उम्मीद-2021 : - बीमारियों को हराना है तो बूस्ट करनी होगी इम्यूनिटी

- कोरोना वैश्विक महामारी से निपटने के लिए इलाज और प्रबंधन पर भी हम सब को मिलकर काम करना है।
- आयुर्वेद ने बताया, कैसी हो जीवन पद्धति ।
- आने वाले नए साल में बीमारियों से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ध्यान देना होगा।

By: विकास गुप्ता

Published: 16 Dec 2020, 08:11 PM IST

UMMEED-2021 : कोरानाकाल में रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्छा बनाने के लिए आयुर्वेद पूरी दुनिया में छाया रहा। कोरोना से बचने के लिए क्वाथ और काढ़ा पीने की सलाह दी गई। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आयुष क्वाथ लोगों तक पहुंचाया। आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली कई तरह की औषधियां हैं। आने वाले नए साल में आयुर्वेद क्या तैयारी कर रहा है और क्या हैं चुनौतियां। इसके बारे में हमने एक्सपर्ट प्रो. संजीव शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर ) (चेयरमैन, रिक्रूटिंग रूल्स हार्मोनाइजेशन कमेटी, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली से बात की, आइये जानते हैं।

सवाल- सबसे ज्यादा इम्यूनिटी की बात हो रही है। इम्यूनिटी कमजोर होने के क्या कारण है?
जवाब- किसी भी व्याधि से लडऩे में रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्यूनिटी आवश्यक है। कोरोना काल में आम आदमी में इसकी जागरूकता बढ़ी है। इसके दो मुख्य कारण है एक तो यह कि कोरोना की न तो अभी तक दवाई है और न ही कोई वैक्सीन। दूसरा खुद प्रधानमंत्री ने इम्युनिटी को लेकर संदेश दिए। इसलिए लोगों को समझ आया कि बचाव के लिए इम्यूनिटी के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। जहां तक रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की बात है तो इसके कई कारण है, जैसे जन्म से ही इसका कम होना, हमारे खानपान में कमियां और जीवन शैली का उचित नहीं होना।

सवाल- आयुर्वेद में कोरोना पर कोई अध्ययन किया गया है?
जवाब- आयुर्वेद में बहुत ही समन्वयात्मक तरीके से पूरे देश में वैज्ञानिक शोध विभिन्न औषधियों पर किए गए है। सारे शोध आयुष मंत्रालय द्वारा गठित शोध समिति की देखरेख हुए हैं या चल रहे है। जिन आयुर्वेद की औषधियों पर शोध हुए है वा है गडूची धन वटी, अश्वगन्धा, गुडूची, पिप्पली एवं आयुष-64 और च्यवनप्राश है। देश में आयुर्वेद के कोरोना के ऊपर 112 स्थानों पर 68 शोध सम्पन्न हुए है।

सवाल- किन चीजों के प्रयोग से बढ़ सकती है इम्यूनिटी?
जवाब- उचित इम्युनिटी के लिए जरूरी है हम जीवन पद्धति को, आहार, निद्रा, मानसिक, आध्यात्मिक व सामाजिक स्वास्थ्य को संतुलित रखें। साथ ही गिलोय (गडूची घन वटी), अश्वगन्धा, पिप्पली, आयुष-64 या च्यवनप्राश का प्रयोग श्रेयस्कर रहता है।

सवाल- योग-प्राणायाम इम्यूनिटी बढ़ाने में कितने कारगर हैं?
जवाब- योगासनों से शरीर की मांसपेशियों एवं त्वचा में रक्त संचार बढ़ता है। सारे जोड़ पूर्णतया सुडोल, स्वस्थ एवं लचीले रहते हैं और जोड़ों में भी रक्त संचार बढ़ता है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और मानसिक शक्ति भी मिलती है।

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