग होने की स्थिति में दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होगा जब दोनों पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला किया हो। यदि बिना समझौते के कोई भी पक्ष दूसरी शादी करता है तो वह पूरी तरह से गैरकानूनी होगा।

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क्या है पूरा मामला

आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली में एक व्यक्ति ने शादी की। हालांकि कुछ समय बाद उसकी पत्नी ने अदालत में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की। इस पर तीस हजारी कोर्ट 31 अगस्त 2009 को पत्नी के हक में फैसला सुनाते हुए डिक्री पारित कर दी। इस फैसले के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस बीच दोनों में केस वापस लेने को लेकर समझौता हो गया। फिर 15 अक्टूबर 2011 को पति ने समझौते के तहत अपील वापस लेने की अर्जी दाखिल की। जिसपर 28 नवंबर 2011 को हाइकोर्ट में मामला टेकअप हुआ और फिर 20 दिसंबर 2011को अर्जी का निपटारा कर दिया गया। इस बीच याचिका पेंडिंग के दौरान पति ने दूसरी शादी कर ली थी।

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पत्नी ने दूसरी शादी के खिलाफ दायर की थी याचिका

आपको बता दे कि अब पति के दूसरी शादी के खिलाफ पत्नी ने अदालत में अर्जी दाखिल की और मांग की कि उनकी दूसरी शादी को शून्य करार दिया जाए, क्योंकि शादी के बाद तलाक की अपील पेंडिंग रहने के दौरान 6 दिसंबर 2011 को शादी हुई थी। अर्जी में पत्नी ने कहा कि हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 15 के तहत ये शादी मान्य नहीं है। दूसरी महिला की अर्जी अदालत ने खारिज कर दी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया और शादी को अमान्य करार दे दिया। इस फैसले के खिलाफ पति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और चुनौति दी। सुप्रीम कोर्ट ने बारिकी से हाईकोर्ट के फैसले और हिन्दू मैरिज एक्ट का निरीक्षण करते हुए एक अहम फैसला सुनाया।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसल सुनाया

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि कानूनी प्रावधान के तहत यदि तलाक हो जाए और तलाक के खिलाफ तय सीमा में अपील दायर न की गई हो तो उसके बाद दूसरी शादी हो सकती है। यदि तलाक के खिलाफ किसी ने अपील दाखिल कर दी हो तो अपील पेंडिंग के दौरान शादी नहीं हो सकती है, हालांकि समझौते के बाद दूसरी शादी हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू मैरिज ऐक्ट सोशल वेलफेयर कानून है। कानूनी सुविधा के लिए है। अदालत ने हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा-15 के प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि तलाक के खिलाफ अपील खारिज होने से पहले शादी अवैध है। ऐक्ट के प्रावधान का मकसद ये है कि जिसने अपील की हुई है, उसके अधिकारों की रक्षा की जाए। साथ ही दूसरी शादी में किसी तरह से कोई अड़चन न हो।

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