केंद्र का नया फरमान, सरकार की निंदा पर नपेंगे कर्मी

केंद्र का नया फरमान, सरकार की निंदा पर नपेंगे कर्मी
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Shankar Sharma | Publish: Oct, 09 2016 11:23:00 PM (IST) New Delhi, Delhi, India

अब अपनी सरकार की आलोचना करना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए काफी महंगा पड़ सकता है। अगर कोई कर्मचारी सरकार की नीतियों या सरकार की आलोचना करते पाया गया

नई दिल्ली. अब अपनी सरकार की आलोचना करना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए काफी महंगा पड़ सकता है। अगर कोई कर्मचारी सरकार की नीतियों या सरकार की आलोचना करते पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। यह नया फरमान केंद्र की मोदी सरकार ने जारी किया है। माना जा रहा है कि सरकार का यह फरमान विवाद का रूप ले सकता है।

दरअसल, भारतीय राजस्व सेवा (सीमाकर एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क) के अधिकारियों और अखिल भारतीय केंद्रीय उत्पाद शुल्क राजपत्रित कार्यकारी अधिकारी संघ समेत गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) में बदलाव का सुझाव देने के बाद केंद्र का यह रुख सामने आया है।

जीएसटीएन एक निजी कंपनी है जिसे जीएसटी परिषद सचिवालय की संरचना के लिए सूचना प्रौद्योगिकी में बुनियादी ढांचे के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। यह परिषद राजस्व सचिव की अगुवाई में काम करती है। वित्त मंत्रालय की ओर से हाल में जारी एक निर्देश में कहा गया है, 'हाल में ऐसा देखा गया है कि कुछ संघों या महासंघों ने सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ टिप्पणियां की हैं। सभी संघ या महासंघ यह ध्यान दें कि अगर कोई भी सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना में ही शामिल रहता है तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई (अनुशासनात्मक कार्रवाई) की जाएगी।

सेवा नियमों का दिया हवाला
निर्देश में सेवा नियमों का हवाला दिया गया है जिसके मुताबिक किसी भी सरकारी सेवक पर सरकार की किसी नीति या कार्रवाई के खिलाफ आलोचना करने पर पाबंदी है।

आम सेवा हितों को बढ़ावा देना हो लक्ष्य
मौजूदा नियमों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि इन सेवा संघों का प्राथमिक लक्ष्य इसके सदस्यों की आम सेवा हितों को बढ़ावा देना होना चाहिए। मंत्रालय ने सभी प्रमुख आयुक्तों और संबंधित महानिदेशकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सिर्फ मान्य कर्मचारी संघों को उल्लिखित नियमों का लाभ मिले। जबकि, सुप्रीम कोर्ट  ने कहा था,  सरकार की आलोचना न मानहानि और न देशद्रोह।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 1962 के संवैधानिक पीठ के फ़ैसले का हवाला देते हुए कहा है कि सरकार की आलोचना करना न तो मानहानि है और न ही देशद्रोह है। सुप्रीम कोर्ट ने 1962 के केदारनाथ बनाम बिहार सरकार के मामले का हवाला दिया।
यूजीसी के चेयरमैन पर गिर चुकी है गाज : बीते साल 26 मई को संसद की स्थायी समिति के समक्ष राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) की यूनिवर्सिटी को फंडिंग की आलोचना करने पर मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। तब स्मृति ईरानी मंत्री थीं। मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि आगे से सरकारी योजनाओं के खिलाफ कुछ भी बोलने से पहले इसकी इजाजत लेनी होगी।

सोशल मीडिया पर भी नहीं कर सकेंगे सरकार की बुराई : इससे पहले खबर आई थी कि केंद्र सरकार अपने अधिकारियों के कंडक्ट रूल में बदलाव करने जा रही है। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों को टीवी, सोशल मीडिया और संचार के दूसरे साधनों पर सरकार की बुराई करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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