जल्लीकट्टू पर रोक हटाने वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार 

जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध हटाए जाने की मांग को लेकर चेन्नई तथा अन्य दक्षिणी राज्यों में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर हस्तक्षेप संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से गुरुवार को इनकार कर दिया। न्यायालय ने इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को मद्रास उच्च न्यायालय में पृथक याचिका दाखिल करने के लिए कहा है।  तमिलनाडु में छात्र एवं युवा जलीकट्टू को अपनी सांस्कृतिक पहचान बताते हुए सड़कों पर जमा हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पोंगल के दौरान जलीकट्टू का आयोजन उनकी संस्कृति है। इस पर तत्काल प्रतिबन्ध हटाया जाए।

नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध हटाए जाने की मांग को लेकर चेन्नई तथा अन्य दक्षिणी राज्यों में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर हस्तक्षेप संबंधी याचिका पर सुनवाई से गुरुवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश ङ्क्षसह खेहर की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता राजा रामन की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा था कि तमिलनाडु के लोग मरीना बीच पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों को भोजन और पानी लेने की अनुमति नहीं दे रही है। इसलिए न्यायालय को इस मामले को सुनवाई के लिए स्वत: संज्ञान में लेना चाहिए , जैसा कि राम लीला मैदान वाले मामले में लिया गया था। न्यायालय ने इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को मद्रास उच्च न्यायालय में पृथक याचिका दाखिल करने के लिए कहा है।
एआर रहमान करेंगे भूख हड़ताल
जल्लीकट्टू के आयोजन पर बैन के खिलाफ संगीतकार एआर रहमान भूख हड़ताल करेंगे। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने जलीकट्टू के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है कि वे भूख हड़ताल करेंगे। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, मैं तमिलनाडु की स्पिरिट के लिए आज (शुक्रवार) को भूख हड़ताल करूंगा।

राज्योव्यापी रेल रोको आंदोलन भी
डीएमके ने शुक्रवार को राज्योव्यापी रेल रोको आंदोलन की घोषणा की है। माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों में यह आंदोलन उग्र हो सकता है। हिंसा और उपद्रव की आशंका के चलते शुक्रवार को चेन्नई में निजी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। 

प्रधानमंत्री ने खींचे हाथ
इस बीच गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जलीकट्टू पर अध्यादेश लाने संबंधी मांग से हाथ खड़े करने से नाराज प्रदर्शनकारी भड़क गए हैं। चेन्नई में मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। दरअसल, गुरुवार को जलीकट्टू पर अध्यादेश लाने के अनुरोध के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाने से साफ मना कर दिया। मोदी ने दलील दी कि मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से वह इस पर अध्यादेश नहीं ला सकते। 

सड़कों पर जमे हैं छात्र-युवा
इस खबर के बाहर आने पर तमिलनाडु में प्रदर्शनकारी उग्र हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पोंगल के दौरान जलीकट्टू का आयोजन उनकी संस्कृति है। इस पर तत्काल प्रतिबन्ध हटाया जाए। राज्यभर के छात्र एवं युवा जलीकट्टू को अपनी सांस्कृतिक पहचान बताते हुए सड़कों पर जमा हो गए हैं। कॉलेज के छात्र भी कई घंटों से प्रदर्शन कर रहे हैं।

विदेशों तक जलीकट्टू का विरोध
जलीकट्टू के विरोध की आंच भारत से बाहर भी पहुंच गई है। श्रीलंका, इग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में जलीकट्टू से प्रतिबंध हटाने की मांग हो रही है। दुनिया के दूसरे देशों में रह रहे तमिल समुदाय ने छात्रों-युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया है।
यह है जलीकट्टू 
तमिलनाडु में हर साल पोंगल के दौरान जल्लीकट्टू के आयोजन की परंपरा है। यह एक तरह से पशुओं को काबू करने का खेल है। इसमें बेकाबू सांड को ताकत के जरिए काबू में किया जाता है। हालांकि, पेटा ने पशु हिंसा को लेकर इसके खिलाफ याचिका दायर की और इसे प्रतिबंधित करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसी याचिका पर आया था। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टियां इस फैसले का विरोध कर रही हैं।
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