उम्मीद - 2021 - बदलाव के लिए रहें तैयार, उम्मीदों का खड़ा है कारोबार

आने वाले समय में बदल जाएगा कमाई का तरीका ।
कई वर्ष तक तेज ग्रोथ होने की संभावना ।

By: विकास गुप्ता

Published: 18 Dec 2020, 01:24 PM IST

हमारी दुनिया आज फटाफट बदलाव की ना सिर्फ साक्षी है बल्कि सक्रिय भागीदार है। इंडस्ट्रियल सोसाइटी अब इंफोर्मेशन सोसाइटी में बदल रही है। इसे आप उत्तर औद्योगिक समाज के नाम से जानें, उत्तर आधुनिक समाज के नाम से या फिर किसी और नाम से। हमारा हिंदुस्तानी समाज बहुत डायनमिक है। यानी हम एक गतिशील समाज हैं जो ऊर्जा से भरे हैं और नए विचारों को अपनाने को तैयार रहते हैं। हमारे जन सबसे युवा हैं। बीते साल ने समाज के हर क्षेत्र और वर्ग पर जो चोट की है, उसको हम इस संदर्भ में रख कर देखेंगे तो सही आकलन कर सकेंगे। कलेंडर में समाप्त हो रहे साल ने खूब तकलीफें दीं तो नया साल उम्मीदों की रोशनी दिखा रहा है। कैसा होगा 2021 बदलाव, नए साल में क्या बदलने की उम्मीद है इस बारे में हमने सुभाष चंद्र गर्ग, पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव से एक्सपर्ट व्यू लिया जानते इसके बारे में।

सरकारें दिखाएं साहस -
सरकारों को भी उसी तरह के फैसले लेने होंगे। आज भी हमारी सरकारें सोशलिज्म से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई हैं। बदलाव का प्रतिरोध तो होगा ही। 1991 के दशक में भी हुआ और आज खेती के बाजार (एग्रीकल्चर मार्केटिंग) में किए सुधार का हो रहा है। लेकिन बदलाव तो करने होंगे। बहुत से काम हैं जिनमें सरकार के होने की कोई जायज वजह नहीं है। सरकार एयरलाइन या टेलीकॉम कंपनी क्यों चला रही है? इन क्षेत्रों से आप बाहर आएंगे तो देश का विकास होगा। कारोबार सरकार को नहीं लोगों को करना है। सरकार को इसके लिए सही नीतियां बनानी हैं और नियमन करना है। लोग भी हैं, मौका भी है। होगा तभी जब जरूरी नीतियों के साथ सरकार आगे बढ़ेगी। सरकार एयरलाइन या टेलीकॉम कंपनी क्यों चला रही है? इनसे बाहर आएंगे तो विकास होगा...

बदल जाएगा कमाई का तरीका -
जब सब कुछ बदल रहा है। जीने का तरीका, सोचने का तरीका बदल रहा है तो कमाई का तरीका भी बदलेगा। पहले अधिकांश काम कारखानों में होते थे, संपदा यहीं से आती थी। अब इसके लिए तकनीक पर ज्यादा जोर है। लोगों के काम करने के तरीके में भी बदलाव हो रहा है। इसे आत्मसात करना होगा।

कई वर्ष तक तेज ग्रोथ की संभावना -
अगली तिमाही में स्थिति सामान्य हो जानी चाहिए। मार्च बाद की तिमाही में ग्रोथ भी दिखने लगेगी। नुकसान की भरपाई भी अगले साल हो जानी चाहिए। ऐसा हुआ तो मानिए कि कोरोना से हमारी अर्थव्यवस्था दो साल के लिए ठहरी पर इसके बाद सही माहौल होने से तेजी मिलेगी।

लॉकडाउन का ताला -
आर्थिक मोर्चे पर हाल पहले भी कोई खासे अच्छे नहीं थे। लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह से मई तक तो हमने अपने हर तरह के काम-धंधों पर लॉकडाउन का मोटा ताला ही मार दिया। उद्योग धंधे बंद, रेल-बस ठप। कारोबार नहीं, रोजगार नहीं। नतीजा उस तिमाही में जीडीपी को अभूतपूर्व नुकसान का झटका पहुंचा। तीन महीने में देश लगभग 50 लाख करोड़ कमाता, उसमें लगभग 12 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।

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विकास गुप्ता
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