तंबाकू से हर साल 13 लाख भारतीयों की मौत, टैक्स का वार हो तो मिलें 49 हजार करोड़

एक्सपर्ट बता रहे हैं कि सिगरेट, बीड़ी और गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया जाए तो देश को 49 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। साथ ही तंबाकू का उपयोग 22-30 फीसदी तक घटेगा

By: Mukesh Kejariwal

Updated: 02 Jan 2021, 03:01 PM IST

तथ्य-सत्य

- तंबाकू ऐसा उत्पाद है जो अपने उपयोग करने वालों में से आधे की मौत का कारण बनता है

- भारत तंबाकू उत्पादन और उपयोग में दुनिया में दूसरे स्थान पर है

- 12.80 लाख भारतीय तंबाकू उत्पादों की वजह से सालाना मारे जाते हैं

- 3,500 मौतें भारत में इसकी वजह से रोजाना होती हैं

राजधानी दिल्ली की रायसिना पहाड़ी पर मौजूद नोर्थ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारत में बजट तैयार कर रहे एक्सपर्ट्स के लिए इस साल का बजट आजादी के बाद की पहली ऐसी चुनौती ले कर आया है। सरकारी आमदनी कम है लेकिन सरकारी खर्च कम करने की बजाय बढ़ाना है। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स को घटाने-बढ़ाने की कवायद में सरकार के सामने एक मारक फार्मूला है जिसे अपना कर ना सिर्फ खजाने में सालाना 50 हजार करोड़ रुपये की आमदनी बढ़ सकती है, बल्कि लाखों लोगों की जान भी बचाई जा सकेगी।

वित्त मंत्रालय के शीर्ष सूत्र बताते हैं कि उन्हें इस संबंध में कुछ सरकारी विभागों, संस्थानों और गैर सरकारी संस्थानों की ओर से विस्तृत सिफारिशें मिली हैं। लेकिन इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं बन सकी है।

कमाई बढ़ाने और जान बचाने का फार्मूला

टैक्स और अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञों का मानना है कि इन उत्पादों पर टैक्स बढ़ा कर देश को दोहरा फायदा हो सकता है। एक ओर टैक्स बढ़ाने से इनका उपयोग 22 से 30 फीसदी तक कम हो जाएगा। साथ ही बिक्री घटने के बावजूद सरकार को सालाना लगभग 49 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। यानी जानलेवा उत्पादों का उपयोग घटा कर देश का आर्थिक लाभ भी होगा।

तंबाकू से हर साल 13 लाख भारतीयों की मौत, टैक्स का वार हो तो मिलें 49 हजार करोड़तंबाकू से हर साल 13 लाख भारतीयों की मौत, टैक्स का वार हो तो मिलें 49 हजार करोड़

ऐसे मिल सकते हैं देश को 49,000 करोड़

स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक मामलों के जानकार रीजो जॉन इस संबंध में अपने विस्तृत अध्ययन के आधार पर कहते हैं-

सिगरेट- मौजूदा औसत कीमत 12.7 रुपये है। इस पर 2017 तक प्रति हजार सिगरेट 4170 रुपये का उत्पाद शुल्क लगाया जाता था। अगर दुबारा इतना शुल्क लगा दिया जाए तो देश को मिलेंगे 27,423 करोड़ रुपये अतिरिक्त।

फायदा- 27 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व,

उपयोग में 22 प्रतिशत कमी

बीड़ी- इस समय 25 बीड़ी वाले एक बंडल की औसत कीमत है 20 रुपये। अभी हजार बीड़ी पर सिर्फ एक रुपये का उत्पाद शुल्क है। बीड़ी की हर बत्ती पर 50 पैसे का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगा दिया जाए तो 18,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकता है।

फायदा- 18 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व,

उपयोग में 24 प्रतिशत कमी

चबाने वाले तंबाकू उत्पाद-

इस समय औसत कीमत प्रति सौ ग्राम 102 रुपये है। इन पर उत्पाद शुल्क 103 प्रतिशत हो तो औसत कीमत हो जाएगी 186 रुपये और खजाने में आएंगे 3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त।

फायदा- 3 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व,

उपयोग में 29 प्रतिशत कमी

आम जन के लिए क्यों जरूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक 2011 में इसका सालाना आर्थिक बोझ जीडीपी का 1.16% पाया गया था। उस समय यह रकम 104,482 करोड़ थी जो अब बढ़ कर 1,79,000 करोड़ आंकी जा रही है। यानी लगभग दो लाख करोड़। बढ़े टैक्स से मिलने वाली रकम का उपयोग कोरोना से लड़ने के लिए किया जा सकता है।

विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने से इनका उपयोग कम होता है। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) कहता है कि तंबाकू उत्पादों की खुदरा कीमत का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा टैक्स का होना चाहिए।

कोरोना, तंबाकू और सरकार

तंबाकू को कोरोना बढ़ाने के लिए जिम्मेवार पाए जाने के साक्ष्य मिलने के बाद केंद्र और कई राज्य सरकारों ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के दस्तावेज साफ तौर पर कहते हैं कि धुम्रपान करने वालों को कोरोना का खतरा ज्यादा होता है। इसी तरह उनमें कोरोना होने के बाद गंभीर लक्षण पैदा होने का खतरा भी ज्यादा होता है। गुटखा, पान मसाला, खैनी आदि खा कर थूकने से कोरोना सहित सभी संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता है।

तंबाकू से हर साल 13 लाख भारतीयों की मौत, टैक्स का वार हो तो मिलें 49 हजार करोड़

एक्सपर्ट व्यूः

कड़े कदम के लिए जनता में स्वीकार्य माहौल बनाए सरकार

-राधिका पांडे, अर्थशास्त्री; फेलो, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फायनांस एंड पॉलिसी

पब्लिक फाइनांस के सिद्धांतों के मुताबिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह उत्पादों पर सरकारों को टैक्स लगातार बढ़ाना चाहिए। साथ ही अभी कमजोर तबके के लिए और ढांचागत विकास पर खर्च करने की प्रतिबद्धता है। ऐसे में राजस्व पैदा करने के लिए यह एक अच्छा माध्यम हो सकता है। हालांकि सरकारों को यह ध्यान भी रखना होगा कि इसके लिए जनता में स्वीकार्यता हो। सरकार इसका फायदा और इस कदम के पक्ष में सभी आंकड़ें इकट्ठा कर जनता के सामने बड़े स्तर पर रखे। ऐसा नहीं हो कि सरकार को एक और वजह से लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ जाए।

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Mukesh Kejariwal Incharge
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